नेपाल में अचानक क्यों बहुत बढ़ गई है चीनियों की आवाजाही?

नेपाल में अचानक क्यों बहुत बढ़ गई है चीनियों की आवाजाही?
नेपाल और चीन की बढ़ती नज़दीकियों पर भारत चिंतित है.

Covid-19 महामारी के दौर में मदद के नाम पर China से हज़ारों अधिकारी नेपाल पहुंच रहे हैं. यही नहीं, चीनी टीचरों और ट्रेनरों की संख्या भी नेपाल में बढ़ी है. दूसरी तरफ, Nepal Territory पर चीनी कब्ज़े की खबरें भी हैं. जानिए भारत के साथ अकड़ दिखा चुकी नेपाल सरकार कैसे घिरी है और India क्यों परेशान है.

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Galwan Valley में Ladakh Face-Off के बाद भारत और चीन के बीच सीमाओं पर तनाव (Sino-Indian Border Tension) बना हुआ है. लिपुलेख, लिम्प्याधुरा और कालापानी को अपने नक्शे में दिखाने के बाद से नेपाल और भारत के बीच भी सीमा विवाद (India-Nepal Border Issue) की स्थिति है. ताज़ा अपडेट ये है कि चीन नेपाली ज़मीनों का चोरी छुपे अतिक्रमण कर रहा है और वह भी अनैतिक तरीके से. नेपाल में चीन का दखल (China in Nepal) बेतहाशा बढ़ गया है, जिसे लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं. एक है कि भारत के साथ नेपाल ने कड़ा रवैया दिखाया, क्या वह चीन के साथ दिखा पाएगा?

लंबे समय से भारत के नक्शे और कब्ज़े में रहे लिम्पियाधुरा, कालापानी और लिपुलेख को नेपाल ने 1816 की सुगौली संधि का हवाला देते हुए हाल में अपने नक्शे (Nepal New Map) में जगह दी. खबरों की मानें तो उत्तरी गोरखा में रुई गांव और उत्तरी संखुवासभा में च्यांग और लुंगडेक गांव कथित तौर पर 1960 के दशक से चीन के क़ब्ज़े में हैं. लेकिन नेपाल सरकार चीन और Nepal Border से जुड़े मुद्दों पर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं कर सकी है. चीन और नेपाल के बीच सीमाओं की भूलभुलैया में हो रहे घोटाले और भारत की भूमिका को समझना ज़रूरी है.

नेपाल और चीन की सीमाओं का ब्योरा
अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं के संदर्भ में, नेपाल सीधे तौर पर तिब्बत के साथ सीमा साझा करता है और तिब्बत चीन के कब्ज़े की ही ज़मीन हो चुका है. तिब्बत क्षेत्र में 1439 किलोमीटर लंबी सीमा चीन और नेपाल के बीच है. 1963 में सर्वे के बाद सीमा निर्धारण के बाद माउंट एवरेस्ट की चोटी नेपाल में रही लेकिन इसका उत्तरी हिस्सा चीन में.
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नेपाल के पीएम केपी ओली चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ. फाइल फोटो.


चीन और नेपाल की सीमाओं पर बीबीसी की विस्तृत रिपोर्ट की मानें तो 1960 के दशक में चीन और नेपाल के बीच हुए भूमि आदान प्रदान में नेपाल ने 1836 वर्ग किलोमीटर ज़मीन चीन के सुपुर्द की थी तो बदले में चीन ने 2140 वर्ग किमी ज़मीन नेपाल को दी थी. अब विवाद ये है कि 'चीनी क्षेत्र में नेपाली गांव' हैं या नेपाली गांवों पर चीन का कब्ज़ा है? यह मुद्दा चीन विदेश मंत्रालय के नोटिस में भी लाया जा चुका है.

दूसरी ओर, चीन ने वादा तो किया था कि चीन और नेपाल के बीच नदी और जल सीमा 1963 की सीमा संधि के अनुसार होगी लेकिन पिछले साठ सालों में हिमालय क्षेत्र में प्राकृतिक बदलाव महत्वपूर्ण रहे हैं तो चीन पर प्राकृतिक संरचनाएं बदलने के भी आरोप लगे हैं. ऐसे में क्या स्थितियां होंगी? यह सवाल भी खड़ा होता है.


