चुनाव की घोषणा के बाद सरकार और मंत्री क्या कर सकते हैं और क्या नहीं?

न्यूज़18 इलस्ट्रेशन
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चुनाव आयोग (Election Commission) द्वारा चुनाव की घोषणा के साथ ही कोड ऑफ कंडक्ट (Code of Conduct) तय हो जाता है. जानिए कि एक बार चुनाव का शेड्यूल (Election Schedule) घोषित हो जाने पर सत्ता पर काबिज़ पार्टी के लिए किस तरह की गाइडलाइनें होती हैं.

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  • Last Updated: September 30, 2020, 10:02 AM IST
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बिहार चुनाव (Bihar Elections) की सरगर्मियों के बीच ताज़ा खबरें कह रही हैं कि कोरोना वायरस महामारी के चलते विपक्ष ने विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) को कुछ समय के लिए टालने की बात कही थी, लेकिन चुनाव की घोषणा (Announcement of Elections) के बाद अब विपक्षी पार्टियां मैदान में उतरने को तैयार हैं. बहरहाल, अब सभी पार्टियों को एक आदर्श संहिता (Code of Conduct) का पालन तो करना ही पड़ेगा कि क्या बोलना है, कैसे और किस तरह का बर्ताव करना है.

सबसे पहले तो राज्य में या केंद्र में सत्ताधारी पार्टी को यही ध्यान रखना होता है कि निष्पक्ष चुनाव हों, इस​के लिए सरकारें सुनिश्चित करें कि किसी भी तरह वो अपनी सरकारी शक्तियों या मशीनरी का इस तरह इस्तेमाल न करें, जिससे सत्तारूढ़ पार्टी को चुनाव प्रचार में मदद मिले और विपक्ष को चुनाव के निष्पक्ष न हो पाने संबंधी शिकायत का मौका मिले.

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प्रतीकात्मक तस्वीर


इससे पहले न्यूज़18 ने आपको बताया था कि लोकतंत्र का त्योहार यानी चुनाव को ठीक तरह से, शांति से और लोकतांत्रिक मर्यादा के साथ संपन्न कराने के लिए चुनाव आयोग के नियमानुसार कोई पार्टी क्या कर सकती है, क्या नहीं. अब, सरकार और मंत्रियों के आदर्श बर्ताव को लेकर जानिए कि क्या कहती है चुनाव आयोग की आचार संहिता.
मंत्रियों को चुनाव प्रचार अभियानों और और मंत्री के रूप में आधिकारिक कार्यक्रमों को आपस में जोड़े नहीं और न ही चुनाव प्रचार के काम में सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल करें.
सत्ता पर काबिज़ पार्टी के सदस्यों या मंत्रियों को सरकार के लिए आधिकारिक रूप से मिले ट्रांसपोर्ट साधनों यानी विमानों, वाहनों के साथ ही सरकारी मशीनरी या कर्मचारियों को अपनी पार्टी के चुनाव प्रचार में नहीं लगाना चाहिए.
मैदानों जैसे सार्वजनिक स्थानों, हैलीपैडों और विमान सुविधाओं आदि का इस्तेमाल सरकार को सिर्फ अपनी पार्टी के लिए ही नहीं, बल्कि सभी राजनीतिक पार्टियों के लिए करने की सुविधा देना चाहिए.
जो पार्टी सत्ता में है, वो रेस्ट हाउसों या डाक बंगलों या सरकारी आवासीय सुविधाओं का इस्तेमाल सिर्फ ​अपने लिए नहीं कर सकती. इसके इस्तेमाल के लिए दूसरी पार्टियों को भी इजाज़त दी जाना चाहिए. लेकिन, सत्ता या विपक्षी कोई भी पार्टी इन सरकारी संपत्तियों का इस्तेमाल चुनावी प्रोपैगैंडा या गतिविधियों के लिए नहीं कर सकती.
अखबारों में विज्ञापन के लिए सरकारी फंड का इस्तेमाल, मीडिया का दुरुपयोग, आधिकारिक मीडिया का पक्षपाती कवरेज के लिए उपयोग जैसे कदम सत्तारूढ़ पार्टी उठाती है, तो यह आचार संहिता का उल्लंघन है.
चुनाव आयोग जब चुनाव की घोषणा कर दे, तब सरकार के मंत्री और अन्य अफसर वो ग्रांट, फंड या भुगतान जारी नहीं कर सकते, जो विचाराधीन या विवेकाधीन रहे हों.
इसी तरह, चुनाव की घोषणा के बाद से मंत्री और सरकारी अफसर किसी तरह की वित्तीय ग्रांट की घोषणा या वादा नहीं कर सकते, किसी परियोजना या कार्यक्रम में​ शिलान्यास या भूमिपूजन नहीं (सिविल सर्वेंट कर सकते हैं) कर सकते, सड़क या पानी संबंधी किसी निर्माण का वादा और सरकारी या सार्वजनिक उपक्रमों में किसी प्रकार की एड-हॉक नियुक्तियां नहीं कर सकते.
केंद्र या राज्य के किसी भी मंत्री को अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन करते हुए किसी पोलिंग स्टेशन या मतगणना केंद्र में प्रवेश करने की इजाज़त नहीं है, लेकिन एक उम्मीदवार या वोटर या आधिकारिक एजेंट की हैसियत से जितना नियमानुसार किया जा सकता है, कर सकते हैं.
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