तो इसलिए चमगादड़ कोरोना वायरस शरीर में होते हुए भी नहीं पड़ते हैं बीमार

तो इसलिए चमगादड़ कोरोना वायरस शरीर में होते हुए भी नहीं पड़ते हैं बीमार
चमगादड़ के शरीर में हजारों कोरोना वायरस होते हैं.

कोरोना वायरस (Coronavirus) जहां इंसान के शरीर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचता है, वहीं चमगादड़ (Bats) की सेल्‍स को क्षति नहीं पहुंचा पाता है. इसके अलावा चमगादड़ का इम्‍यून सिस्‍टम (Immunity) कमजोर होने के कारण वायरस की वजह से फेफड़ों (Lungs) में सूजन जानलेवा स्‍तर तक नहीं पहुंच पाती है.

  • Share this:
दुनियाभर के वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ही नहीं आम लोग भी जान चुके हैं कि कोरोना वायरस (Coronavirus) चमगादड़ों से फैला है. वैज्ञानिकों के मुताबिक, चमगादड़ों (Bats) का शरीर SARS-CoV-2 समेत कई तरह के कोरोना वायरसों के लिए सुरक्षित पनाहगाह के तौर पर काम करता है. इससे पहले भी देखा गया है कि सार्स (SARS) और मर्स (MERS) जैसे वायरस भी चमगादड़ों के जरिये ही फैले थे. शोधकर्ताओं के मुताबिक, किसी भी वायरस को जानवर से इंसान में पहुंचने और ज्‍यादा फैलने के लिए खास होस्ट की जरूरत होती है. चमगादड़ों में ऐसी तमाम खूबियां में पाई जाती हैं. कोरोना वायरस ना केवल चमगादड़ के शरीर में अपनी संख्‍या में इजाफा करते रहते हैं बल्कि वहीं इनका म्यूटेशन भी होता रहता है. अब सवाल ये उठता है कि जिस चमगादड़ के शरीर में वायरस इतना कुछ करता रहता है, उसे कोई नुकसान क्‍यों नहीं होता है? आखिर क्‍या वजह है कि कोरोना वायरस की भारी मात्रा शरीर में होने के बाद भी चमगादड़ कभी बीमार नहीं पड़ते हैं.

चमगादड़ की सेल्‍स को क्षति नहीं पहुंचाता कोरोना वायरस
शोधकर्ताओं के मुताबिक, मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (MERS) और SARS-CoV-2 वायरस चमगादड़ में पाया जाता है. कोरोना वायरस इंसानों के शरीर में प्रवेश करते ही उनके इम्यून सिस्टम को खत्म करना शुरू कर देता है. गंभीर स्थिति में पहुंचने पर संक्रमित व्‍यक्ति की जान चली जाती है. कनाडा की यूसैक यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता विक्रम मिश्रा के मुताबिक, हम यह जानना चाहते थे कि मर्स वायरस चमगादड़ के इम्यून सिस्टम को नुकसान क्यों नहीं पहुंचाता, जबकि इंसानों के लिए यह घातक साबित होता है. शोध में पाया गया कि जब यह वायरस चमगादड़ में पहुंचता है तो यह उसकी सेल्स को नुकसान पहुंचाने के बजाच उसके साथ काम करने लगता है. इससे पहले मर्स के मामले में भी देखा गया कि वायरस इंसान के शरीर की सेल्स को तो खत्म कर देता है, लेकिन चमगादड़ की कोशिकाओं को किसी तरह की क्षति नहीं पहुंचाता है. इसका सीधा सा मतलब है कि वायरस चमगादड़ के इम्यून सिस्टम के साथ किसी तरह का मुकाबला करने के बजाय उसके साथ मिलकर काम करता है.

वायरस चमगादड़ के इम्यून सिस्टम के साथ किसी तरह का मुकाबला करने के बजाय उसके साथ मिलकर काम करता है.