चीनी कब्ज़े पर क्या कह रही है ताज़ा रिपोर्ट?
भारत के खिलाफ नेपाल को इस्तेमाल करने के आरोप चीन पर लग चुके हैं. इस बीच, नेपाल कृषि मंत्रालय की रिपोर्ट में चिंता उठी है कि तिब्बत से लगी सीमाओं पर चीन ने नदियों के रुख मोड़ने के साथ ही उनकी प्राकृतिक संरचनाओं में छेड़छाड़ करने के बाद सड़क निर्माणों के ज़रिये नेपाली ज़मीन अपने इख्तियार में ली. नेपाल के सर्वे में कहा गया है कि सीमा​ विस्तार की महत्वाकांक्षा के चलते नेपाल की काफी ज़मीन चीन कब्ज़े में ले सकता है. अब नेपाल सरकार के रुख पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं.

ओली सरकार को देना पड़ेंगे इन सवालों के जवाब
कम्युनिस्ट पार्टी के नेता और नेपाल के प्रधानमंत्री केपी ओली सरकार से जिन सवालों के जवाब मांगे जा रहे हैं, उन्हें कुछ बिंदुओं में स्पष्टता से समझें.

1. चीन के अधिकार वाले तिब्बत में पड़ रहे नेपाली गांवों पर सरकार का क्या रुख है?
2. एवरेस्ट के उत्तरी क्षेत्र में चीन हुआवेई के 5जी टावर लगा रहा है, क्या इसकी इजाज़त ली गई?
3. नेपाल में चीनी भाषा के शिक्षकों की संख्या बेतहाशा क्यों बढ़ रही है?
4. नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी के नेता चीनी कम्युनिस्टों से ऑनलाइन ट्रेनिंग क्यों ले रहे हैं?
5. कोरोना वायरस के दौर में चीन से मदद के लिए 2000 अधिकारी क्यों आ रहे हैं?

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माउंट एवरेस्ट के उत्तर में चीनी मोबाइल कंपनियां टावर लगा रही हैं. फाइल फोटो.


नेपाल में पहले उप-प्रधानमंत्री रह चुके नेपाली कांग्रेस के नेता बिमलेंद्र निधि ने सरकार से जवाब मांगे हैं और बीबीसी की रिपोर्ट की मानें तो करीब 2000 चीनी अधिकारियों के नेपाल आने पर उन्होंने शक जताया है. निधि के मुताबिक 'इतनी संख्या में वो क्यों आ रहे हैं? नेपाल में चीन की इतनी दख़लंदाज़ी क्यों है? सरकार को इन तमाम मुद्दों पर साफ जवाब देने चाहिए.'

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क्या है भारत का रुख और चिंता?
नेपाल के सर्वे विभाग के पूर्व महानिदेशक बुद्धि नारायण श्रेष्ठ के हवाले से रिपोर्ट कहती है कि नेपाल और चीन को बिना देर किए फौरन बातचीत करना चाहिए और सीमाओं को लेकर स्थिति साफ करने की ज़रूरत है. नेपाली सीमाओं में चीन के बढ़ते दखल से भारत का चिंतित होना स्वाभाविक है क्योंकि यह केवल सीमा से जुड़ा ही नहीं, बल्कि व्यापारिक, कूटनीतिक और सांस्कृतिक गतिविधियों और संबंधों से जुड़ा मामला भी है.

नेपाल के किन हिस्सों पर चीन ने हाल में कब्ज़ा किया है, भारत तेज़ी से उन लोकेशनों को ट्रेस कर रहा है. ईटी की ताज़ा​ रिपोर्ट के मुताबिक भारत को समझना है कि चीन ने नेपाली राजनीति की अनदेखी के चलते कब्ज़ा किया है या ओली सरकार की मिलीभगत से.. चूंकि तिब्बत के साथ भारत की सीमाएं जुड़ती हैं इसलिए यह भारत की आंतरिक सुरक्षा का विषय है. गौरतलब है कि चीन के साथ नेपाल की बढ़ती नज़दीकियों पर भी भारत पहले ही चिंता जता चुका है.
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