जानें कौन हैं एलिसा ग्रैनेटो और एडवर्ड ओ'नील, जिन पर ब्रिटेन में किया गया कोरोना वैक्‍सीन ट्रायल

जानें कौन हैं एलिसा ग्रैनेटो और एडवर्ड ओ'नील, जिन पर ब्रिटेन में किया गया कोरोना वैक्‍सीन ट्रायल
ब्रिटेन में कोरोना वैक्‍सीन के ह्यूमन ट्रायल में शामिल की गईं एलिसा और एडवर्ड पर लगातार नजर रखी जा रही है.

ब्रिटेन (Britain) में वैज्ञानिकों की टीम ने 3 महीने में कोरोना वायरस की संभावित वैक्‍सीन (Corona Vaccine) तैयार ली है. अब गुरुवार को कोविड-19 वैक्‍सीन और मेनेंजाइटिस से प्रतिरक्षा देने वाली वैक्‍सीन का ट्रायल शुरू कर दिया गया है. आइए जानते हैं कि कौन हैं ह्यूमन ट्रायल (Human Trial) में शामिल होने वाले पहले दो लोग...

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 26, 2020, 3:42 PM IST
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यूरोपीय देश कोरोना वायरस (Coronavirus) की चपेट में बुरी तरह फंसे हैं. यूरोप (Europe) में कोरोना से लड़ने वाली वैक्सीन (Vaccine) का ह्यूमन ट्रायल ब्रिटेन (Britain) की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में शुरू हो गया है. इस वैक्सीन के ट्रायल के लिए 800 वॉलेंटियर्स को चुना गया है. अगर परीक्षण (Human Trial) सफल रहता है तो यह दुनिया के लिए बड़ी राहत की खबर होगी. इसके अलावा दुनियाभर के 70 से अधिक देशों के सैकड़ों शोध संस्थान इस बीमारी की वैक्सीन खोजने में लगे हैं. ब्रिटेन में कोरोना वैक्सीन के पहले ट्रॉयल में शामिल दो लोगों में एक डॉ. एलिसा ग्रैनेटो (Elisa Granato) हैं. उन्‍हें गुरुवार को वैक्सीन दे दी गई है. आइए जानते हैं कि मानवता की रक्षा के लिए आगे आने वाली एलिसा ग्रैनेटो कौन हैं...

माइक्रोबायोलॉजिस्ट हैं. डॉ. एलिसा ग्रैनेटो 
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी (University of Oxford) एक महीने के भीतर करीब 5,000 लोगों पर इसके टीके का परीक्षण करेंगे. दावा किया जा रहा है कि इसकी सफलता की संभावना 80 फीसदी तक है. डॉ. एलिसा एक माइक्रोबायोलॉजिस्ट हैं. डॉ. एलिसा ने ट्रायल को लेकर कहा कि मैं एक वैज्ञानिक हूं. इसलिए मैं जहां भी हो सकता है वैज्ञानिक प्रक्रिया में शामिल होने की कोशिश और समर्थन करना चाहती हूं.

डॉ. एलिसा ने कहा कि इन दिनों मैंने वायरस को लेकर कोई रिर्सच नहीं की. ऐसे में थोड़ा खालीपन और बेकारा महसूस कर रही थी. मुझे लगा कि ह्यूमन ट्रायल में शामिल होना कोरोना के खिलाफ लड़ाई को समर्थन देने का आसान तरीका है. व्यक्तिगत तौर पर मुझे इस वैक्सीन पर पूरा भरोसा है. हमें इसका इंसानों गर ट्रायल करके डाटा जुटाना होगा. उनका कहना है कि वायरस से बचाने के लिए हमें ज्‍यादा से ज्‍यादा लोगों तक वैक्सीन को पहुंचाना होगा.
कोरोना वैक्‍सीन के ह्यूमन ट्रायल में शामिल डॉ. एलिसा माइक्रोबायोलॉजिस्‍ट हैं.




