कोविड 19 लॉकडाउन क्यों और कैसे है खुदकुशी की बड़ी वजह?

कोविड 19 लॉकडाउन क्यों और कैसे है खुदकुशी की बड़ी वजह?
पुलिस मामले में जांच कर रही है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

कोरोना वायरस (Corona Virus) संक्रमण के अलावा हुईं 326 मौतों में से 51 फीसदी यानी 168 मौतों की वजह आत्महत्या (Suicide) बताई गई है. विशेषज्ञ तो यहां तक चिंतित हैं कि लॉकडाउन (Lockdown) खत्म होने के बाद जनता के बीच खुदकुशी का दूसरा और बहुत खतरनाक दौर (Second Wave) आ सकता है. जानिए क्या और कैसी है ये पूरी तस्वीर.

  • Share this:
रांची में पढ़ रही 26 वर्षीय छात्रा जब कोविड 19 लॉकडाउन के चलते अपने घर नहीं जा सकी, तो उसने अपनी जान ले ली...

बेंगलूरु के विक्टोरिया अस्पताल में कोविड 19 संक्रमण से ठीक हो रहे 50 वर्षीय व्यक्ति ने खुदकुशी इसलिए की क्योंकि उसके वार्ड में दाखिल हुई एक संक्रमित महिला की जान संक्रमण से उसकी आंखों के सामने चली गई... आंध्र प्रदेश के चित्तूर में 56 वर्षीय व्यक्ति ने समझा कि वह कोरोना वायरस पॉज़िटिव है और अपने परिवार को संक्रमित कर देगा इसलिए अपनी मां की कब्र के पास फांसी पर लटका दिया...

पढ़ें: क्या हम कभी जान पाएंगे कि भूख, हादसों और रोगों से कैसे मारे जा रहे हैं मजदूर?



महाराष्ट्र के नागपुर में एक रिक्शा ड्राइवर शराब की लत छूटने से हो रही परेशानी नहीं झेल सका और खुद को आग लगा ली... इंटरनेशनल उड़ानें बंद होने से ठीक पहले आयरलैंड में पढ़ने वाली 25 वर्षीय छात्रा अपने घर लौट सकी, लेकिन दो महीने बाद उसने मुंबई स्थित अपने घर खुद को फंदे पर लटका लिया...

खुदकुशी के अलावा इन तमाम कहानियों में एक बात और समान और ध्यान देने की है कि अगर हालात कुछ और होते तो ये जानें बचाई जा सकती थीं. एक तरफ भारत में कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम और उससे होने वाली मौतों की संख्या को थामने की जद्दोजहद जारी है तो दूसरी तरफ, मौतों क उन मामलों से देश हिल रहा है, जिनमें जानें बचाई जा सकती थीं.

corona virus update, covid 19 update, lockdown update, suicide, suicide in lockdown, कोरोना वायरस अपडेट, कोविड 19 अपडेट, लॉकडाउन अपडेट, सुसाइड, लॉकडाउन में खुदकुशी
गूगल ट्रेंड्स में दिखता है कि लॉकडाउन के बाद 'सुसाइड' शब्द ज़्यादा सर्च किया गया.


लॉकडाउन में मौतों का बड़ा कारण खुदकुशी
इंटरनेट पर यूज़रों के बर्ताव से खुलासा हुआ है कि भारत में लॉकडाउन की घोषणा के बाद से ही 'सुसाइड' शब्द खोज के चरम पर रहा. लॉकडाउन तीसरी बार बढ़ने पर इस शब्द की सर्च​ फिर बढ़ी. पत्रकार राशेल चित्रा ने जो डेटा इकट्ठा किया है उसके मुताबिक भारत में कोरोना के समय संक्रमण के अलावा जिन कारणों से मौतें हो रही हैं, उनमें खुदकुशी दूसरा सबसे बड़ा कारण है.

इस बारे में एक और अध्ययन के हवाले से फर्स्टपोस्ट की रिपोर्ट में उल्लेख है कि 9 मई तक हुईं 326 गैर कोविड 19 मौतों में से 51 फीसदी यानी 168 मौतों की वजह आत्महत्या है. यह भी जानिए कि ये सिर्फ वही आंकड़े हैं जो कहीं न कहीं रिपोर्ट हुए हैं, यानी वास्तविक आंकड़े और ज़्यादा होने के भी अंदेशे हैं. अब जानते हैं कि इस बारे में मानसिक स्वास्थ्य के विशेषज्ञ क्या भयानक तस्वीर देख रहे हैं.

सुसाइड की दूसरी खतरनाक लहर तो आएगी..
जी हां, इन आंकड़ों के बाद फ्रंटलाइन में काम कर रहे मानसिक स्वास्थ्य के विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी कई मौतें रिपोर्ट ही नहीं हुई हैं और शायद होंगी भी नहीं. इन विशेषज्ञों ने चेताते हुए यह भी कहा कि जब लॉकडाउन खत्म होगा और पता चलेगा कि इसका नकारात्मक असर लोगों के रोज़गार और जीवन पर कितना बुरा पड़ा, तब आर्थिक संकट से जूझ रहे समाज में खुदकुशी की दूसरी और ज़्यादा खतरनाक लहर देखने को मिल सकती है.

बेरोज़गारी के साथ बढ़ती हैं आत्महत्याएं
मुंबई की थैरेपिस्ट हेमांगी व्यवहारे ने चेताया है कि लोगों की आर्थिक स्थिति की जो तस्वीर बनने वाली है, वह सुसाइड के अगले भयानक दौर के आंकड़े सामने लाएगी. द कन्वर्सेशन की एक रिपोर्ट में पश्चिमी देशों में हुए सर्वे के डेटा के आधार पर कहा गया है कि चार दशकों से ज़्यादा के वक्त के दौरान 26 यूरोपीय देशों में हुए अध्ययन का दावा है कि जब बेरोज़गारी 3 फीसदी से ज़्यादा बढ़ती है, तो आत्महत्याएं 4.45 फीसदी बढ़ती हैं.

corona virus update, covid 19 update, lockdown update, suicide, suicide in lockdown, कोरोना वायरस अपडेट, कोविड 19 अपडेट, लॉकडाउन अपडेट, सुसाइड, लॉकडाउन में खुदकुशी
बेंगलूरु में कोविड 19 मरीज़ के चिंता और डर के चलते खुदकुशी करने की खबर सुर्खियों में रही थी.


ऐसा ही एक आंकड़ा वैश्विक मंदी के दौरान ऑस्ट्रेलिया से भी सामने आया था. अब बात भारत की. हमारे देश में चूंकि प्रति व्यक्ति आय इन देशों के मुकाबले बहुत कम है इसलिए स्थितियां ज़्यादा खतरनाक हो जाती हैं. मुंबई के एक थिंक टैंक की रिपोर्ट कहती है कि 3 मई को खत्म हुए सप्ताह में देश की बेरोज़गारी दर 27.11 फीसदी थी. स्थिति साफ और खतरनाक है कि भारत की गरीब आबादी महामारी और इसके असर की चपेट में बुरी तरह है.

गरीब आबादी पर बड़ा संकट क्यों?
आत्महत्या बचाव और थैरेपी पर काम करने वाले समूह की शरनाज़ डॉक्टर के हवाले से लिखा गया है कि देश के गरीब लोग इसलिए ज़्यादा जोखिम में हैं क्योंकि जीवन संकट के चलते उनकी चिंताएं काफी गहरी होती हैं और इस वर्ग के लोग मेडिकल मदद भी नहीं ले पाते. दूसरी तरफ, लॉकडाउन के चलते कई मानसिक मरीज़ों को दवाएं और मेडिकल मदद मिलना मुहाल हो गया है. हालांकि इससे पहले भी मानसिक स्वास्थ्य गरीबों की पहुंच में कभी नहीं रहा.

विभिन्न वर्गों की चुनौतियां दरकिनार
व्यवहारे के हवाले से कहा गया है कि 'हमने वृद्धों को दरकिनार किया क्योंकि ये लोग टेक सैवी नहीं हैं इसलिए लॉकडाउन के दौर में उनके सामने एक नए तरह की लाइफ स्किल फौरन सीखने की चुनौती खड़ी हो गई. आप उनसे कैसे उम्मीद कर सकते हैं कि वो फोन उठाएंगे और मेडिकल मदद किसी एप से ले लेंगे!' साथ ही, लॉकडाउन की वजह से रिश्तों में दरारें, घरेलू हिंसा और शारीरिक उत्पीड़न जैसे मामले भी बढ़े हैं.

बच्चों के सामने शोषण और सही जवाबों के न मिलने के कारण अजीब मानसिक स्थितियां बन रही हैं तो किशारों के लिए लॉकडाउन के चलते सुरक्षित स्पेस गायब हो गया है और वो एक छोटे से भौतिक व मानिसक दड़बे में कैद होकर रह गए हैं. बच्चे, किशोर और वृद्ध संवेदनशील वर्ग हैं, जहां आत्महत्या की प्रवृत्ति पनपने के कारण हैं.


लॉकडाउन में डॉक्टर की मदद नहीं!
बेंगलूरु के डॉक्टर ए जगदीश के शब्दों में लिखा गया है कि लॉकडाउन के शुरूआती दौर में मेडिकल सहायता न मिल पाने के कारण उनके एक मानसिक मरीज़ ने खुदकुशी की कोशिश की. ऐसे कई केस सामने आ चुके हैं, जहां अचानक मानसिक मरीज़ों की दवा या इलाज बंद होने के कारण उनमें चिंता, तनाव और गंभीर किस्म के लक्षण पैदा हुए, जिनसे जूझने में वो नाकाम हुए.

corona virus update, covid 19 update, lockdown update, suicide, suicide in lockdown, कोरोना वायरस अपडेट, कोविड 19 अपडेट, लॉकडाउन अपडेट, सुसाइड, लॉकडाउन में खुदकुशी
खुदकुशी की प्रवृत्तियों के लिए न्यूज़18 क्रिएटिव.


आखिर में, फर्स्टपोस्ट के मुताबिक येइल अजगर्नी के शब्दों में यह कहानी जानना चाहिए:
"मेरी दोस्त डिप्रेशन में थी और वह दोस्तों व परिवार से अतिरिक्त मदद चाह रही थी. हम वास्तविक तौर पर उसके साथ मौजूद नहीं हो सकते थे लेकिन लॉकडाउन के चलते हम दोस्तों ने उसकी काफी मदद की कोशिश की. उसके परिवार को भी बताया कि उसमें आत्महत्या की प्रवृत्तियां दिख रही थीं. लेकिन परिवार ने पूरी गंभीरता नहीं दिखाई. फिर क्या हुआ, कह नहीं सकती लेकिन मुझे इतना पता है कि उसकी जान बचाई जा सकती थी."

ये भी पढ़ें :-

Lockdown के दौरान क्यों और कैसे बूम कर रही है PORN इंडस्ट्री?

नाम को लेकर चर्चा में आई इलाहाबाद यूनिवर्सिटी कैसे बनी थी? क्यों कही गई 'पूरब का ऑक्सफोर्ड'?
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज