कोरोना विडंबना : गुजरात में रिकवरी के बाद अचानक क्यों हो रही हैं मौतें?

कोरोना विडंबना : गुजरात में रिकवरी के बाद अचानक क्यों हो रही हैं मौतें?
न्यूज़18 क्रिएटिव

प्रति दस लाख की आबादी पर कोरोना वायरस (Coronavirus) के कुल केसों का औसत गुजरात में 873 है, जो देश के 1018 से कम है, लेकिन गुजरात में कोविड केस मृत्यु दर (CFR) देश के औसत से ज़्यादा बनी हुई है. नई चिंता ये है कि रिकवर मरीज़ों की अचानक मौत क्यों हो रही है और क्या इन मौतों को कोविड मौतों के आंकड़े में गिना जा रहा है?

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देश में पिछले तीन दिनों में करीब डेढ़ लाख नए केसों के सामने आने के बाद कोरोना वायरस (Corona Virus) संक्रमण के कुल कन्फर्म केसों की संख्या 13 लाख 85 हज़ार हो गई है. हालांकि 8 लाख 85 हज़ार से ज़्यादा केसों में रिकवरी (Recovered Case) बताई गई है. वहीं, ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक गुजरात में कुल केस (Covid 19 in Gujarat) 54,712 हो चुके हैं, जिनमें से 39,612 रिकवर्ड हुए हैं. लेकिन गुजरात में चिंता की बात ये है कि Covid-19 से ठीक होने यानी रिकवरी के बाद अचानक कुछ लोगों की मौत हो रही है!

ऐसे कुछ मामलों के उदाहरणों से स्थिति साफ तौर पर समझ में आ सकती है. साथ ही, इस बारे में स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय यह समझा सकती है कि ऐसा क्यों हो रहा है और गुजरात को इसके लिए किस तरह चिंता करना चाहिए.





नॉर्मल रिपोर्ट्स के बाद दिल का दौरा!
सूरत निवासी 68 वर्षीय फिज़िशियन और कवि डॉ. दिलीप मोदी का केस काबिले गौर रहा इसलिए रहा कि इस केस ने स्वास्थ्य विभाग का ध्यान ज़्यादा खींचा. 15 जुलाई को डॉक्टरों ने मोदी के परिवार को आश्वासन दिया कि उनके X-ray और बाकी रिपोर्ट्स नॉर्मल थे और वह अच्छी तरह से रिकवर हो रहे थे. लेकिन, अचानक उसी शाम मोदी को दिल का दौरा पड़ा और उनकी मौत हो गई.

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हालत सुधर रही थी और अचानक...
इसी तरह का एक और केस सूरत में हाल में सामने आया जब बीती 17 जुलाई को सरकारी अस्पताल SMIMERसे 70 वर्षीय कोविड मरीज़ हेमीबेन चोवतिया को डिस्चार्ज किया गया. डिस्चार्ज के वक्त रिकवरी हो जाना बताया गया, हालांकि उन्हें हाइपरटेंशन की शिकायत थी लेकिन उनकी हालत ठीक थी. लेकिन घर पहुंचने के कुछ ही घंटों बाद हेमीबेन की मौत से उनका पूरा परिवार हैरान रह गया. स्वास्थ्य विभाग के लिए ये केस भी जिज्ञासा का विषय बना.

गुत्थी को सुलझाने में लगे हैं डॉक्टर
गुजरात में कोविड 19 से 2300 से ज़्यादा मौतें हो जाने के बाद इस तरह के मामले सामने आ रहे हैं, जिन्हें बेशक कोविड संबंधी मौतों में नहीं गिना जा रहा क्योंकि ये मौतें रिकवरी के बाद हुई हैं. इस बारे में डॉक्टरों का कहना है कि वो मानव शरीर पर कोरोना वायरस के असर की गुत्थी को समझने और सुलझाने की कोशिश में लगे हैं. डॉक्टरों का मानना है कि कोविड 19 से हाइवरक्लॉटिंग और तेज़ जलन की शिकायतें ज्ञात हैं, लेकिन कुछ मरीज़ों में रिकवरी के बाद क्लॉटिंग को जोखिम कितने समय तक बना रहता है, ये अभी पूरी तरह नहीं कहा जा सकता.

एक और केस में कोई गड़बड़ी नहीं मिली
दो महीने पहले इसी तरह के एक और केस में काफी हो हल्ला हुआ था, जब अहमदाबाद में 67 वर्षीय छगन मकवाना की मौत हुई थी. कोविड 19 रिकवरी के बाद सिविल अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद मकवाना की मौत बस स्टॉप पर अचानक हुई थी. दिनदहाड़े हुई इस मौत के बाद हुई जांचों में कहा गया कि कोई गड़बड़ी नहीं हुई थी. मौत होना थी, हो गई.

क्यों हुई होंगी इस तरह मौतें?
गुजरात कोविड टास्क फोर्स के सदस्य डॉ. तुषार पटेल की मानें तो शरीर में लंबे समय तक किसी द्रव के जमाव या गाढ़े होने के चलते मरीज़ों को अचानक दिल के दौरे, ब्रेन स्ट्रोक जैसे कारणों से मौत की आशंका रहती है. कोविड 19 से रिकवर होने के बाद डिस्चार्ज हुए एक पुलिस अफसर वीनूभाई परमार को भी एक हफ्ते के बाद ब्रेन स्ट्रोक हुआ था. इस मामले में सीनियर डॉक्टर सुधेंदु पटेल के मुताबिक पहले लगा था कि ये डिप्रेशन जैसा केस है लेकिन फिर ब्रेन में क्लॉटिंग पाई गई.

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क्या है इन मौतों का उम्र एंगल?
गुजरात में कोविड 19 से रिकवरी के बाद अचानक हो रही मौतों के मामलों में उम्र को एक बड़ा फैक्टर समझा जा रहा है. ऐसे ज़्यादातर मामले सीनियर सिटीज़नों के दिखे हैं. साथ ही, यह भी देखा जा रहा है कि इस तरह के मामलों में क्या मृतक कोविड से पहले भी किसी गंभीर रोग से पीड़ित रहे थे. ये भी ध्यान देने की बात है कि दुनिया भर के आंकड़े कहते हैं कि उम्र और पूर्व रोग, इन दो पहलुओं को संबंध कोविड 19 मौतों से रहा है.

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वायरस के बारे में अभी और जानना पड़ेगा
गुजरात में रिकवरी के बाद अचानक हुई मौतों पर केंद्रित टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक कोविड 19 टास्कफोर्स से जुड़े संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ अतुल पटेल कहते हैं कि ये वायरस नया है और लंबे समय के लिए ये किस तरह असर डालता है, ये समझना बाकी है. गौरतलब है कि इस वायरस को लेकर कई तरह के शोध जारी हैं और पहले विशेषज्ञों के हवाले से कहा जा चुका है कि रिकवरी के बाद कोरोना वायरस शरीर के कई अंगों को लंबे समय के लिए प्रभावित कर सकता है.
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