दुनिया को आखिर कब तक मिल पाएगी कोरोना की दवा?

जानें कोरोना को लेकर क्या है देश का हाल
जानें कोरोना को लेकर क्या है देश का हाल

ऐसे समय में जबकि पूरी दुनिया में कोरोना वायरस कहर ढा रहा है, पूरी दुनिया एक साथ मिलकर इस संक्रामक महामारी के इलाज के तौर पर कोई टीका तलाशने की कोशिश में है. दुनिया भर में वैज्ञानिक कोरोना वायरस से निपटने के टीकों पर दिन रात अनुसंधान कर रहे हैं. आपको जानना चाहिए कि ऐसा कोई कारगर टीका और कितनी दूर है.

  • News18India
  • Last Updated: April 13, 2020, 6:12 PM IST
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कोविड 19 (Covid 19) संक्रमण के इलाज और उससे बचाव के लिए दुनिया भर के चिकित्सा वैज्ञानिक (Scientists) किसी ऐसे टीके की खोज में जुटे हैं, जो मानवता के लिए वरदान साबित हो सके. दुनिया भर में कोरोना वायरस (Corona Virus) से अब तक एक लाख से ज़्यादा मौतें हो चुकी हैं, तो सवाल यह है कि ऐसे किसी टीके के लिए और कितना इंतज़ार करना होगा? आइए जानें कि दुनिया भर में कितनी रिसर्च (Vaccine Research) चल रही हैं और किस मुकाम पर हैं.

सिर्फ 5-6 महीने दूर है टीका?
ब्रिटेन के विशेषज्ञ के दावे को माना जाए तो सितंबर तक कोरोना वायरस के खिलाफ वैक्सीन तैयार हो जाएगी. टाइम्स की रिपोर्ट में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में टीकाकरण की प्रोफेसर सारा गिलबर्ट के हवाले से लिखा गया है कि वैक्सीन सितंबर तक तैयार हो जाएगी और गिलबर्ट को 80 फीसदी विश्वास है कि टीका कारगर होगा. इससे पहले विशेषज्ञों ने संभावना जताई थी कि जुलाई 2021 तक ही वैक्सीन विकसित की जा सकेगी.

हालांकि गिलबर्ट ने कहा है कि लगातार नया डेटा सामने आ रहा है इसलिए काफी पहेलियां सुलझ रही हैं, जिनसे वैक्सीन विकसित करने में मदद मिल रही है. अगर गिलबर्ट का दावा सही साबित होता है तो महामारी की बुरी तरह चपेट में आया ब्रिटेन दुनिया के लिए अजूबा साबित हो सकता है.
कुल कितनी वैक्सीन पर हो रहा है काम?


डब्ल्यूएचओ के हवाले से मीडिया में जो खबरें आ रही हैं, उनके मुताबिक दुनिया भर में 70 कंपनियां और सस्थाएं वायरस के खिलाफ किसी कारगर वैक्सीन विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं और तीन दवाओं के तो ट्रायल मनुष्यों पर शुरू हो चुके हैं. वहीं, गार्जियन की रिपोर्ट मानी जाए तो 80 संस्थाएं टीके पर काम कर रही हैं और पांच टीकों के मानवीय ट्रायल शुरू हो चुके हैं.

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भारत की चार कंपनियां कोरोना वैक्सीन संबंधी रिसर्च कर रही हैं.


भारत की चार कंपनियां हैं दौड़ में
पिछले हफ़्ते की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की चार बायोटेक कंपनियां कोरोना वायरस के खिलाफ वैक्सीन विकसित करने की दिशा में जुड़ चुकी हैं. बिज़नेस टुडे की रिपोर्ट में बताया गया है कि हैदराबाद बेस्ड इंडियन इम्युनोलॉजिकल्स लिमिटेड ने ऑस्ट्रेलिया की ग्रिफिथ यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर रिसर्च करने का समझौता किया है. इससे पहले भारत की तीन और कंपनियां सिरम इंस्टिट्यूट, ज़ायडस कैडिल और भारत बायोटेक ने भी इस दिशा में रिसर्च शुरू कर दी थी.

ये हैं कुछ प्रमुख रिसर्च
मॉडर्ना : अमेरिका की फार्मा कंपनी मॉडर्ना पहली ऐसी कंपनी है जिसने अपनी वैक्सीन का मानवीय ट्रायल किया. इस वैक्सीन में आरएन नामक मैसेंजर रूपी आनुवांशिक पदार्थ है.

डिस्ट्रीब्यूटेड बायोे : इंडिया टाइम्स की रिपोर्ट की मानें तो कुछ हफ्ते पहले इस कंपनी के शोधकर्ता डॉ जैकब ने कहा था कि उनकी टीम 2002 में सार्स वायरस के खिलाफ रिसर्च के आधार पर पांच एंटीबॉडी सफलतापूर्वक हासिल कर जो दवा विकसित कर रही है, वह कोविड 19 मामलों में कारगर होगी.

बायोएनटेक व पीफाइज़र : ये दोनों कंपनियां साथ मिलकर रिसर्च कर रही हैं और ये भी आरएनए की मदद से टीका बनाने की दिशा में हैं लेकिन पारंपरिक विधि से नहीं. इस रिसर्च में देखा जा रहा है कि आरएनए कैसे वायरस की तरह शरीर में प्रोटीन के उत्पादन की पहल कर सकता है.

पिट्सबर्ग यूनिवर्सिटी : अमेरिका के इस शैक्षणिक संस्थान के शोधकर्ता ऐसी वैक्सीन विकसित कर चुके हैं, जिसने चूहों पर किए गए प्रयोग में सकारात्मक नतीजे दिए हैं. यह वैक्सीन वायरस को उदासीन करने के लिए काफी एंटीबॉडी दो हफ्ते में पैदा कर देती है.

जॉनसन एंड जॉनसन : रिपोर्ट की मानें तो अमेरिका के स्वास्थ्य विभाग एवं मानव सेवाओं की एक संस्था के साथ मिलकर फार्मा कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन भी कोविड 19 वैक्सीन विकसित करने की दिशा में रिसर्च कर रही है.

बिल गेट्स फंड : बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन और कई दूसरी गैर लाभकारी संस्थाओं के सहयोग से आईएनओ 4800 वैक्सीन विकसित की जा रही है, जो मरीज़ के शरीर में खुद की एंटीबॉडी क्रिएट करने में मदद कर संक्रमण से लड़ती है.

रूस की रिसर्च : रूस के वेक्टर स्टेट वायरोलॉजी एवं बायोटेक्नोलॉजी केंद्र में एक वैक्सीन पर काम ज़ोरों पर है. खुलासा किया गया है कि इस वैक्सीन के क्लीनिकल ट्रायल 29 जून से शुरू होंगे जिसमें 180 वॉलेंटियर हिस्सा लेंगे.

कुल मिलाकर, अधिकतर रिसर्च अभी यह नहीं कह रही हैं कि कब तक वैक्सीन विकसित कर ली जाएगी, लेकिन ब्रिटेन और रूस ने अपनी वैक्सीन को लेकर एक समयसीमा बताई है. और इन दावों की मानें तो कोरोना के खिलाफ कोई कारगर वैक्सीन कुछ ही महीनों में उपलब्ध हो सकती है. हालांकि इन वैक्सीन के ट्रायल के बाद इन्हें वैश्विक स्तर पर मंज़ूरी मिलने में भी समय लगेगा, ऐसे में फ़िलहाल इंतज़ार करते हुए खुद को सुरक्षित रखना ही बेहतर विकल्प है.

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