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क्या होगा अगर सारे वायरस दुनिया से गायब हो जाएं तो?

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में मरीजों के स्वस्थ होने की दर में भी सुधार हुआ है. (सांकेतिक फोटो)

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में मरीजों के स्वस्थ होने की दर में भी सुधार हुआ है. (सांकेतिक फोटो)

Science चूंकि मनुष्यों पर ही केंद्रित रहा है या रहता है इसलिए Virus के संसार के बारे में जानता बहुत कम है लेकिन उसके अनुमान कम नहीं हैं. Covid-19 महामारी के दौर में एक वायरस का प्रकोप झेलते हुए इस बारे में सोचना ही होगा कि मनुष्यों के लिए वायरसों के बारे में बहुत कुछ जानना कितना ज़रूरी है.

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    दुनिया भर में हालिया Coronavirus के कारण अब तक 4 लाख 40 हज़ार से ज़्यादा मौतें हो चुकी हैं. इससे पहले भी मानवता के इतिहास में कुछ वायरसों ने लाखों करोड़ों जानें ली हैं. लेकिन अब सवाल यह है कि अगर सारे वायरस दुनिया से गायब हो जाएं, तो क्या होगा? क्या हम चैन से जी सकेंगे या बेचैन होकर मर जाएंगे? विज्ञान के नज़रिये से समझना कि क्या होगा और क्यों, आपको हैरान कर सकता है.

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    इन्फ्लुएंज़ा, स्मॉलपॉक्स, HIV के बाद Corona Virus जानलेवा वायरसों के क्रम की ही अगली कड़ी है. ऐसे समय में जब दुनिया के कई हिस्सों में इस वायरस के प्रकोप के चलते जीवनशैली पूरी तरह बदल रही है, तब कहा जाए कि क्या आप चाहेंगे कि दुनिया से सारे वायरस जादू से गायब हो जाएं? तो शायद सभी एक झटके में जवाब में हां कहेंगे. लेकिन इस जवाब में जादू सचमुच हो गया तो यकीन मानिए कि आप कुछ ही देर के मेहमान होंगे!

    अगर अचानक सारे वायरस गायब हो गए तो करीब एक से डेढ़ दिन के लिए ये दुनिया आश्चर्यजनक जगह बन जाएगी लेकिन उसके बाद हम सब खत्म हो जाएंगे – सच यही है... वायरस दुनिया के लिए जितना सकारात्मक काम करते हैं, वो उनके नकारात्मक प्रभावों से बहुत ज़्यादा है.
    टोनी गोल्डबर्ग, विस्कॉन्सिन–मैडिसन यूनिवर्सिटी में महामारी विशेषज्ञ


    वायरसों के बगैर क्यों नहीं जी सकेगी दुनिया?
    वायरसों की कुल आबादी में से बहुसंख्या उन वायरसों की है, जो मनुष्यों के लिए रोगाणु नहीं हैं और हमारे इको सिस्टम में मददगार हैं. इसके अलावा कई वायरस हमारे स्वास्थ्य के लिए ज़रूरी हैं. पौधों, से लेकर कीटों और मनुष्यों तक के लिए जीवन में एक संतुलन के लिए वायरस अहम हैं. कई विशेषज्ञों की तरह मेक्सिको की एक यूनिवर्सिटी में वायरोलॉजिस्ट सुज़ैना लोपेज़ भी कहती हैं कि वायरसों के बगैर जीवन नहीं है.

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    न्यूज़18 क्रिएटिव


    वायरसों को आखिर कितना जानते हैं वैज्ञानिक?
    विषाणु विज्ञान के शोधकर्ताओं को वास्तव में, वायरसों के बारे में बहुत कुछ नहीं पता. हज़ारों वायरसों को तरीके से वर्गीकृत किया जा चुका है लेकिन विज्ञान अब भी लाखों करोड़ों वायरसों से अनजान है. क्यों? वायरस इकोलॉजिस्ट मैरिलिन रूसिंक की मानें तो इसकी वजह यह है कि विज्ञान केवल उन्हीं वायरसों के अध्ययन में समय देता है, जो रोगाणु हैं. हैरत यह है कि ​वैज्ञानिकों को ये भी नहीं पता है कि कितने फीसदी वायरस मनुष्यों के लिए मुसीबत हैं.

