क्या जिलों के कलेक्टर केवल IAS अफसर ही बनाए जा सकते हैं?

क्या जिलों के कलेक्टर केवल IAS अफसर ही बनाए जा सकते हैं?
कैडर पोस्ट पर कैडर अधिकारी की नियुक्ति के नियम जानिए.

नियुक्ति करना State Government के हाथ में है, लेकिन राज्य सरकार नियमों के खिलाफ जाकर नियुक्ति करती है तो इसे Court में चुनौती दी जा सकती है. DM की पोस्ट पर किन अफसरों को कैसे नियुक्त किया जा सकता है? ये भी जानिए कि नागालैंड विवाद (Nagaland Controversy) से पहले कैसे राज्य इस पोस्टिंग को लेकर मनमानी करते रहे हैं.

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आप कहेंगे कि अचानक ये सवाल क्यों? इसके पीछे वजह ये है कि Nagaland के मुख्य सचिव के नाम लिखे गए एक पत्र में पर्सनेल और ट्रेनिंग विभाग (DoPT) ने लिखा है कि राज्य के छह जिलों में District Collector के पद पर हुई Postings में नियम कानून ताक पर रख दिए गए. अस्ल में, यहां छह जिलों मे कलेक्टर के पदों पर IAS अफसरों के बजाय राज्य Civil Services के अफसरों को नियुक्त कर दिया गया है. सवाल खड़ा हुआ है कि कलेक्टर पद के लिए नियमानुसार किसे नियुक्त किया जा सकता है.

क्या कहते हैं नियम?
नागालैंड चीफ सेक्रेट्री को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि इस तरह की नियुक्ति से IAS (Cadre) Rules 1954 के रूल 9 का उल्लंघन होता है. इस रूल के मुताबिक 'राज्य में कैडर पद पर किसी ऐसे व्यक्ति की नियुक्ति नहीं हो सकती, जो कैडर अफसर न हो, हालांकि इसके अपवाद हैं.' साथ ही, रूल 9(2) के मुताबिक 'अपवाद तभी हो सकता है, जब थोड़े समय के लिए राज्य सरकार कोई नियुक्ति कर रही हो, लेकिन इसके लिए केंद्र सरकार से पहले मंज़ूरी ज़रूरी है.'

ये हैं नियमों के हवाले
ऑल इंडिया सर्विस रूल्स के रूल 8 में साफ तौर पर कहा गया है 'हर कैडर पोस्ट पर कैडर अफसर की ही नियुक्ति होगी.' रूल 9 के हिसाब से 'अस्थायी नियुक्ति' की गुंजाइश निकलती है लेकिन इसे लेकर भी स्थितियां स्पष्ट की गई हैं. कैडर पोस्ट पर अपवाद स्वरूप गैर कैडर अधिकारी को तब नियुक्त ​किया जा सकता है :



* जबकि यह नियुक्ति तीन महीने से कम समय के लिए की जा रही हो.
* जबकि उपयुक्त कैडर अफसर पोस्ट के लिए उपलब्ध न हो.
* जबकि राज्य सरकार ने केंद्र से पहले ही ऐसी नियुक्ति के लिए मंज़ूरी ले ली हो.

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क्या नागालैंड में है 'अपवाद' की गुंजाइश?
खबरों की मानें तो नागालैंड में कैडर पोस्ट पर गैर कैडर अ​फसरों की नियुक्ति से जो विवाद खड़ा हुआ है, उसमें कई विशेषज्ञों के हवाले से कहा गया है कि नागालैंड में ऐसा नहीं है कि IAS अफसरों की उपलब्धता संबंधी कोई संकट हो. इसके बावजूद राज्य सरकार का गैर कैडर अफसरों को नियुक्त करना बड़े भ्रष्टाचार की तरफ इशारा करता है. द प्रिंट की रिपोर्ट में राज्यपाल के पत्र के हवाले से राज्य सरकार और आपराधिक गैंग्स के बीच बने नेक्सस का कच्चा चिट्ठा पेश किया गया है.

अस्ल में, नागालैंड में एनडीपी के नेतृत्व में जो सरकार है, उसमें भारतीय जनता पार्टी भी सहयोगी दल है और भाजपा ही केंद्र में सत्ता में है. हालांकि पिछले महीने केंद्र सरकार ने नागालैंड सरकार को इस तरह की नियुक्तियों को लेकर आगाह किया था, लेकिन इसके बावजूद राज्य में ये नियुक्तियां हुईं और विवाद खड़ा हुआ.


कैडर पोस्ट नियुक्ति पर अदालती फरमान
राज्य सरकारें कैडर पदों पर नियुक्ति को लेकर पहले भी मनमानियां करती रही हैं. पिछले साल आम चुनावों से ठीक पहले पश्चिम बंगाल और ओडिशा में राज्य लोक सेवा आयोग के अफसरों को कैडर पदों पर नियु​क्त किए जाने से विवाद भड़का था. इससे पहले 2006 में उत्तर प्रदेश और 2004 में पंजाब व हरियाणा हाई कोर्ट ने ऐसी नियुक्तियों को गलत करार दिया था.

ऐसी नियुक्तियों पर पंजाब व हरियाणा हाई कोर्ट ने कहा था कि 'ये गैरकानूनी, अस्वीकार्य और ऑल इंडिया सर्विस के संविधान के उल्लंघन के तौर पर अनुचित है.' दूसरी तरफ, उत्तर प्रदेश हाईकोर्ट की बेंच ने इसी संदर्भ में 2006 में राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि जिलाधीश के पद पर किसी PCS अधिकारी की नियुक्ति न की जाए.

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क्या हैं इन नियुक्तियों से खतरे?
पिछले साल चुनावों के समय में हुईं इस तरह की गैरकानूनी नियुक्तियों को लेकर IAS एसोसिएशन ने आपत्तियां दर्ज कराते हुए कहा ​था कि ये पद संवेदनशील होते हैं और चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं इसलिए ऐसी नियुक्तियों को लेकर नियमों का पालन ज़रूरी है. साथ ही, कैडर पोस्ट पर गैर कैडर अफसर की नियुक्ति से संवैधानिक व्यवस्था और देश के संघीय ढांचे को धक्का पहुंचता है.

एसोसिएशन मानती है कि लंबी अवधि के लिए संकट पैदा करने के साथ ही इस तरह की नाजायज नियुक्तियों से लोकतांत्रिक मूल्यों पर सवाल खड़े होते हैं. इससे ये साफ संदेश जाता है कि राज्य और केंद्र के बीच तनाव के हालात हैं. इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलने के साथ ही अपराधों को संरक्षण देने के रास्ते भी खुलते हैं.
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