Explained: क्या है China का रेड टूरिज्म, क्यों इसे खतरनाक माना जा रहा है?

चीन की सरकार अब रेड टूरिज्म को बढ़ावा दे रही है (Photo -CNN)

चीनी युवाओं में देशप्रेम और वफादारी बढ़ाने के लिए शी जिनपिंग सरकार रेड टूरिज्म को बढ़ावा (Red Tourism promotion in China Xi Jinping government) दे रही है. हालांकि आलोचक मान रहे हैं कि सरकार इतिहास से छेड़छाड़ करते हुए एकतरफा कहानियां सुना रही है.

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    एक ओर दुनिया कोरोना की तीसरी लहर का इंतजार कर रही है तो दूसरी तरफ चीन में पर्यटन को बढ़ावा देने के तरीके खोजे जा रहे हैं. अब वहां एक टर्म आया है- रेड टूरिज्म (red tourism). इसके तहत चीन में उन जगहों पर पर्यटन पर जोर दिया जा रहा है, जिनका कम्युनिस्ट पार्टी (Communist Party of China) के इतिहास से संबंध हो. ऐसी जगहों को रेड साइट कहा जाता है. इन जगहों पर सैलानियों को बुलाने का मकसद है, उनमें देशभक्ति और वफादारी को बढ़ावा देना.

    दी जा रही इतिहास की जानकारी 
    वैसे तो चीन में रेड टूरिज्म टर्म साल 2004 में ही आ गया था, लेकिन अब कोरोना काल में जबकि बहुत से देशों ने अपनी सीमाएं बंद कर रखी हैं, चीन में स्थानीय स्तर पर लोगों को रेड साइट्स पर घूमने-फिरने के लिए प्रमोट किया जा रहा है. इसके तहत न केवल आय बढ़ाना एक उद्देश्य है, बल्कि चीनी युवा पीढ़ी को चीन के इतिहास की जानकारी देना भी शामिल है.

    कई रेड स्पॉट बनाए जा चुके
    पूर्वी चीन में नान्हू झील ऐसी ही एक जगह है. यहां साल 1921 में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की पहली बैठक एक बोट में हुई थी. पार्टी के सबसे बड़े नेता और आधुनिक चीन के जनक माने जाने वाले माओ जेडांग की जन्मस्थली को भी रेड स्पॉट बना दिया गया. जहां पर भी माओ जेडांग या दूसरे शुरुआती नेताओं से जुड़ी कोई घटना हुई थी, उसे रेड स्पॉट में बदल दिया गया.

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    आधुनिक चीन के जनक माने जाने वाले माओ जेडांग की जन्मस्थली को भी रेड स्पॉट बना दिया गया- सांकेतिक फोटो (firstpost via AP)


    लोगों को इतिहास से जोड़ने के प्रोग्राम होते हैं
    खासकर बच्चों और युवाओं के लिए नाटक और गाने होते हैं ताकि उन्हें चीनी इतिहास बताया जा सके और जोड़ा जा सके. स्कूल अपने स्टूडेंट्स को लेकर यहां आते हैं. यहां तक कि रेड स्पॉट पर विजिट उनके कोर्स का हिस्सा होता है.

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    क्यों रेड टूरिज्म को दे रहे बढ़ावा 
    कम्युनिस्ट पार्टी का प्रतीक लाल रंग है इसलिए इसे रेड टूरिज्म कहा जा रहा है. लेकिन यहां बात ये आती है कि आखिर क्यों चीन को इस तरह के पर्यटन के विकास की बात सूझी? क्या इसके पीछे भी उनकी कोई खास मंशा है? इसे जानने के लिए एक बार मौजूदा पार्टी प्रमुख और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के कामों के बारे में जानना होगा. दरअसल फिलहाल चीन के सबसे ताकतवर शख्स जिनपिंग लगातार ऐसे तरीके खोज रहे हैं, जिससे चीनियों के मन में अपने देश के लिए वफादारी भर दी जाए.

