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Nirbhaya Gangrape-Murder Case: जानें भारत में किस अपराध के लिए किस धारा में दी जाती है फांसी

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Updated: March 20, 2020, 11:28 AM IST
Nirbhaya Gangrape-Murder Case: जानें भारत में किस अपराध के लिए किस धारा में दी जाती है फांसी
दिल्ली के गैंगरेप व हत्या मामले में निर्भया के चारों दोषियों को तिहाड़ जेल में आज सुबह 5.30 बजे एक साथ दी गई फांसी.

निर्भया गैंगरेप और मर्डर मामले (Nirbahya Gangrape Case) के चारों दोषियों मुकेश सिंह (32), पवन गुप्ता (25), विनय शर्मा (26) और अक्षय कुमार सिंह (31) को तिहाड़ जेल के डीजी संदीप गोयल की देखरेख में शुक्रवार सुबह 5.30 बजे फांसी दे दी गई. इन सभी को दिल्ली की तिहाड़ जेल (Tihar Jail) में पवन जल्लाद ने फांसी दी. चारों दोषियों के मौत की आधिकारिक पुष्टि तिहाड़ जेल में मौजूद डॉक्टरों ने की. आइए जानते हैं, भारत में जघन्य अपराधाों के लिए मौत की सजा (Capital Punishment) की क्या है व्यवस्था...

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  • Last Updated: March 20, 2020, 11:28 AM IST
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नई दिल्ली. निर्भया गैंगरेप और मर्डर मामले (Nirbahya Gangrape Case) के चारों दोषियों मुकेश सिंह (32), पवन गुप्ता (25), विनय शर्मा (26) और अक्षय कुमार सिंह (31) को तिहाड़ जेल के डीजी संदीप गोयल की देखरेख में शुक्रवार सुबह 5.30 बजे फांसी दे दी गई. इन सभी को दिल्ली की तिहाड़ जेल (Tihar Jail) में पवन जल्लाद ने फांसी दी. चारों दोषियों के मौत की आधिकारिक पुष्टि तिहाड़ जेल में मौजूद डॉक्टरों ने की. भारत में जघन्य अपराधाों के लिए मौत की सजा (Capital Punishment) की व्यवस्था प्राचीन काल से है. यहां तक कि धार्मिक ग्रंथों और पौराणिक कथाओं में भी अपराधियों को मौत की सजा दिए जाने की कई कहानियां मौजूद हैं. कौटिल्य के अर्थशाास्त्र में उन अपराधों का जिक्र है, जिनके लिए मौत की सजा तय की गई थी. ब्रिटिश शासन के दौरान बनाई गई भारतीय दंड संहिता यानी आईपीसी और दंड प्रक्रिया संहिता यानी सीआरपीसी में कुछ अपराधों के लिए मौत की सजा का प्रावधान है. आजादी के बाद वही व्यवस्था भारत में लागू कर दी गई. हालांकि, कुछ प्रावधानों में संशोधन किया जा चुका है. फिर भी कइर् अपराधों के लिए फांसी की सजा का प्रावधान है. आइए जानते हैं कि भारत में किसी व्यक्ति को किस अपराध के लिए किस धारा के तहत सजा—ए—मौत दी जा सकती है.

बार—बार रेप और 12 साल से कम उम्र की बच्ची से रेप में मौत की सजा
दिसंबर, 2012 के दिल्ली के निर्भया गैंगरेप व हत्या मामले के बाद संविधान संशोधन के जरिए आईपीसी की धारा—376 (ई) के तहत बार-बार बलात्कार के दोषियों को उम्रक़ैद या मौत की सज़ा का प्रावधान किया गया था. बॉम्बे हाईकोर्ट ने बार-बार बलात्कार के दोषी को उम्रकैद या मौत की सजा देने के लिए आईपीसी की धारा में किए गए इस संशोधन की संवैधानिकता को बरकरार रखा. रेप भारतीय कानून के तहत गंभीर श्रेणी में आता है. इस अपराध के लिए भारतीय दंड संहिता में धारा 376 व 375 के तहत सजा का प्रावधान है. इसमें अदालत मौत की सजा भी सुना चुकी है. वहीं, केंद्र सरकार ने 12 साल से कम उम्र की बच्चियों से बलात्कार के मामलों में दोषी ठहराए गए व्यक्तियों को मृत्युदंड सहित सख्त सजा देने का अध्यादेश जारी किया था, जिसे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मंजूरी दे दी थी.

सरकार ने एक अध्यादेश जारी कर 12 साल से कम उम्र की बच्चियों से रेप के मामले में मौत की सजा का प्रावधान कर दिया है.




सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने पर दी जा सकती है मौत की सजा


सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने या युद्ध की कोशिश करने वाले व्यक्ति को आईपीसी की धाारा—121 के तहत मौत की सजा का प्रावधान किया गया है. इस अपराध में अगर फांसी की सजा नहीं दी जाती है तो आजीवन कैद और जुर्माना भी लगाया जा सकता है. वहीं, अगर सेना, वायुसेना या नौसेना का कोई अधिकारी या सैनिक सरकार के खिलाफ अपने साथियों या आम लेागों को सरकार के खिलाफ विद्रोह के लिए उकसाता है और विद्रोह भड़क जाता है तो दोषी को धारा—132 के तहत मौत की सजा का प्रावधान है. इस अपराध में भी आजीवन कारावास या 10 साल तक की कठोर कारावास और जुर्माने की सजा भी दी सकती है.

झूठे सबूत देकर फांसी की सजा दिलवाने वाले को मौत की सजा
अगर कोई व्यक्ति किसी आरोपी के खिलाफ दोष को साबित कराने के लिए झूठे सबूत देता है या गढ़ता है और उउनके आधार पर निर्दोष व्यक्ति को दोषी मानते हुए मौत की सजा दे दी जाती है तो झूठे सबूूत देने वाले व्यक्ति का अपराध साबित होने पर धारा—194 के तहत मृत्युदंड का प्रावधान किया गया है. वहीं, किसी व्यक्ति की हत्या करने वाले व्यक्ति को आईपीसी की धाारा—302 के तहत मौत की सजा का प्रावधान है. इस अपराध में उम्रकैद और जुर्माना की सजा भी दी जा सकती है. इसके अलावा आजीवन कारावास की सजा पाया व्यक्ति किसी की हत्या कर देता है तो धारा—303 के तहत अपराधी को मौत की सजा दी जाएगी.

बच्चों को आत्महत्या के लिए उकसाने पर फांसी की सजा का प्रावधान
अगर कोई व्यक्ति बच्चों या 18 वर्ष से कम उम्र के किशोर व युवाओं को आत्महत्या के लिए उकसाता है और उसकी ऐसी कोशिश में मौत हो जाती है तो दोषी को आईपीसी की धारा—305 के तहत सजा—ए—मौत की व्यवस्था की गई है. इसी धारा के तहत पागल या मंदबुद्धि व्यक्ति को भी आत्महत्या के लिए उकसाने के बाद किए गए प्रयास में मौत हो जाने पर मृत्युदंड का प्रावधान है. इस धारा के तहत मौत की सजा नहीं दिए जाने पर 10 वर्ष से लेकर उम्रकैद तक का प्रावधान है. वहीं, कोर्ट सजा के साथ जुर्माना भी लगा सकता है.

भारतीय रेल अधिनियम की धारा—124 के तहत भी मौत की सजा का प्रावधान किया गया है.


एक डकैत के हत्या करने पर डकैती में शामिल सभी को फांसी
आईपीसी की धारा—396 के तहत अगर 5 या उसस अधिक लोग किसी डकैती में शामिल हों और उनमें कोई एक किसी की हत्या कर दे तो सभी डकैतों को मौत की सजा का प्रावधान किया गया है. इस अपराध में अगरर अदालत फांसी की सजा नहीं देती है तो हर दोषी को आजीवन कारावास या 10 साल का कठोर कारावास की सजा भी दे सकती है. वहीं, कोर्ट सभी दोषियों पर जुर्माना भी लगा सकता है. वहीं, अगर कोई व्यक्ति हत्या के प्रयास का दोषी ठहराए जाने के बाद सजा के दौरान फिर किसी की हत्या की कोशिश करता है तो धारा—307 के तहत उसे फांसी सजा दी जा सकती है.

भारतीय रेल अधिनियम में किया गया है मौत की सजा का प्रावधान
आईपीसी के अलावा भारतीय रेल अधिनियम की धारा—124 के तहत भी मौत की सजा का प्रावधान किया गया है. अगर कोई व्यक्ति यह जानते हुए भी ट्रेन को नुकसान पहुंचाता है कि इससे यात्रियों की जान जा सकती है तो इस धारा के तहत उसे मौत की सजा दी जा सकती है. आपातकाल में प्रभावी होने वाले डिफेंस आफ इंडिया एक्ट की धारा—18—2 के तहत विशेष न्यायालय को फांसी की सजा देने का अधिकार होता है. वहीं, नशीली दवा अधिनियम में भी मौत की सजा का प्रवाधान किया गया है. इन सभी धाराओं में तब तक फांसी नहीं दी जा सकती जब तक कि आईपीसी की धारा—433 के तहत हाईकोर्ट इसकी मंजूरी नहीं दे देता है. इसके बाद भी दोषी के पास अपने बचाव के कई रास्ते होते हैं. निर्भया के दोषी उन तमाम रास्तों को अपनाकर अपनी फांसी को टलवाते रहे थे, लेकिन आज सुबह 5.30 बजे उन्हें फांसी दे दी गई.

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First published: March 20, 2020, 9:22 AM IST
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