जानें जर्मनी समेत ये देश कोरोना वायरस से निपटने में भारत की कर रहे हैं मदद

जानें जर्मनी समेत ये देश कोरोना वायरस से निपटने में भारत की कर रहे हैं मदद
(प्रतीकात्मक फोटो)

कोरोना वायरस (Coronavirus) के मामलों में हो रही वृद्धि को देखते हुए पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने 130 भारतीय दूतावासों के प्रमुखों से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये बात कर महामारी से निपटने के लिए मेडिकल उपकरणों और बेहतर तरीकों पर नजर रखने को कहा. चीन (China) समेत कई देश संक्रमण से निपटने में भारत की मदद कर रहे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 11, 2020, 11:00 PM IST
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दुनियाभर में कोरोना वायरस के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं. ऐसे में कई देशों ने भारत से हाइड्रॉक्‍सीक्‍लोरोक्‍वीन और पैरासिटामॉल जैसी दवाइयों की आपूर्ति के लिए मदद मांगी है. भारत (India) ने भी पूरी दुनिया को भरोसा दिलाया है कि कोरोना वायरस (Coronavirus) के खिलाफ मुकाबले में हम सभी देशों की हरसंभव मदद करेंगे. इस बीच कई देशों ने भी संक्रमण से निपटने के लिए भारत की तरफ मदद का हाथ बढ़ाया है. चीन (China), जर्मनी (Germany) और दक्षिण कोरिया (S. Korea) भारत को मेडिकल उपकरण उपलब्‍ध करा रहे हैं तो विश्‍व बैंक ने भारत को भारी-भरकम आर्थिक मदद का ऐलान कर दिया है.

वर्ल्‍ड बैंक ने की 1 अरब डॉलर की मदद की घोषणा
विश्‍व बैंक ने भारत के लिए 1 अरब डॉलर के आपातकालीन वित्तपोषण को मंजूरी दी है. विश्‍व बैंक (World Bank) की ओर से कहा गया है कि हमारी सहायता परियोजनाओं का पहला सेट 1.9 अरब डॉलर का है. इससे दुनिया के 25 देशों की मदद की जाएगी. इस आपातकालीन वित्तीय सहायता का सबसे बड़ा हिस्सा भारत को दिया गया है. इससे भारत में बेहतर स्क्रीनिंग, कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग और प्रयोगशाला डायग्नोस्टिक्स में मदद मिलेगी. साथ ही इस राशि से भारत व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों की खरीद भी करेगा.

विश्‍व बैंक ने पाकिस्तान के लिए 20 करोड़ डॉलर और अफगानिस्तान के लिए 10 करोड़ डॉलर के सहायता पैकेज को मंजूरी दी है. अमेरिका (US) के विदेश मंत्रालय ने भी कहा था कि वह भारत को 29 लाख डॉलर की राशि दे रहा है, जिसका इस्तेमाल कोरोना के लिए टेस्ट लैब, नए मामलों का पता लगाने, कोरोना मरीजों की निगरानी और टेक्निकल एक्सपर्ट की सेवा लेने में किया जा सकेगा.
चीन कोरोना वायरस का इलाज कर रहे डॉक्‍टरों को पीपीई किट्स भारत को उपलब्‍ध करा रहा है.
चीन कोरोना वायरस का इलाज कर रहे डॉक्‍टरों को पीपीई किट्स भारत को उपलब्‍ध करा रहा है.




चीन भारत को उपलब्‍ध करा रहा है पीपीई किट्स
कोरोना वायरस की शुरुआत चीन के वुहान शहर से हुई थी. ऐसे में इस वायरस को लेकर चीन (China) की समझ और तैयारी सबसे ज्‍यादा है. चीन ने भी भारत को मदद की पेशकश की है. चीन ने कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में भारत को पीपीई किट देकर मदद की है. संक्रमण के इलाज में चिकित्साकर्मियों के इस्तेमाल में आने वाले निजी सुरक्षा उपकरणों (PPE) की 1.7 लाख किट चीन से भारत को मिल चुकी हैं. चीन से मदद मिलने के बाद भारत में पीपीई की मौजूदा उपलब्धता 3,87,473 हो गई है.

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, राज्यों को केंद्र सरकार की ओर से अब तक 2.94 लाख पीपीई की आपूर्ति कर दी गई है. इसके अलावा देश में ही बने दो लाख एन-95 मास्क भी अस्पतालों को मुहैया कराए गए हैं. इसके अलावा अन्य स्रोतों से मिले ऐसे ही 20 लाख मास्क पहले ही अस्पतालों को पहुंचाए जा चुके हैं. पर्सनल प्रोटेक्शन इक्विपमेंट्स किट में मास्क, ग्लोव्स, गाउन, एप्रन, फेस प्रोटेक्टर, फेस शील्ड, स्पेशल हेलमेट, रेस्पिरेटर्स, आई प्रोटेक्टर, गोगल्स, हेड कवर, शू कवर, रबर बूट्स शामिल होते हैं.