    क्या आप जानते हैं वायरसों का ऑक्सीज़न कनेक्शन?
    हमारे इकोसिस्टम में वायरस इसलिए ज़रूरी हैं क्योंकि ये खतरनाक बैक्टीरियाओं को नष्ट करते हैं. अगर वायरस गायब हो गए ये बैक्टीरिया विस्फोट की तरह अचानक बेतहाशा बढ़ जाएंगे. वास्तव में, समुद्री जीवन में 90% जीवन सूक्ष्मजीवों का है और इन्हीं के कारण पृथ्वी की आधी ऑक्सीज़न का उत्पादन होता है और यह पूरी प्रक्रिया वायरसों के ज़रिये ही संचालित होती है. ये वायरस रोज़ाना 20% समुद्री सूक्ष्मजीवों और करीब 50% समुद्री बैक्टीरियाओं को नष्ट करते हैं.

    वायरस नहीं हुए तो दूध भी नहीं मिलेगा?
    सिर्फ समुद्री जीवन या सूक्ष्मजीवों का तंत्र ही नहीं बल्कि और भी कई तरह के जीवों के लिए वायरसों की अहम भूमिका है. उदाहरण के तौर पर वैज्ञानिकों का भरोसा है कि गायों और जुगाली वाले अन्य जानवरों के लिए वायरस घास से सेल्युलोज़ को शकर में परिवर्तन करते हैं. इसके मेटाबॉलिज़्म के बाद दूध का उत्पादन होता है. कई जानवरों के साथ ही मनुष्यों के शरीर में हेल्दी सूक्ष्मजीवों को मेंटेन करने के लिए भी वायरस उपयोगी हैं. रूसिंक और उनके साथियों ने इस बात को साबित करने के प्रमाण खोज लिये हैं.

    हमारे सुरक्षा कवच बनते हैं वायरस?
    मनुष्यों में रोगाणुओं से लड़ने में कई तरह के अच्छे वायरस मदद करते हैं. उदाहरण के तौर पर मनुष्यों के खून में पाया जाने वाला GB virus C असल में, वेस्ट नाइल वायरस और डेंगू वायरस का ही रिश्तेदार है, लेकिन यह मनुष्यों के लिए रोगाणु नहीं ​बल्कि दोस्त है क्योंकि इस वायरस की मदद से HIV पॉज़िटिव मरीज़ों में एड्स की बीमारी देर से पनपती है. वहीं, इसी वायरस की मदद से इबोला के संक्रमण से मौत की आशंका कम होती है.

    इसी तरह, हर्पीज़ वायरस का चूहों पर किया गया अध्ययन बताता है कि इस वायरस के कारण चूहों में ब्यूबॉनिक प्लेग और लिस्टेरिया जैसे बैक्टीरिया संक्रमणों के खतरे कम हुए. हालांकि यह अध्ययन दावे के साथ यह नहीं कहता कि मनुष्यों पर भी इसका यही असर होगा लेकिन अध्ययनकर्ता वैज्ञानिकों को भरोसा है कि मनुष्यों के लिए भी यही नतीजा होगा.


    हमारे शरीर में है वायरसों का कितना बड़ा घर?
    मनुष्यों के जीनोम में अनुमान के हिसाब से 8% वायरल तत्व हैं, वहीं स्तनधारियों के जीनोम में सामान्य रूप से देखा गया कि जीन्स के करीब 1 लाख अवशेष वायरसों से पैदा हुए. 2018 में, दो अलग अलग रिसर्चों ने हैरतअंगेज़ खोज की थी कि प्रोटीन के लिए कोडेड वायरस से पैदा जीन लंबे समय की याददाश्त बनाने में बेहद उपयोगी होता है. इसी के ज़रिये नर्वस सिस्टम में कोशिकाओं के बीच सूचनाएं दौड़ती हैं.

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    विशेषज्ञों का मानना है कि वायरसों की भूमिका सिर्फ मनुष्य नहीं बल्कि बहुकोशीय जीवन के कई पहलुओं में महत्वपूर्ण है. हालांकि इसको लेकर पता बहुत कम है. इस विषय पर आधारित बीबीसी की रिपोर्ट अंत में कहती है कि अब ज़रूरत है कि वायरसों के बारे में ज़्यादा से ज़्यादा जाना और समझा जाए ताकि सिर्फ रोगाणुओं नहीं बल्कि अच्छे वायरसों से ली जा सकने वाली मदद के बारे में भी ज़्यादा जानकारियां हाथ लगें.

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