कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में हथियार बना ये इस्‍लामी कानून

इस्‍लामी कानून में बताए गए फर्ज में एक ज़कात के जरिये लोग गरीबों की मददद कर रहे हैं.
इस्‍लामी कानून में बताए गए फर्ज में एक ज़कात के जरिये लोग गरीबों की मददद कर रहे हैं.

कोरोना वायरस (Coronavirus) से पूरी दुनिया पर चौतरफा मार पड़ रही है. बीमारी फैलने के साथ ही अर्थव्‍यवस्‍था चरमरा गई है. गरीब और दिहाड़ी मजदूरों के सामने रोटी का संकट खड़ा हो गया है. इस बीच पाकिस्‍तान (Pakistan) में इस्‍लामी कानून ज़कात लोगों का मददगार साबित हो रहा है.

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कोरोना वायरस (Coronavirus) ने दुनिया के सबसे ताकतवर माने जाने वाले देशों को भी घुटनों पर ला दिया है. वहीं, बहुत से देश ऐसे भी हैं, जहां लोगों के सामने रोटी का संकट खड़ा हो गया. इस समय इन देशों में रोज कमाकर खाने वाले दिहाड़ी मजदूरों और गरीबी की पहले ही मार झेल रहे परिवारों को दो वक्‍त की रोटी भी नसीब नहीं हो रही है. पाकिस्‍तान (Pakistan) में भी कोरोना वायरस फैलने के साथ हालात इतने बिगड़ते चले गए कि प्रधानमंत्री इमरान खान (PM Imran Khan) को दुनिया के सामने मदद की गुहार लगानी पड़ी. उन्‍होंने कहा कि अगर इस समय पाकिस्‍तान की मदद नहीं की गई तो बहुत बड़ी तादाद में लोग भुखमरी से ही मर जाएंगे. अब पाकिस्‍तान में गरीबों और दिहाड़ी मजदूरों को भूख से बचाने की जंग में एक इस्‍लामी कानून ज़कात मददगार साबित हो रहा है.

दुकानों के बाहर बैठे लोगों को बांट रहे जरूरत का सामान
पाकिस्तान के बड़े शहरों में आजकल किराने की दुकानों पर अलग ही नजारा देखने को मिलता है. लोग रोजमर्रा की जरूरत का सामान खरीदने के बाद घरों को लौटने के बजाय आसपास बैठे बेघर लोगों की मदद करते हैं. ये लोग अपना खरीदा हुआ सामान गरीबों में बांट देते हैं. कुछ लोग इन गरीबों की रुपये-पैसे से भी मदद कर रहे हैं. ज़कात करने वाले लोग गरीबों से कहते हैं कि इस अज़ाब के जल्‍द खत्‍म होने की दुआ करो. बता दें कि पाकिस्‍तान में भी वैश्विक महामारी को फैलने से रोकने के लिए इमरान सरकार ने कई तरह की पाबंदियां लगा दी हैं. यहां स्कूल-कॉलेज बंद कर दिए गए हैं. सार्वजनिक कार्यक्रमों में लोगों के इकट्ठा होने पर पाबंदी लगा दी गई है. इस समय वहां किराना और दवा की दुकानों के अलावा सभी कारोबारी गतिविधियां बंद कर दी गई हैं.

ज़कात के तहत हर मुस्लिम को अपनी सालाना जरूरत से ज्‍यादा कमाई का ढाई फीसदी खैरात में देना होता है.

