तो क्‍या होगा अगर दुनियाभर के शरणार्थी शिविरों में फैल गया कोरोना वायरस

तो क्‍या होगा अगर दुनियाभर के शरणार्थी शिविरों में फैल गया कोरोना वायरस
बांग्‍लादेश के कॉक्‍स बाजार में रोहिंग्‍या शरणार्थी शिविर में कोरोना वायरस के दो मामले सामने के बाद दुनियाभर के कैंपों में संक्रमण फैलने पर पैदा होने वाले हालात को लेकर चर्चा तेज हो गई है.

बांग्‍लादेश (Bangladesh) के कॉक्‍स बाजार में मौजूद रोहिंग्‍या शरणार्थी कैंप में कोरोना वायरस (Coronavirus) के दो पॉजिटिव केस सामने आए हैं. इसके बाद दुनियाभर में बने शरणार्थी शिविरों में संक्रमण फैलने पर बनने वाले हालात को लेकर चिंता जताई जा रही है क्‍योंकि ज्‍यादातर शिविरों में स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाओं की भयंकर कमी है.

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बांग्‍लादेश में शरणार्थियों के तौर पर शिविर में रहे रहे म्‍यांमार के रोहिंग्या मुसलमानों (Rohingya) में कोरोना वायरस के मामले सामने आए हैं. ये दोनों कोरोना पॉजिटिव केस बांग्‍लादेश (Bangladesh) के उस कॉक्स बाजार शरणार्थी शिविर (Refugee Camp) से आए हैं, जिसमें 10 लाख रोहिंग्या मुसलमान रहते हैं. विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि कॉक्‍स बाजार के रोहिंग्या कैंपों में कोविड-19 (Coronavirus) तबाही मचा सकता है. बांग्‍लादेश में अब तक 20 हजार से ज्‍यादा कोरोना पॉजिटिव केस समाने आए हैं, जिनमें 298 की मौत हो चुकी है.

एक अनुमान के मुताबिक, पूरे बांग्लादेश में केवल 2,000 वेंटिलेटर हैं. वहीं, रोहिंग्या शरणार्थी शिविर में एक भी आईसीयू बेड उपलब्‍ध नहीं है. ऐसे में स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञों की नींद उड़ गई है. आशंका जताई जा रही है कि वायरस के शरणार्थी शिविर में घुसने के बाद अब बांग्‍लादेश में कोविड-19 से हजारों लोगों की मौत हो सकती है. ये हाल सिर्फ बांग्‍लादेश का ही नहीं है. अमेरिका समेत दुनियाभर के शरणार्थी शिविरों में लोगों के अमानवीय हालात में रहने की रिपोर्ट्स सामने आती रही हैं. अगर दुनियाभर के शरणार्थी शिविरों में कोरोना वायरस फैल गया तो हालात बहुत खराब हो जाएंगे.

दुनियाभर में है करीब 2.6 करोड़ शरणार्थी आबादी
बांग्लादेश के कैंप में रहने वालों के पास पर्याप्त मात्रा में साबुन और पानी नहीं है. यहां प्रति वर्ग किमी में 40,000 से 70,000 लोग रहते हैं. संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि लगातार बढ़ रही विस्‍थापित आबादी बीमारियों के फैलने का कारण बन रही है. बढ़ती भीड़ और सैनिटेशन की खराब हालत के कारण कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए तय किए गए सोशल डिस्टेंसिंग व समय-समय पर हाथ धोते रहने जैसी बातें बेअसर हो चुकी हैं. अगर संक्रमण दुनियाभर में बने शरणार्थी शिविरों तक पहुंच गया तो हालात बदतर हो सकते हैं. संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि दुनियाभर में करीब 66 लाख लोग शरणार्थी कैंपों में रह रहे हैं. ये दुनिया की करीब 2.6 करोड़ शरणार्थी आबादी का बड़ा हिस्सा हैं. करीब 20 लाख लोग खुद के बनाए शिविरों में रह रहे हैं, जो बहुत ही दयनीय स्थिति में हैं.
ज्‍यादातर सीरियाई नागरिकों ने लेबनान में शरण ली. उनके लिए बनाए गए कैंपों में भी स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाओं की भारी कमी रहती है.




शिविरों में बताए जा रहे कोरोना रोकथाम के उपाय
प्रवासियों के लिए आईओएम की तत्काल प्राथमिकताओं में ये सुनिश्चित करना भी शामिल है कि उन्हें अपने मेजबान देश में स्वास्थ्य देखभाल और अन्य बुनियादी सामाजिक कल्याण सहायता प्राप्त हों. इस समय संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी की सबसे बड़ी चिंता दुनिया भर में मौजूद उसके 1,100 से ज्‍यादा शिविरों में कोरोना वायरस के नए मामले आने से रोकना है. आईओएम प्रमुख ने बृहस्‍पतिवार को कहा था कि अब तक शरणार्थी शिविरों से संक्रमण का कोई मामला सामने नहीं आया है.

यूएन न्‍यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, दो पॉजिटिव केस सामने आने के बाद बांग्‍लादेश के शिविर में संयुक्‍त राष्‍ट्र की ओर से सहायता बढा दी गई है. शिविर में रहे रहे लोगों को रोकथाम के उपायों के बारे में जागरूक किया जा रहा है. विटोरिनो ने ग्रीस में स्थित शिविरों में प्रवासियों की स्थिति पर कहा कि वहां संक्रमण के करीब 200 मामलों की पहचान की गई थी. हालांकि, आईओएम उन द्वीपों पर काम नहीं करता है, जो तुर्की से पूर्वी भूमध्यसागरीय क्षेत्रों को पार करने वाले प्रवासियों और शरणार्थियों के घर हैं. उन्होंने सामाजिक दूरी बनाने के उपाय को नामुमकिन बताते हुए कहा कि यहां पानी और स्वच्छता की उपलब्धता काफी बड़ी चुनौती है.

ग्रीस के 3,000 क्षमता वाले कैंप में 18 हजार लोग
स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञों को चिंता है कि अगर युगांडा के बीडी बीडी में मौजूद शरणार्थी शिविरों में वायरस पूरी ताकत के साथ फैल गया तो हालात बहुत बुरे हो जाएंगे. इसके अलावा जॉर्डन के जाटरी और कीनिया के शरणार्थी शिविरों में रहने वाले लोगों को मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्‍ध नहीं हैं. ग्रीस के लेसबॉस द्वीप पर बनाए गए मोरिया कैंप में हजारों की तादाद में रहते हैं. इस कैंप को सिर्फ 3,000 लोगों के लिए बनाया गया था. अब वहां 18,000 लोग रह रहे हैं.

ग्रीस के लेसबॉस द्वीप पर मोरिया कैंप को 3,000 लोगों के लिए बनाया गया था. अब वहां 18,000 लोग रह रहे हैं.


दुनियाभर के शरणार्थी शिविरों में स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाओं की भारी कमी है. ज्‍यादातर शिविरों में लोगों को पानी के लिए भी लंबी लंबी लाइनों में लगना होता है. इसके अलावा साफ सफाई के इंतजाम भी नाकाफी होते हैं. डीडब्‍ल्‍यू की रिपोर्ट के मुताबिक, लेबनान की बेका घाटी से गुजरते हुए सैकड़ों सीरियाई शरणार्थियों के कैंप मिलते हैं. ये कैंप खेतों और झाड़ियों के बीच बने हुए हैं. यहां लोग प्लास्टिक की झोपड़ियों में रहते हैं.

केन्‍या में दो लाख शरणार्थी पर सिर्फ एक डॉक्‍टर
सीरियाई सीमा से 15 किमी की दूरी पर बार इलियास में मेदयान शरणार्थी शिविर है. ये कैंप अनधिकृत रूप से 2013 से चल रहा है. केन्या के शरणार्थी शिविर के क्‍लीनिक सामान्य दिनों में ही खराब हालत में होते हैं, जहां दो लाख लोगों के लिए सिर्फ एक डॉक्टर है. अफ्रीका, पश्चिम एशिया और एशिया के शरणार्थी शिविर कुपोषित लोगों से भरे हैं, जिनकी स्वास्थ्य सेवा और बुनियादी स्वच्छता तक पहुंच ना के बराबर है.

उत्तर-पूर्वी नाइजीरिया के बकास्सी कैंप के अधिकांश लोग बोकोहराम के चंगुल से भागकर शिविर तक पहुंचे हैं. भारत में कई शरणार्थी शिविरों में रहने वाले करीब 40,000 रोहिंग्या मुस्लिमों को डर है कि म्‍यांमार के बाद अब एक तबाही उन पर भारी पड़ सकती है. इस बीच दुनिया भर में शरणार्थियों की मदद के लिए अपनी टीमें तैनात करने वाले डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स के कार्यकारी निदेशक एवरिल बेनोइट कहते हैं कि हम सबसे बुरी स्थिति के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं.

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