कैंसर रिसर्चर एडवर्ड भी ट्रायल में शामिल
डॉ. एलिसा के अलावा एक और व्‍यक्ति एडवर्ड ओनील (Edward O’Neill) पर भी वैक्‍सीन का ह्यूमन ट्रायल किया गया है. एडवर्ड ओनील एक कैंसर रिसर्चर हैं. एडवर्ड मूल रूप से ऑस्‍ट्रेलिया के रहने वाले हैं. वह दो साल पहले सिडनी से ब्रिटेन आए थे. वह ब्रिटेन में रेडिएशन ऑन्‍कोलॉली पर रिसर्च कर रहे हैं. दोनों में एक को मेनिंजाइटिस (Meningitis) से सुरक्षा देने वाली कंट्रोल वैक्‍सीन दी गई है. वहीं, दूसरे पर कोविड-19 वैक्‍सीन का परीक्षण किया गया है.

दोनों को नहीं पता कि उन्‍हें कौन सी वैक्‍सीन दी गई है. दोनों पर 48 घंटे से नजर रखी जा रही है. इस दौरान दोनों पर वैक्‍सीन के असर का आकलन किया जा रहा है. इसका आकलन करने के बाद ट्रायल के लिए चुने गए 18 से 55 साल के स्‍वस्‍थ वॉलेंटियर्स को धीर-धीरे वैक्‍सीन दी जाएंगी. किसी भी वॉलेंटियर को पता नहीं होगा कि उन्‍हें दोनों में से कौन सी वैक्‍सीन दी गई है. डॉ. एलिसा ने बताया कि वैक्सीन ट्रायल में पूरी टीम सभी प्रतिभागियों को ट्रैक करने में वास्तव में आश्चर्यजनक काम कर रही है.

अफ्रीका और केन्‍या में भी ट्रायल करेगी टीम
वैक्सीन दरअसल में कोविड-19 वायरस नहीं है. यह वायरस एक छोटा सा हिस्‍सा है. यह एक अलग मृतप्राय वायरस से जुड़ा है. इसका मतलब है कि यह इंसानी शरीर में अपनी संख्‍या में वृद्धि नहीं कर सकता है. यह संभावित रूप से प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करेगा और कोविड-19 से रक्षा करेगा. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में वैक्सीनोलॉजी की प्रोफेसर सारा गिलबर्ट के निर्देशन में एक टीम ने तीन महीने की मेहनत के बाद यह वैक्सीन तैयार की है.

ब्रिटेन में कोरोना वैक्‍सीन के ट्रायल में शामिल होने वाले एडवर्ड ओ'नील मूल रूप से ऑस्‍ट्रेलिया के हैं.


कोरोना वैक्सीन के बारे में पहले 80 फीसदी विश्वास जताने वाली सारा ने कहा कि उन्हें इस वैक्सीन पर पूरा भरोसा है. उन्होंने कहा, हमें डाटा जुटाकर साबित करना होगा कि यह वैक्सीन कारगर है. हमें साबित करना है कि वैक्‍सीन लगने से कोरोना वायरस संक्रमण से बचा जा सकेगा. ऑक्‍सफोर्ड यूनिवर्सिटी की टीम अफ्रीका और केन्‍या में भी वैक्‍सीन का ह्यूमन ट्रायल करना चाहती है.

कुछ महीने की जाएगी दोनों की निगरानी
ह्यूमन ट्रायल में वॉलेंटियर को दो चरणों में वैक्‍सीन दी जाती है. पहली बार वैक्‍सीन दिए जाने के कुछ महीनों बाद उसकी स्थिति की संक्रमण के समय की स्थिति से तुलना की जाती है. वॉलेंटियर की कुछ महीनों तक निगरानी की जाएगी. उन्‍हें बता दिया गया है कि वैक्‍सीन के कारण पहले दो दिनों के भीतर उनकी बांह में सूजन या दर्द, सिरदर्द या बुखार जैसा महसूस हो सकता है. साथ ही उन्‍हें पहले ही चेतावनी दे दी गई है कि वैक्‍सीन में मौजूद वायरस के कारण कोरोना वायरस संबंधी कोई रिएक्शन भी दिखने को मिल सकता है. हालांकि, वैक्‍सीन बनाने वाली टीका का कहना है कि इस टीके से गंभीर रोग होने का खतरा बेहद कम है.

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