मुस्लिम संस्‍कृति का एक धाार्मिक फर्ज होता है ज़कात


पाकिस्तान सरकार ने जब से लॉकडाउन के लिए सख्‍त नियम लागू करने शुरू किए हैं, तब से रोज कमाने-खाने वाले लोगों की कोई कमाई नहीं हुई. इनमें जूते पॉलिश करने वालों से लेकर, रिक्‍शा चलाने वाले, सब्‍जी का ठेला लगानो वाले, खाने-पीने का सामान बेचने वाले लोग शामिल हैं. बाहर निकलने की पाबंदी के कारण ये परिवार भूखे रहने को मजबूर हैं. ऐसे मामले सामने आने के बाद बहुत से लोग ज़कात के जरिये गरीबों की मदद कर रहे हैं. बता दें कि ज़कात मुस्लिम संस्कृति का एक धार्मिक कर है, जिसे पाकिस्तान में दिहाड़ी मजदूरों और छोटे-मोटे काम करके परिवार पालने वालों को दिया जा रहा है. ज़कात अरबी का शब्द है, जिसका मतलब शुद्ध करने वाला होता है. इस्लाम के मानने वालों पर जो पांच फर्ज हैं, उनमें ये सबसे अहम माना जाता है.

कमाई का ढाई फीसदी हिस्‍सा खैरात में बांटना जरूरी
ज़कात के तहत हर मुस्लिम को अपनी सालाना जरूरत से ज्‍यादा कमाई का ढाई फीसदी खैरात में देना होता है. इस फर्ज की पाबंदियां तय करने के नियम बहुत सख्‍त हैं. साथ ही यह भी तय है कि ज़कात किसे दी जाए और उसका असली हकदार कौन है. ज़कात की अवधारणा इस्लाम की उस सोच से उपजती है, जिसमें ये माना जाता है कि दुनिया की कोई भी चीज स्‍थायी नहीं है. ये इसे बनाने वाले यानी अल्लाह की नेमत है. इस्लाम में माना जाता है कि बदकिस्‍मत लोगों का भी इन चीजों पर हक है. इसके लिए उन लोगों को आगे आना होगा, जिन्‍हें बनाने वाले ने ये नेमते दी हैं. आसान शब्‍दों में समझें तो अमीरों को गरीबों की मदद करनी है. इस्‍लाम को मानने वाले ये भी मानते हैं कि ज़कात आत्मा की गंदगी को भी दूर करती है. माना जाता है कि ज़कात दौलत की खराबी को खत्‍म कर देती है. इस्‍लाम में कहा गया है कि अगर आपका पड़ोसी भूखे पेट सो रहा है तो उसको खाना खिलाना आपकी जिम्मेदारी है. अगर पड़ोसी को किसी की जरूरत है और वो आपके घर में रखी है तो पहले उसे दें.

पाकिस्तान की कुल जीडीपी का एक फीसदी से ज्‍यादा हिस्सा दान से ही आता है.


ज़कात के मामले में भारतीय पाकिस्‍तान के लोगों से पीछे
दुनिया के 47 मुस्लिम बहुल देशों में ज़कात स्वैच्छिक है, लेकिन पाकिस्तान दुनिया के उन छह देशों में एक है, जहां ये कानूनन जरूरी है. स्टैनफोर्ड सोशल इनोवेशन रिव्यू की एक रिपोर्ट कहती है कि पाकिस्तान की कुल जीडीपी का एक फीसदी से ज्‍यादा हिस्सा दान से ही आता है. वहीं, भारत की कुल जीडीपी में दान से आमदनी का हिस्सा इसका आधा है. बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में 98 फीसदी नागरिक या तो खैरात देते हैं या मुफ्त में किसी के लिए काम करते हैं. इस समय पाकिस्तान में लोग ढाई फीसदी फर्ज से बहुत ज्‍यादा ज़कात दे रहे हैं. इस समय पाकिस्तान में सोशल मीडिया के जरिये दान देने और गरीबों की मदद की अपील की जा रही है. इसमें महिलाएं बेहद अहम भूमिका निभा रही हैं. वो अपने घरों में खैरात का सामान आटा, तेल और दाल इकट्ठा करती हैं. फिर मदद करने वालों तक पहुंचाती हैं. बहुत से स्वयंसेवी संगठन भी रेस्टोरेंट में बचा हुआ खाना गरीबों में बांटने और राशन को बस्तियों तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं.

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