मेटाबॉलिक रेट ज्‍यादा होने से रेप्लिकेट नहीं होता वायरस


शोध के सहलेखक और यूसैक के साइंटिस्ट डेरिल फेलजारनो कहते हैं कि मर्स वायरस बहुत तेजी से स्थान विशेष के मुताबिक खुद ढाल सकते हैं. इस वजह से ये वायरस एक प्रजाती से दूसरी प्रजाती में आसानी से पहुंच जाता है. साइंस की रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोना वायरस जब किसी जीव में संक्रमण फैलाता है तो उसके अंदर तेजी से सूजन होती है, लेकिन चमगादड़ में ये प्रतिक्रिया बहुत ही कमजोर होती है. चमगादड़ के इंफ्लेमेट्री रिस्पॉन्स में खामी होने के कारण ऐसा होता है. वहीं, चमगादड़ों में नेचुरल किलर सेल्स की एक्टिविटी काफी कम होती है. इस कारण चमगादड़ के अंदर इस वायरस के इंफेक्शन को कैरी करने वाली सेल्स मरती नहीं हैं. चमगादड़ का मेटाबॉलिक रेट बहुत ज्‍यादा होता है. इस कारण उसमें अधिक मात्रा में रिऐक्टिव ऑक्सीजन स्पीशीज (ROS) बनती हैं, जो कोरोना वायरस को तेजी से रेप्लिकेट करने से रोकती हैं. हालांकि, इससे वायरस का म्यूटेशन रेट बढ़ जाता है.

इम्‍यूनिटी कमजोर होने से फेफड़ों में नहीं होती ज्‍यादा सूजन
शोधकर्ताओं के मुताबिक, चमगादड़ में बढ़े हुए म्यूटेशन के कारण कोरोना को किसी दूसरे होस्ट तक पहुंचने में आसानी होती है. इतना ही नहीं लगातार होने वाला यह म्यूटेशन कोरोना वायरस को पहले से ज्‍यादा घातक भी बनाता जाता है. चमगादड़ के अंदर स्ट्रॉन्ग इम्यून रिस्पॉन्स नहीं होने के कारण उसके फेफड़ों को जानलेवा नुकसान होने की आशंका काफी कम हो जाती है. जबरदस्‍त इम्‍यूनिटी नहीं होने की वजह से उसके फेफड़ों और शरीर में उतनी सूजन नहीं आती है, जिससे उसे सांस लेने में तकलीफ हो. न्‍यूज क्लिक की रिपोर्ट के मुताबिक, साइंस जर्नल नेचर में छपे शोध के मुताबिक, चमगादड़ में इंटरफेरॉन रेस्पॉन्स भी बहुत मजबूत होता है. इस कारण कोरोना वायरस चमगादड़ के अंदर तेजी से अपने प्रतिरूप नहीं बना पाता. इंटरफेरॉन एक तरह के कैमिकल्स होते हैं, जो शरीर में किसी भी वायरस की संख्‍या में होने वाले इजाफे पर रेाक लगाते हैं.

चमगादड़ में इंटरफेरॉन रेस्पॉन्स मजबूत होता है. इस कारण कोरोना वायरस चमगादड़ के अंदर तेजी से अपने प्रतिरूप नहीं बना पाता.


वायरस किसी जीव को होस्‍ट बनाने के लिए ढूंढता है ये खूबियां
कोई भी वायरस किसी भी जानवर की कुछ खासियतों को देखकर ही उसे अपना होस्‍ट बनाता है. कसी भी वायरस का होस्‍ट बनने वाले जीव की आयु लंबी होनी चाहिए. इस हिसाब से चमगादड़ ज्‍यादा से ज्‍यादा वायरस के लिए एक अच्छा होस्ट बनता है. एक चमगादड़ की सामान्य आयु 16 से 40 साल के बीच होती है. इसके अलावा वायरस ऐसे जानवरों में ही पानपता, जो बहुत बड़ी संख्या में एक साथ रहते हों. इससे वायरस को तेजी से ज्‍यादा से ज्‍यादा जीवों में फैलने में आसानी होती है. इस मामले में भी चमगादड़ परफेक्‍ट जीव है क्‍योंकि ये गुफाओं में झुंड में रहते हैं. साथ ही वायरस के बहुत दूर तक फैलने के सबसे जरूरी है कि होस्‍ट बनने वाला जीव उड़ सकता हो. ऐसे में जीव वायरस को दूर-दूर तक फैला देता है.
शोधकर्ताओं का कहना है कि कोरोना वायरस सिंगल स्ट्रैंडेड RNA वायरस हैः इसलिए इसमें म्यूटेशन बहुत ज्‍यादा होता है.

ये भी देखें:

जानें कौन हैं कोरोना संकट के बीच गुजरात भेजे गए डॉ. रणदीप गुलेरिया

अब घर पर ही लार से किया जा सकेगा कोरोना टेस्‍ट, अमेरिका में नई टेस्‍ट किट को मिली मंजूरी

यहां हेल्‍थ मिनिस्‍टर ने ही सार्वजनिक कर डाले पहले दो कोरोना संक्रमितों के नाम

दो महामारियों से बचाने वाले इस वैज्ञानिक को भारत ने विरोध के बाद लगाया गले

 

 
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज

corona virus btn
corona virus btn
Loading