दक्षिण कोरिया ने दीं 5 लाख रेपिड टेस्‍ट किट्स
केंद्र सरकार कोरोना वायरस से निपटने के लिए कुछ देशों से अत्याधुनिक तकनीकों की खरीद भी कर रहा है. इस क्रम में आईसीएमआर ने दक्षिण कोरिया (South Korea) समेत कुछ देशों से रेपिड टेस्‍ट किट की खरीद की है. आईसीएमआर ने बताया कि जरूरत को ध्‍यान में रखते हुए 5,00,000 रेपिट टेस्‍ट किट्स खरीद ली गई हैं. अभी देश में संक्रमितों के संपर्क में आए लोगों को बड़ी संख्या में क्वारंटाइन किया जा रहा है. ऐसे में कोरोना संक्रमित की जल्‍द पहचान करने के लिए एंटीबॉडी टेस्टिंग का सहारा लिया जाएगा. इसके नतीजे कुछ ही घंटों में मिल जाते हैं. दरअसल, पारंपरिक आरटी-पीसीआर टेस्ट से पहले एंटीबॉटी टेस्ट किया जाए तो ये स्क्रीनिंग की तरह काम करेगा. पीसीआर टेस्ट किट की कमी है. साथ ही ये टेस्‍ट महंगा और जटिल होता है. इसके नतीजे मिलने में भी ज्‍यादा समय लगता है.

कोरोना वायरस की जल्‍द जांच के लिए जर्मनी से 10 लाख रेपिड टेस्‍ट किट्स खरीदी जा रही हैं.
कोरोना वायरस की जल्‍द जांच के लिए जर्मनी से 10 लाख रेपिड टेस्‍ट किट्स खरीदी जा रही हैं.


रेपिड टेस्‍ट का स्‍क्रीनिंग के लिए होगा इस्‍तेमाल
दक्षिण कोरिया ने लोगों को उनकी ट्रेवल हिस्ट्री और संपर्क में आने के आधार पर एंटीबॉडी टेस्ट शुरू किया. इस टेस्ट से पता चल जाता है कि व्यक्ति वायरस के संपर्क में आया है या नहीं. इस टेस्ट में पॉजिटिव पाए जाने पर व्यक्ति का पीसीआर किट की मदद से आरएनए टेस्ट किया जा सकता है. ये प्रक्रिया दो चरणों में होगी. एंटीबॉडी टेस्ट आसान होता हैः हालांकि, ये टेस्ट कोरोना संक्रमित होने की पुष्टि नहीं करता है. इस बात की आशंका बनी रहती है कि संक्रमण के शुरुआती चरण में होने पर एंटीबॉडी टेस्ट नेगेटिव आए. ऐसे में टेस्ट नेगेटिव आने का मतलब ये नहीं है कि व्यक्ति कोरोना संक्रमित नहीं है. वहीं, बृहन्‍मुबई म्‍युनिसिपल कॉरपोरेशन अलग से 1,00,000 किट दक्षिण कोरिया से मंगा रही है.

जर्मनी उपलब्‍ध कराएगा 10 लाख टेस्‍ट किट्स 
केंद्र सरकार संक्रमण से मुकाबले की बड़े पैमाने पर तैयारी शुरू कर दी है. सरकार बहुत जल्द ही देश के सभी मेडिकल कॉलेजों और सरकारी लैब में कोरोना वायरस की टेस्टिंग सुविधा शुरू करने की योजना पर काम कर रही है. हाल में आईसीएमआर ने कहा था कि कुछ हफ्तों के भीतर देश में हर दिन 1,00,000 लोगों का कोरोना टेस्‍ट किया जाएगा.

इसके लिए केंद्र सरकार ने जर्मनी (Germany) से 10 लाख जांच किट मंगाने का ऑर्डर दे दिया है. बता दें कि कोरोना वायरस की जांच के लिए 'प्रोब' नाम की जिस किट का इस्तेमाल किया जा रहा है, वह जर्मनी से ही आती है. ICMR निजी कंपनियों की तैयार की जा रही देसी किट का विकल्प भी लेकर चल रहा है. वहीं, जर्मनी ने अपनी सभी ऑटोमोबाइल कंपनियों को सारे काम छोड़कर वेंटिलेटर बनाने का आदेश दे दिया है.

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