NRC की लिस्ट जारी होने से पहले जानें आप कैसे बनते हैं भारतीय नागरिक

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Updated: August 30, 2019, 11:59 AM IST
NRC की लिस्ट जारी होने से पहले जानें आप कैसे बनते हैं भारतीय नागरिक
संविधान में भारतीय नागरिकता को लेकर स्पष्ट दिशा निर्देश हैं

असम (Assam) में एनआरसी (NRC) का फाइनल ड्राफ्ट कुछ घंटों बाद जारी होगा. लेकिन एनआरसी को पूरे देश में भी लागू होना है. जानिए भारतीय नागरिक होने की क्या शर्तें हैं...

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असम (Assam) में इन दिनों एनआरसी (NRC) का मुद्दा छाया हुआ है. कुछ ही घंटों बाद 31 अगस्त को भारत सरकार नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस (National Register of Citizens) जारी करेगी. ये असम के नागरिकों की पहचान करने वाला फाइनल ड्राफ्ट होगा. इससे तय होगा कि कौन भारत का नागरिक है और कौन नहीं. इस समय ये बड़ा सवाल पूरे देश में कौंध रहा है कि अगर कल को उन्हें अपनी नागरिकता का सबूत देना पड़े तो कैसे देंगे. हम आपको बताते हैं कि आपके पास कौन से डाक्यूमेंट्स होने चाहिए

पूरे देश में नागरिकता को लेकर नए तरीके से बहस चल रही है. असम के नागरिकों की पहचान करने वाले एनआरसी की तरह पूरे देश में इसे लागू करने की बात चल रही है. गृहमंत्री अमित शाह लोकसभा के चुनाव प्रचार में भी ये कह चुके हैं कि पूरे देश में एनआरसी लागू होगा और देश में गैरकानूनी तरीके से रह रहे बाहरी लोगों को निकाला जाएगा.

सवाल है कि किसके जरिये ये तय होता है कि कौन भारतीय नागरिक है और कौन नहीं? आप किस आधार पर भारतीय नागरिक हो सकते हैं? संविधान में विभिन्न अनुच्छेदों के जरिए नागरिकता को पारिभाषित किया गया है. इन अनुच्छेदों में वक्त-वक्त पर संशोधन भी हुए हैं. संविधान का अनुच्छेद 5 से लेकर 11 तक नागरिकता को पारिभाषित करता है. इसमें अनुच्छेद 5 से लेकर 10 तक नागरिकता की पात्रता के बारे में बताता है, वहीं अनुच्छेद 11 में नागरिकता के मसले पर संसद को कानून बनाने का अधिकार देता है.

नागरिकता और इससे जुड़ा कानून केंद्र की सूची में आता है. इस पर कानून बनाने का अधिकार सिर्फ केंद्र सरकार को है. नागरिकता को लेकर 1955 में सिटीजनशिप एक्ट पास हुआ. एक्ट में अब तक चार बार 1986, 2003, 2005 और 2015 में संशोधन हो चुके हैं. एक्ट के जरिए केंद्र सरकार के पास ये अधिकार है कि वो किसे भारत का नागरिक माने और किसे नहीं.

कौन भारतीय नागरिक है और कौन नहीं?
संविधान में भारतीय नागरिक को स्पष्ट तौर पर पारिभाषित किया गया है. संविधान का अनुच्छेद 5 कहता है कि अगर कोई व्यक्ति भारत में जन्म लेता है और उसके मां-बाप दोनों या दोनों में से कोई एक भारत में जन्मा हो तो वो भारत का नागरिक होगा. भारत में संविधान लागू होने के 5 साल पहले यानी 1945 के पहले से रह रहा हर व्यक्ति भारत का नागरिक माना जाएगा.

अगर कोई भारत में नहीं भी जन्मा हो, लेकिन वो यहां रह रहा हो और उसके मां-बाप में से कोई एक भारत में पैदा हुए हों तो वो भारत का नागरिक माना जाएगा. अगर कोई व्यक्ति यहां 5 साल तक रह चुका हो तो वो भारत की नागरिकता के लिए अप्लाई कर सकता है.
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असम में 31 अगस्त को एनआरसी का फाइनल ड्राफ्ट जारी होगा


संविधान का अनुच्छेद 6
संविधान का अनुच्छेद 6 पाकिस्तान से भारत आए लोगों की नागरिकता को पारिभाषित करता है. इसके मुताबिक 19 जुलाई 1949 से पहले पाकिस्तान से भारत आए लोग भारत के नागरिक माने जाएंगे. इस तारीख के बाद पाकिस्तान से भारत आए लोगों को नागरिकता हासिल करने के लिए रजिस्ट्रेशन करवाना होगा. दोनों परिस्थितियों में व्यक्ति के मां-बाप या दादा-दादी का भारतीय नागरिक होना जरूरी है.

संविधान का अनुच्छेद 7
संविधान का अनुच्छेद 7 पाकिस्तान जाकर वापस लौटने वाले लोगों के लिए है. इसके मुताबिक 1 मार्च 1947 के बाद अगर कोई व्यक्ति पाकिस्तान चला गया, लेकिन लेकिन रिसेटेलमेंट परमिट के साथ तुरंत वापस लौट गया हो वो भी भारत की नागरिकता हासिल करने का पात्र है. ऐसे लोगों को 6 महीने तक यहां रहकर नागरिकता के लिए रजिस्ट्रेशन करवाना होगा. ऐसे लोगों पर 19 जुलाई 1949 के बाद आए लोगों के लिए बने नियम लागू होंगे.

संविधान का अनुच्छेद 8

संविधान का अनुच्छेद 8 विदेशों में रह रहे भारतीयों की नागरिकता को लेकर है. इसके मुताबिक विदेश में पैदा हुए बच्चे को भी भारतीय नागरिक माना जाएगा अगर उसके मां-बाप या दादा-दादी में से से कोई एक भारतीय नागरिक हो. ऐसे बच्चे को नागरिकता हासिल करने के लिए भारतीय दूतावास से संपर्क कर पंजीकरण करवाना होगा.

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एनआरसी को लेकर केंद्र सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं


संविधान का अनुच्छेद 9
संविधान का अनुच्छेद 9 भारत की एकल नागरिकता को लेकर है. इसके मुताबिक अगर कोई भारतीय नागरिक किसी और देश की नागरिकता ले लेता है तो उसकी भारतीय नागरिकता अपने आप खत्म हो जाएगी.

संविधान का अनुच्छेद 10
संविधान का अनुच्छेद 10 नागरिकता को लेकर संसद को अधिकार देता है. इसके मुताबिक अनुच्छेद 5 से लेकर 9 तक के नियमों का पालन करने वाले भारतीय नागरिक होंगे. इसके अलावा केंद्र सरकार के पास नागरिकता को लेकर नियम बनाने का अधिकार होगा. सरकार नागरिकता को लेकर जो नियम बनाएगी उसके आधार पर किसी को नागरिकता दी जा सकेगी.

संविधान का अनुच्छेद 11

संविधान का अनुच्छेद 11 संसद को नागरिकता पर कानून बनाने का अधिकार देता है. इस अनुच्छेद के मुताबिक किसी को नागरिकता देना या उसकी नागरिकता खत्म करने संबंधी कानून बनाने का अधिकार भारत की संसद के पास है.

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First published: August 30, 2019, 9:23 AM IST
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