कौन हैं ऋषि पतंजलि, जिन्हें योग का जनक माना जाता है?

महर्षि पतंजलि को दुनिया का पहला योग गुरु माना जाता है

योग के जनक महर्षि पतंजलि (father of yoga, Patanjali) जल्द ही अपना जन्मस्थान छोड़कर काशी पहुंच गए. वहीं पर उन्होंने योग पर ग्रंथ लिखने के साथ कई अहम काम किए. काशी के लोगों की उनपर इतनी आस्था था कि उन्हें मनुष्य न मानकर शेषनाग का अवतार कहने लगे.

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    दुनियाभर में आज अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जा रहा है. कोरोना महामारी के दौरान भी बहुतेरे लोगों ने दावा किया कि योग के कुछ खास तरीकों की मदद से वे बीमारी को हरा सके. भारत से शुरू हुआ योग आज पूरी दुनिया में पहुंच चुका है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके जनक कौन थे? महर्षि पतंजलि को दुनिया का पहला योग गुरु माना जाता है, जिन्होंने योग के 196 सूत्रों को जमाकर इसे आम लोगों के लिए सहज बनाया.

    योग गुरु के बारे में प्रामाणिक जानकारियों का अभाव 
    योग के जनक महर्षि पतंजलि के जन्म से जुड़ी काफी विश्वसनीय जानकारियां नहीं मिलती हैं. इस बारे में अलग-अलग बातें हैं. हालांकि कई जगहों पर जिक्र है कि वे पुष्यमित्र शुंग (195-142 ई.पू.) के शासनकाल में हुए थे. उत्तरप्रदेश के गोंडा में जन्मे पतंजलि आगे चलकर काशी में बस गए. काशी में पतंजलि पर इतनी आस्था था कि उन्हें मनुष्य न मानकर शेषनाग का अवतार माना जाने लगा.

    पाणिनी के शिष्य की तरह हुई शुरुआत 
    महर्षि पतंजलि का नाम आने पर अक्सर पाणिनी का भी जिक्र होता है. कुछ विद्वानों के अनुसार पतंजलि ने काशी में पाणिनी से शिक्षा ली थी और बाद में उनके शिष्य की तरह काफी काम भी किए. पतंजलि ने पाणिनि के अष्टाध्यायी पर अपनी टीका लिखी, जिसे महाभाष्य भी कहा गया.

    patanjali international yoga day
    शेषनाग के अवतार में महर्षि पतंजलि की तस्वीर


    हालांकि कुछ का कहना है कि योग के जनक पतंजलि और अष्टाध्यायी पर टीका लिखने वाले, दो अलग-अलग लोग थे. इसपर जानकारों के बीच आज भी बहस होती है.

    कई ग्रंथ लिखे 
    वैसे ज्यादातर का मानना यही है कि शिष्य के तौर पर महान प्रतिभाशाली पतंजलि ने ही ये सारे काम किए. साल 1914 में अंग्रेज इतिहासकार और लेखक जेम्स वुड ने भी इसी बात का समर्थन किया. वहीं साल 1922 में संस्कृत के जानकार सुरेंद्रनाथ दासगुप्ता ने भी पतंजलि के योग शास्त्र और महाभाष्य की भाषा को मिलाते हुए यही तर्क दिया कि दोनों ही ग्रंथ पतंजलि ने लिखे थे.

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    योग को सहज बनाने का श्रेय पतंजलि 
    अष्टाध्यायी पर टीका पतंजलि की अकेली उपलब्धि नहीं, बल्कि सबसे ज्यादा इन्हें योग के लिए जाना जाता है. उन्होंने योग सूत्र लिखा, जिसमें कुल 196 योग मुद्राओं को सहेजा गया है. बता दें कि पतंजलि से पहले भी योग था लेकिन उन्होंने इसे धर्म और अंधविश्वास से बाहर निकाला और एक जगह जमा किया ताकि जानकारों की मदद से आम लोगों तक पहुंच सके. योग को ध्यान के साथ भी जोड़ा ताकि शरीर के साथ मानसिक ताकत भी बढ़े.

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    तेजी से लोकप्रिय होने के बाद एकाएक योग गायब हुआ और लगभग 700 सालों तक चलन से बाहर रहा (Photo- pixabay)


    पतंजलि के योग की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी
    उसी दौरान उनकी लिखी बातें भारतीय भाषाओं के साथ-साथ विदेशी भाषाओं में अनुवाद की जाने लगीं. ये संभवतः पहले ऐसे भारतीय ग्रंथों में था, जिसका दूसरे देशों में अनुवाद हुआ. यहां तक कि ये अरब देशों तक में पहुंच गया. विकिपीडिया पर इसका जिक्र मिलता है. हालांकि तेजी से लोकप्रिय होने के बाद एकाएक योग गायब हुआ और लगभग 700 सालों तक चलन से बाहर रहा. ये 12वीं से 19वीं सदी के बीच का समय था. तब दुनिया कई तरह के बदलावों से गुजर रही थी और व्यापार-व्यावसाय के साथ दबदबा बनाना और अपने धर्म को फैलाना सबसे बड़ा मकसद था. इसी दौर में योग पीछे चला गया.

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    19वीं सदी में योग फिर लौटा और बड़ी तेजी से लौटा. इसे दोबारा चलन में लाने का श्रेय स्वामी विवेकानंद को मिलता है.

    अष्टांग योग का सूत्र दिया 
    अब लौटते हैं महर्षि पतंजलि के योग पर तो उन्होंने अकेले शरीर की शुद्धि की बात नहीं की, बल्कि सबसे ज्यादा जिस बात पर जोर दिया, वो है अष्टांग योग. इसमें यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि शामिल हैं. इस तरह से योग को टुकड़ों में बांटकर योग के इस जनक ने इसे आम लोगों तक पहुंचाया.

    आज 7वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 
    पहली बार ये दिन इंटरनेशनल स्तर पर 21 जून 2015 को मनाया गया. इससे सालभर पहले मोदी सरकार ने संयुक्त राष्ट्र की महासभा में योग दिवस मनाने का प्रस्ताव दिया था, जिसे 193 देशों में से 175 देशों ने बगैर देर किए मान लिया. इसी से अंदाजा लग सकता है कि सिर्फ हमारे देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी योग कितना लोकप्रिय है.

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