किस रफ्तार से लगातार पिघल रही है आर्कटिक की समुद्री बर्फ?

ग्लोबल वॉर्मिंग के भयानक सच को दर्शाने वाली कई नाटकीय तस्वीरें इस साल आर्कटिक क्षेत्र से आ चुकी हैं. इस बारे में ताज़ा अपडेट के साथ ये भी जानें कि जुलाई के महीने के बावजूद अमेरिका और यूरोप में हीटवेव का कहर किस तरह बरपा है.

News18Hindi
Updated: July 21, 2019, 6:10 PM IST
किस रफ्तार से लगातार पिघल रही है आर्कटिक की समुद्री बर्फ?
उत्तरी गोलार्ध में तेज़ी से पिघल रही है समुद्री बर्फ.
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Updated: July 21, 2019, 6:10 PM IST
आर्कटिक महासागर में बर्फ की जो परत जमी है, इस साल दूसरे सबसे कम स्तर पर पाई गई है. ताज़ा अध्ययन में मिली इस स्थिति के संदर्भ में कहा जा रहा है कि उत्तरी ध्रुव के आसपास के इलाकों में जुलाई महीने के बावजूद तापमान जिस कदर बढ़ा हुआ है, ये उसका नतीजा है. उधर, अमेरिका और यूरोप में जुलाई के महीने में हीट वेव चलने की खबरें आ रही हैं और न्यूयॉर्क में तो गर्मी के कारण मौसम इमरजेंसी का ऐलान कर पूरे शहर में 500 कूलिंग सेंटर खोले गए हैं. इन दो खबरों के आपस में तालमेल के बारे में जानें.

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कोलोराडो स्थित स्नो एंड आइस डेटा सेंटर ने कहा कि आर्कटिक क्षेत्र में बर्फ के पिघलने से हो रहे नुकसान को महत्वपूर्ण संकेत माना जाना चाहिए और दुनिया के क्लाइमेट को लेकर चिंता की जाना चाहिए. अनुमान है कि जुलाई 2012 में आर्कटिक में बर्फ की परत के सबसे कम स्तर को लेकर जो रिकॉर्ड था, इस साल के आंकड़े उसके बहुत करीब हैं. आर्कटिक सर्कल में आने वाले अलास्का, कनाडा, ग्रीनलैंड में इस साल रिकॉर्ड तापमान और हीटवेव के चलते बर्फ का ज़्यादा नुकसान हुआ.

इस साल आईं कई नाटकीय तस्वीरें

ग्लोबल वॉर्मिंग के भयानक सच को दर्शाने वाली कई नाटकीय तस्वीरें इस साल आर्कटिक क्षेत्र से आ चुकी हैं, जिनके विश्लेषण में कहा जा चुका है कि पिछले तीन दशकों की तुलना में इस बार बर्फ पिघलने की रफ्तार कई गुना बढ़ चुकी है. स्टडी के दावे के मुताबिक 20 हज़ार वर्ग किलोमीटर का बर्फीला कवर यानी वेल्स के आकार जितना कवर हर दिन प्रभावित हुआ है.

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यूरोपीय संघ के कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस संस्थान ने कहा कि दुनिया भर में इस साल जून रिकॉर्ड स्तर पर सबसे गर्म रहा. वहीं, आर्कटिक की बर्फ पिघलने के पीछे जंगली आग की घटनाओं को भी प्रमुख कारण माना जा रहा है. अलास्का और साइबेरिया के साखा रिपलब्लिक में पिछले कुछ हफ्तों में आग की 100 घटनाएं हुईं.
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न्यूयॉर्क में गर्मी के चलते लोगों के लिए कूलिंग सेंटर खोल दिए गए हैं.


मौसम का कहर जारी
अमेरिका और यूरोप में जुलाई के महीने में भी हीट वेव का दौर जारी है. जबकि आम तौर से जुलाई से इन देशों में गर्मी का मौसम ढलान पर आ जाता है. लेकिन, इस साल हालात अलग हैं. अमेरिका में बढ़े तापमान से करीब 15 करोड़ लोग हीट वेव के खतरे में हैं और पूर्वी कनाडा में भी गर्मी को लेकर चेतावनियां जारी की गई हैं. वहीं, यूके में भी गर्मी में इज़ाफा हो रहा है और मौसम विभाग के मुताबिक कुछ इलाकों में 33 डिग्री या उससे ज़्यादा तापमान पहुंचने का अनुमान है.

पर्यावरण विज्ञानियों के मुताबिक ये दोनों बातें एक दूसरे की पूरक हैं. तापमान बढ़ने का असर समुद्री और ध्रुवीय बर्फ के पिघलने और बर्फीले कवर के स्तर के घटने का कारण बनता है और दूसरी तरफ, बर्फ के घटने के कारण गर्मी बढ़ना स्वाभाविक है. वास्तव में, ग्लोबल वॉर्मिंग के लिए पिछले कुछ दशकों में हुए पर्यावरणीय नुकसान को दोषी माना जा रहा है. और, दुनिया भर के देशों को भविष्य के इस सबसे खतरनाक संकट के लिए बार बार आगाह किया जा रहा है.

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First published: July 21, 2019, 6:10 PM IST
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