भारतीय नेवी में हीरो रहा आईएनएस विराट टुकड़े टुकड़े हो जाएगा या बचेगा?

आईएनएस विराट की फाइल इमेज.
आईएनएस विराट की फाइल इमेज.

कभी नौसेना के लिए महत्वपूर्ण रोल निभाने के किस्सों और कभी राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) के परिवार सहित छुट्टियां बिताने के आरोपों से चर्चा में रहा जंगी जहाज़ कबाड़ के भाव टूटेगा या आखिरी वक्त पर आई खबर से कोई उम्मीद की जाए?

  • News18India
  • Last Updated: October 11, 2020, 11:42 AM IST
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जैसे एक उम्र के बाद सेना के स्टाफ (Military) को रिटायर किया जाता है, उसी तरह जब एक जहाज़ बूढ़ा हो जाता है, तो उसे भी मिलिट्री ऑपरेशनों (Military Operations) से सेवामुक्त कर दिया जाता है. आईएनएस विक्रांत (INS Vikrant) आपको याद होगा, जिसे 1997 में नेवी के सेवामुक्त करने के बाद एक होटल के तौर पर विकसित किया गया था, हालांकि 2012 में इसे कबाड़ (Scrap Ship) घोषित कर दिया गया. क्या यही किस्मत आईएनएस विराट (INS Viraat) की भी होगी? क्या हाल में नेवी (Indian Navy) से सेवामुक्त हुए विराट को भी पुर्ज़ा पुर्ज़ा कर दिया जाएगा?

भारत और यूनाइटेड किंगडम ने मिलकर इस तरह की कोशिशें की थीं कि किसी तरह के फंड से विराट को बचाया जा सके, लेकिन नाकामी हाथ लगी. पिछले महीने विराट गुजरात (Gujarat) के अलंग समुद्री तट पर पहुंच चुका और इसके टुकड़े टुकड़े किए जाने की तैयारी शुरू हुई. लेकिन क्या कोई कोशिश विराट को बचाने के लिए हुई या हो सकेगी? ये भी जानिए कि विराट का इतिहास कितना अहम रहा.

विराट का सफर के शुरूआत और कहानी?
जापानी नौसेना को प्रशांत महासागर में मुंहतोड़ जवाब देने के लिए ब्रिटेन ने दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जिन खास जंगी जहाज़ों के प्रोजेक्ट को मंज़ूरी दी थी, उसमें आईएनएस विराट भी शामिल था. नेवी की भाषा में इसका नाम HMS हर्मीज़ रहा. 1944 में हालांकि इसके निर्माण का काम शुरू हुआ था, लेकिन यह काम 1959 तक भी पूरा नहीं हुआ था.
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टुकड़े टुकड़े किए जाने से पहले 'थैंक यू विराट' विदाई समारोह किया गया.


सेन्टॉर क्लास के एयक्राफ्ट कैरियर विराट को ब्रिटेन की रॉयल नेवी ने 1984 में सेवामुक्त किया तो इसके बाद यह भारत के जंगी बेड़े में शामिल हुआ. 12 मई 1987 को भारतीय नेवी में विराट शामिल हुआ और करीब 30 सालों तक अहम रोल निभाता रहा. इससे पहले ब्रिटिश नेवी के लिए विराट उर्फ हर्मीज़ ने स्ट्राइक कैरियर से लेकर एंटी सबमरीन ऑपरेशनों को बखूबी अंजाम दिया था. फॉकलैंड युद्ध में हर्मीज़ ने खासा नाम कमाया था.

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ब्रिटेन से यह जहाज़ ऑस्ट्रेलिया के खरीदे जाने की पूरी संभावना थी, लेकिन यह डील नहीं हुई और विराट भारत को मिला. 80 के दशक से 2015 तक भारत के सबसे प्रमुख एयरक्राफ्ट कैरियर और जंगी जहाज़ के तौर पर विराट ने अहम भूमिका निभाई. रूसी मेड आईएनएस विक्रमादित्य के आने के बाद विराट को सेवामुक्त किए जाने की तैयारी शुरू हुई.

विराट को बचाने की कितनी कोशिशें हुईं?
विराट को बचाने के लिए सितंबर के आखिर तक कोशिश होती रही. इससे पहले नेवी के फैसले के बाद 2015 में आंध्र प्रदेश सरकार ने इसे 20 करोड़ रुपये की लागत से म्यूज़ियम शिप में कन्वर्ट करने का प्रोजेक्ट शुरू किया था, लेकिन पूरा नहीं हो सका. इसके बाद एक ब्रिटिश व्यापारी ने विराट को बचाने के लिए लोगों से चंदा लेने का प्रस्ताव रखा, लेकिन यह स्कीम भी कारगर नहीं रही.

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साल 2018 में महाराष्ट्र सरकार ने विराट को म्यूज़ियम, होटल और मरीन एडवेंचर सेंटर के तौर पर सिंधदुर्ग ज़िले में विकसित करने का बीड़ा उठाया, लेकिन कीमतें ज़्यादा होने के कारण कारोबारियों ने टेंडर में रुचि नहीं दिखाई. इसके बाद विशेषज्ञों ने इसे स्क्रैप करार दिया तो केंद्र सरकार ने मेटल स्क्रैप कॉर्पोरेशन के ज़रिये गुजरात बेस्ड श्रीराम शिपिंग को कबाड़ के तौर पर यह जहाज़ 38.54 करोड़ रुपये में बेच दिया.

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आखिरी सफर पर निकलने से पहले की विराट की तस्वीर.


क्या होगा विराट का भविष्य?
2015 में नेवी ने विराट को सेवामुक्त करने की तैयारी का ऐलान किया और 2016 में विराट ने आखिरी सफर किया. 2017 में इसे औप​चारिक तौर पर नेवी से बेदखल कर दिया गया. इसके बाद विराट के लिए तमाम कोशिशों के नाकाम होने के बाद इसे इसी साल टुकड़े टुकड़े कर दिए जाने का फैसला किया गया. लेकिन, जिनकी जड़ें इतिहास में हों, वो कहानियां जल्दी खत्म नहीं होतीं.

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विराट को नष्ट किए जाने के ऐन पहले गोवा सरकार ने दखल दिया और जहाज़ को नष्ट करने वाली फर्म के साथ संपर्क कर गोवा सरकार ने विराट को बेचने के लिए एक और कोशिश करने के बारे में बातचीत की. दूसरी तरफ, भारतीय रक्षा मंत्रालय यह कह चुका है कि विराट की बॉडी बुरी तरह से नष्ट हो चुकी है इसलिए किसी उपयोग की संभावना नहीं है.

हालांकि गुजरात की स्क्रैप फर्म ने गोवा सरकार की कोशिश की बात स्वीकारते हुए यह भी कहा कि मुंबई बेस्ड एक फर्म ने इस जहाज़ को म्यूज़ियम के तौर पर विकसित करने की कोशिश की बात कही है, जिसके साथ 100 करोड़ की डील को लेकर बातचीत चल रही है. अब यह डील होगी या नहीं, इस पर विराट का भविष्य तय होगा. कोई चमत्कार नहीं हुआ तो विराट का पुर्ज़ा पुर्ज़ा होना तय है.
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