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    पर्यटन के इस तरीके पर खूब जोर दिया जा रहा 
    रेड टूरिज्म ऐसा ही एक तरीका है. साल 2016 में जिनपिंग ने खुद कहा था कि ऐसी जगहों पर घूमने से चीनी जनता धार्मिक और आध्यात्मिक तौर पर अपने देश से मजबूत से जुड़ जाएगी. बकौल जिनपिंग रेड स्पॉट्स पर जाकर कम्युनिस्ट पार्टी की कुर्बानियां देखने से ही लोग असल मायने में शिक्षा पा सकेंगे. पार्टी की मैग्जीन में भी रेड टूरिज्म को बढ़ाने पर लगातार जोर दिया जा रहा है.

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    जिनपिंग सरकार रेड टूरिज्म को प्रमोट करने में लगी है तो वहीं इसे आलोचना भी झेलनी पड़ रही है- सांकेतिक फोटो (news18 English via Reuters)


    पर्यटन से बढ़ी रेवेन्यू 
    इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में इसका जिक्र है कि कैसे महामारी के दौरान इन जगहों पर स्थानीय लोगों के आने से काफी रेवेन्यू बन रही है. नई पीढ़ी को लुभाने के लिए यहां आर्टफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का भी इस्तेमाल किया जाता है. मकसद कामयाब भी हो रहा है. यहां 21 से 30 साल के लोग खूब विजिट कर रहे हैं. अलीबाबा की एक रिसर्च के मुताबिक बीते कुछ सालों में साल 2000 या उसके बाद जन्मे लोगों का रेड स्पॉट्स पर आना सालाना के हिसाब से 630 प्रतिशत बढ़ा.

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    रेड स्पॉट्स पर सरकार ने खर्ची भारी रकम 
    पिछले चार ही सालों में चीनी सरकार ने इन जगहों पर पर्यटन को प्रमोट करने के लिए अच्छी-खासी रकम खर्च की. ये लगभग 370 मिलियन डॉलर है. इसके अलावा चीन के खरबपति भी आने वाले समय में इन जगहों पर पैसे लगाने जा रहे हैं. रेड टूरिज्म को बढ़ावा देने का नतीजा भी दिख रहा है. साल 2019 में यहां 73.08 मिलियन विजिटर आए, जिनमें ज्यादातर चीनी लोग थे. इससे चीन की सरकार को लगभग 62.2 बिलियन का फायदा एक ही साल में हुआ.

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    चीन में कई रेड स्पॉट बनाए जा चुके हैं (Photo- news18 via Reuters)


    हो रही रेड टूरिज्म की आलोचना 
    एक ओर जिनपिंग सरकार रेड टूरिज्म को प्रमोट करने में लगी है तो वहीं इसे आलोचना भी झेलनी पड़ रही है. आलोचकों का मानना है कि सरकार केवल एकतरफा कहानियां सुनाकर कच्चे मन वाले चीनी बच्चों और युवाओं में गलत धारणाएं तैयार कर रही है. रेड टूरिज्म का मकसद केवल चीन के लिए देशभक्ति जगाना नहीं, बल्कि दूसरे देशों के लिए नफरत जगाना भी है. साथ ही इसके जरिए इतिहास की गलत जानकारी लोगों में ठूंसी जा रही है.

    कोर्स में देशभक्ति की सीख 
    वैसे इन आलोचनाओं को खारिज भी नहीं दिया जा सकता क्योंकि चीन में वफादारी सिखाने का सिलसिला नया नहीं. बता दें कि मौजूदा चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग तक के नाम पर स्कूल-कॉलेजों में कोर्स शुरू हो चुका है. शी-थॉट नाम से इस कोर्स में जिनपिंग की तारीफों के पुल बांधे गए हैं कि कैसे वे देश को आगे बढ़ा रहे हैं. साथ ही पुराने नेताओं का महिमामंडन भी है. किंडरगार्टन से लेकर यूनिवर्सिटी तक में इस तरह के नाटक और प्रोग्राम करवाए जाते हैं जो कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना और माओ जेडांग के गुण गाएं. साल के तीन हफ्तों तक हर जगह देशभक्ति के ही प्रोग्राम होते हैं. ये हर स्कूल और कॉलेज की पढ़ाई का अनिवार्य हिस्सा है.