Explained: क्या है श्वेतपत्र, किस इरादे से जारी किया जाता है?

साल 1922 में श्वेतपत्र यानी वाइट पेपर जारी करने की शुरुआत हुई थी- सांकेतिक फोटो (pixabay)

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के श्वेतपत्र (former Congress president Rahul Gandhi released White Paper) पर राजनैतिक घमासान चल रहा है. वैसे सबसे पहला श्वेतपत्र ब्रिटेन में जारी हुआ था. तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल के दौर में निकलने के कारण इसे चर्चिल पेपर भी कहा गया.

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    कांग्रेस ने कोरोना वायरस पर श्वेतपत्र (White Paper) जारी करते हुए केंद्र सरकार से कई सवाल किए. इसपर फिलहाल पार्टियों में आरोप-प्रत्यारोप चल रहे हैं लेकिन साथ ही ये बात भी आ रही है कि आखिर श्वेतपत्र क्या है और क्यों इसका असर काफी तेज माना जाता है. यहां बता दें कि चीन ने भी पिछले साल कोरोना के मामले में आरोपों का जवाब देते हुए श्वेतपत्र जारी किया था. उन कागजों को चीन का फाइनल स्टेटमेंट माना गया था और काफी समय तक चुप्पी रही थी.

    क्यों और कब जारी होता है श्वेतपत्र 
    राजनयिकों या फिर देशों की ओर से जारी होने वाला श्वेतपत्र एक तरह की रिपोर्ट है, जो किसी मुश्किल मुद्दे पर सिलसिलेवार जानकारी देती है. ये आमतौर पर तब जारी किया जाता है कि जब मुद्दे पर बहुत सारे विचार एक साथ आ रहे हों और उसे समझने में लोगों को समस्या हो रही हो. इस कागज के जरिए मुद्दे को समझा जाता है, किसी समस्या का हल खोजा जाता है और यहां तक कि श्वेतपत्र में लिखी बातों से किसी निष्कर्ष तक भी पहुंचा जा सकता है.

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    कहा गया था चर्चिल पेपर
    सबसे पहले साल 1922 में वाइट पेपर की शुरुआत हुई, जब ब्रिटिश प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल ने एक दंगे की सफाई में इसे जारी किया था. तब इसे चर्चिल वाइट पेपर भी कहा जाने लगा, जो कि चलन में आने के बाद दोबारा वाइट पेपर कहलाने लगा.

    White Paper by Rahul Gandhi
    कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कोरोना को लेकर श्वेतपत्र जारी किया है (Photo- news18 English via AFP)


    लोकतांत्रिक देशों में श्वेतपत्र का काफी महत्व है
    इन देशों में राजनेता किसी पॉलिसी पर अपनी राय देने के लिए और लोगों तक उसकी पहुंच बनाने के लिए भी पेपर जारी करते हैं. कनाडा में श्वेतपत्र सीधे जनता तक पहुंचाए जाते हैं. माना जाता है कि इससे किसी पॉलिसी पर जनता की राय भी पता चल सकेगी.

    सफाई देते हुए भी जारी होता है 
    एक श्वेतपत्र किसी भी विषय पर हो सकता है, लेकिन यह हमेशा काम करने के तरीके को बेहतर बनाने के लिए सुझाव देता है. इसके अलावा सफाई में भी ये पत्र जारी किया जाता है. इससे पता चलता है कि किसी खास मामले पर किसी व्यक्ति या संस्था या सरकार की क्या सोच है और वो इस बारे में किस हद तक खुद को दोषी मानती है.

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    चीन ने भी दिया था श्वेतपत्र 
    चीन ने पिछले साल श्वेतपत्र जारी करके कह दिया कि कोरोना में उससे कोई लापरवाही नहीं हुई, बल्कि उसने जानकारी मिलते ही सूचना दुनिया को दे दी. इस तरह से चीन इशारा कर रहा था कि कोरोना को लेकर दुनिया उसपर और आरोप न लगाए.  इसी तरह से कंपनियां अपने किसी प्रॉडक्ट या फिर नई तकनीक की जानकारी दुनिया तक ले जाने के लिए भी श्वेतपत्र जारी करती हैं.

    White Paper by Rahul Gandhi
    चीन ने पिछले साल श्वेतपत्र जारी करके कह दिया कि कोरोना में उससे कोई लापरवाही नहीं हुई- सांकेतिक फोटो (pixabay)


    सिर्फ वाइट पेपर ही नहीं होते, बल्कि इसके कई प्रकार भी हैं. रंग के आधार पर तय होता है कि पेपर किस तरफ संकेत कर रहा है यानी उसका मकसद क्या है.

    • एक है ग्रीन पेपर. ये सरकारी काम का मसौदा या प्रपोजल है. इसमें काम का आश्वासन नहीं होता है, बल्कि ये सिर्फ रूपरेखा होती है कि इस तरह से काम किया जा सकता है.

    • इसी तरह से एक पिंक पेपर भी होता है. ये अमेरिका के कई स्टेट्स में जारी किया जाता है. इसमें पॉलिसी की चर्चा होती है जो कि सीमित लोगों तक सिमटी रहती है.

    • ब्लू पेपर भी होता है, जो तकनीक की बात करता है. यानी ब्लू पेपर के जरिए सरकारी विभाग किसी तकनीकी चीज पर बात करते हैं.

    • एक और अहम टाइप है यलो पेपर. ये ऐसा कागज है जो फाइनल तो हो चुका है, लेकिन जिसका छपना बाकी है. इसे प्रीप्रिंट के नाम से भी जाना जाता है.

    • आमतौर पर वाइट पेपर के बाद देश हमेशा किसी न किसी तरह का पॉलिटिकल रुख लेते हैं. जैसे कोई नया कानून बनाया जा सकता है.

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