जानिये... फांसी देने वाले को आखिर क्यों कहा जाता है जल्लाद?

जानिये... फांसी देने वाले को आखिर क्यों कहा जाता है जल्लाद?
जल्लाद शब्द भारतीय भाषा का शब्द नहीं है.

पुराने संस्कृत (Sanskrit) साहित्य में दंड के रूप में मौत (Death) देने वाले को वधिक कहा जाता था, लेकिन ये जल्लाद (Hangman) कैसे हुआ? इस सवाल का जवाब जानने के लिए इस शब्द की उत्पत्ति पर विचार करना होगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 8, 2020, 6:43 PM IST
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नई दिल्ली. निर्भया के गुनहगारों को फांसी का समय नजदीक आने के साथ ही अपराधियों को फांसी देने वाले जल्लाद का जिक्र भी खूब चल रहा है. मेरठ के जल्लाद पवन भी इन अपराधियों के वहशीपन को लेकर गुस्से में हैं. लेकिन ये जल्लाद शब्द आया कैसे. हालांकि ये भी सही है कि जल्लाद शब्द बोल-चाल में किसी को बहुत अधिक क्रूर बताने के अर्थ में धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जाता है. फिर भी मन में सवाल आता ही रहता है कि जल्लाद शब्द कैसे बना, कहां से आया?

बातचीत में मुहावरे के तौर पर जल्लाद शब्द का इस्तेमाल उन लोगों के लिए किया जाता है, जो हृदयहीन होते हैं. भावनाओं का जिन पर असर नहीं होता. जिनके अंदर दया- ममता नहीं होती. वैसे किसी व्यक्ति को फांसी दे पाना बिना कठोर भावनाओं के संभव नहीं है.

जल्लाद शब्द के बारे में बात करने पर ‘शब्दों का सफर’ ग्रंथ लिख कर उनकी उत्पत्ति और उनकी यात्रा मार्ग का विवेचन करने वाले पत्रकार अजित वडनेरकर कहते हैं कि ये तो तय है कि ये शब्द भारतीय भाषाओं से नहीं लिया गया है.



कुरआन में जिक्र



वैसे पवित्र धार्मिक किताब कुरआन के सूर ए नूरि की चौथी आयत में इसका जिक्र एक आयत के रूप में आता है-
“वल्लज़ीना यरमूनअल्-मुह्सनाति सुम्म लम् यअ्तु बिअरबति शुहदाअ फ़जलीदूहुम समानीना जल्दह ला तक़्कबलू लहुम शहादतन अबदन् व उलाइक हुमुल- फ़ासिक़ून”

इसका अर्थ होता है कि जो लोग पाक यानी इज्जतदार महिलाओं पर व्यभिचार या दुराचार के आरोप लगाते हैं और चार गवाह न ला पाएं तो उन्हें 80 कोड़े मारो और कभी उनकी गवाही क़बूल न करो और यही लोग बदकिरदार हैं.

भाषाओं के जानकार अब्दुल कय्यूम के मुताबिक 'जल्दह' शब्द का अर्थ 80 कोड़े से है.

अरबी से आया है शब्द
भाषा विज्ञानी अजित वडनेरकर की राय भी कुछ ऐसी ही है. वे कहते हैं – “ जल्लाद अरबी मूल का शब्द है. इसका अर्थ ऐसे आदमी से है जो अपराधियों को कोड़े मारता है या उन्हें दी गई मौत की सजा की तामील करता है.”

निर्भया केस के चारों दोषियों के डैड वारंट पर साइन हो चुके हैं.


वो कहते हैं – “यह शब्द बना है सेमिटिक क्रिया गलादा से जिसमें चारों ओर, घेरा जैसे भाव है. इसका अरबी रूप है -जीम-लाम-दाल यानी जलादा.ग-ल-द धातु में बंधन का, बांधने का भाव महत्वपूर्ण है.” वो आगे ये भी कहते हैं कि इस शब्द में महत्व बांधने से है. इसीलिए किताबों को बांध कर रखने वाले को जिल्द कहा जाता है. उनका मानना है कि बांधने के कारण ही मृत्यु-दंड को अंजाम देने वाले को जल्लाद कहा गया. वो ये भी कहते हैं कि किताबों पर जिल्द चढ़ाने वाले को भी फारसी में जल्लादा कहा जाता है. चूंकि फांसी लगाने वाला भी गांठ लगाकर ही अपना काम पूरा करता है, यही वजह है कि उसे जल्लाद कहा जाता है.

कोड़े मारने और सजा देने में समानता है. इसके अलावा मौत की सजा को भारत में लागू करने के लिए जिस तरह से फांसी लगानी होती है उसमें गांठ भी लगाने का काम उसी व्यक्ति के जिम्मे होता है. इस लिहाज से भी जल्लाद शब्द की उत्पत्ति अरबी से ही माननी चाहिए.

'वधिक' का जिक्र आता है पुराने भारतीय साहित्य में
ये भी ध्यान रखने वाली बात है कि प्राचीन भारतीय संस्कृत साहित्य में वधिक का जिक्र आता है. माना जाता है कि पहले के समय में दंड देने के लिए तलवार से काट दिया जाता था. उसे वध कहा जाता रहा. लेकिन आधुनिक भारत में मृत्यु दंड देने के लिए काटा नहीं जाता बल्कि गांठ या कहा जाए फांसी लगाई जाती है. लिहाजा इसे लागू करने वाले व्यक्ति को जल्लाद कहा गया.

जल्लाद मुहावरा भी है
क्योंकि किसी को मौत की सजा लागू कर पाना कठोर दिल वाले और भावनाओं से ऊपर हो चुके आदमी के ही बूते की बात है. इसी कारण जल्लाद शब्द एक मुहावरे के तौर पर भी बातचीत में इस्तेमाल किया जाने लगा.

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