Explained: क्या है वो लसलसी चीज, जिसने Turkey के समुद्र को बुरी तरह से जकड़ लिया है?

तुर्की के सी-स्नॉट से मछलियां मरने लगी हैं, साथ ही हैजा फैलने का डर भी जताया जा रहा है सांकेतिक फोटो (pixabay)

तुर्की के मारमरा सागर (Marmara sea) में ऊपर से लेकर नीचे 80 से 100 फीट की गहराई तक सी-स्नॉट (sea snot outbreak in Turkey) जम चुका है. इससे मछलियां मरने लगी हैं, साथ ही हैजा फैलने का डर भी जताया जा रहा है.

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    अक्सर चीन में उइगर मुस्लिमों पर हो रही हिंसा के खिलाफ चुप्पी को लेकर घेरे में खड़ा तुर्की अब पर्यावरण से जुड़ी समस्या झेल रहा है. वहां के मारमरा सागर को जेली जैसी चीज ने जकड़ लिया है, जिसे सी-स्नॉट भी कहते हैं. पर्यावरण के जानकार अंदेशा जता रहे हैं कि इससे समुद्र के भीतर वनस्पतियों से लेकर मछलियां भारी संख्या में मर जाएंगी. तुर्की के राष्‍ट्रपति तैयप रेसेप एर्दोगान (Turkey President Recep Tayyip Erdogan) पर इसे लेकर भारी दबाव है.

    कितना अहम है ये समुद्र 
    तुर्की का मारमरा समुद्र ( Sea of Marmara), काला सागर को एजियन सागर से जोड़ता है. ये वहां के लोगों के लिए लाइफलाइन भी कहलाता है. इसकी सीमा पर तुर्की के पांच राज्‍य हैं, साथ ही देश की व्यापारिक राजधानी इस्तांबुल भी यहीं है. ऐसे में जाहिर है कि मारमरा समुद्र से काफी सारी व्यापारिक गतिविधियां होती रहीं. लेकिन अब समुद्र में जेली जैसी चिपचिपा सी-स्नॉट जमा हो गया है, जिससे जहाज या नावों का गुजरना असंभव हो गया है और देश के भीतर व्यापार को काफी नुकसान हो रहा है.

    इसे लेकर एक्सपर्ट चेतावनी दे रहे हैं कि जल्द से जल्द इसपर काबू न हुआ तो हालात काफी बिगड़ सकते हैं. इधर राष्ट्रपति एर्दोगान ने सी-स्नॉट के लिए शहरों से आए सीवेज को जिम्मेदार ठहरा डाला.

    sea snot outbreak Turkey
    सी-स्नॉट समुद्र में बनने वाला एक लसलसा पदार्थ है- सांकेतिक फोटो


    क्या है समुद्र में फैलती ये जेली?
    सी-स्नॉट समुद्र में बनने वाला एक लसलसा पदार्थ है. ये तब बनता है जब शैवाल बहुत ज्यादा पोषण पाकर तेजी से बढ़ने लगते हैं. ये कोई बढ़िया स्थिति नहीं, बल्कि शैवालों का बढ़ना समुद्र के लिए काफी खतरनाक है. यहां ये भी जान लें कि समुद्र या कहीं पर भी शैवाल का बढ़ना जल-प्रदूषण का नतीजा है. खुद पर्यावरण के जानकार भी ये मान रहे हैं कि शैवालों का बढ़ना और समुद्र में आई लसलसाहट क्लाइमेंट चेंज और फैक्ट्रियों-घरों की गंदगी पानी में मिलने का नतीजा है.

    प्रदूषण हो सकता है वजह 
    सी-स्नॉट से समुद्र की ऊपरी परत पर भूरी-मटमैली, चिपचिपी परत जम जाती है, जिससे पानी में नावें जहाज या इंसान भी नहीं तैर सकते. ये मोटी झागदार परत अब इस्तांबुल के तटीय इलाकों में फैल चुकी है. इसपर राष्ट्रपति लगातार शहर की आबादी और लापरवाही को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. बता दें कि तुर्की के इस व्यापारिक शहर में लगभग 1.55 करोड़ लोग रहते हैं और आबादी के लिहाज से ये देश का सबसे बड़ा हिस्सा है.

    sea snot outbreak Turkey
    तुर्की के व्यापारिक शहर इस्तांबुल में लगभग 1.55 करोड़ लोग रहते हैं- सांकेतिक फोटो


    पहले भी आ चुकी है समस्या 
    साल 2007 में भी सी-स्नॉट दिखा था लेकिन इस बार ये ज्यादा बुरी तरह से फैला हुआ है. देश के इतिहास में ये अब तक की सबसे बड़ी पर्यावरण आपदा मानी जा रही है. समुद्र के ऊपर मोटी परत जम जाने से नीचे मछलियों और वनस्पतियों को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पा रहा, जिसके कारण भारी संख्या में मछलियों समेत कोरल और स्पंज जैसी वनस्पतियां खत्म हो चुकी हैं.

    सागर में इतने नीचे तक है परत 
    ये लसलसा पदार्थ केवल समुद्र के ऊपर लेयर की तरह नहीं रहा, बल्कि नीचे भी जा चुका है. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि ये समुद्र में 80 से 100 फीट नीचे तक फैल गया है. चेतावनी दी जा रही है कि अगर जल्द ही एक्शन न लिया जाए तो ये समुद्र में गहराई तक चला जाएगा, जिससे बाद समुद्री इकोसिस्टम में भारी तबाही मचेगी. अंदेशा तो यहां तक कि इससे प्रभावित जगह के आसपास के सारे सी-एनिमल मारे जाएंगे.

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    समुद्र के ऊपर मोटी परत जम जाने से नीचे जीवों और वनस्पतियों को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पा रहा- सांकेतिक फोटो (pixabay)


    असर समुद्र के भीतर ही नहीं, बल्कि बाहर भी
    मछलियां बेचकर गुजारा करने वाले मछुआरे समुद्र में मछलियां पकड़ने जाते तो हैं लेकिन चिपचिपे पदार्थ की मोटी परत में उनके जाल फंसकर फट जाते हैं. इससे मछलियां तो हाथ नहीं आ रहीं, साथ ही महंगे जाल फटने पर नुकसान अलग हो रहा है. मछुआरे शिकायत कर रहे हैं कि सी-स्नॉट की परेशानी लंबे समय से चली आ रही थी, जिसपर गंभीर होने पर ही सरकार का ध्यान गया.

    हैजा फैलने का डर जताया जा रहा
    इन तमाम परेशानियों के बीच एक जो सबसे गंभीर बात निकलकर आ रही है, वो है गंदे पानी के कारण होने वाली बीमारियां. पर्यावरणविदों को डर है कि पानी का बहाव रुकने के कारण इससे हैजा जैसी खतरनाक बीमारी पूरे इस्तांबुल को चपेट में ले सकती है.

    ये उठाए जाएंगे कदम
    तुर्की में लगातार उठती मांग के बीच वहां के राष्ट्रपति ने इसे लेकर हाल ही में गंभीरता दिखाई. इंडियन एक्सप्रेस ने बीबीसी के हवाले से बताया कि एर्दोगान ने तुरंत एक्शन की बात की है. मारमरा समुद्र को प्रोटेक्टेड एरिया में बदला जाने वाला है. इसके साथ पानी को साफ करने के लिए वॉटर ट्रीटमेंट होगा ताकि लसलसी परत हट जाए. साथ ही कारखानों और लोगों को प्रदूषण न करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा.