गाय को गले लगाना क्यों दुनिया में बन रहा है ट्रेंड, क्या ये कोई थेरेपी है?

वैज्ञानिक अध्ययन कहता है कि गाय के संपर्क से तनाव कम होता है.
वैज्ञानिक अध्ययन कहता है कि गाय के संपर्क से तनाव कम होता है.

कुदरत से दूर होना अपने आप में बीमारी है और कुदरत के पहलू में होना या लौटना अपने आप में एक तरह का इलाज. अगर आप Covid-19 के दौर में किसी तनाव (Stress or Depression) से जूझ रहे हैं तो ये ट्रेंड आपके लिए दवा हो सकता है.

  • News18India
  • Last Updated: October 14, 2020, 12:47 PM IST
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हॉलैंड (Holland) के नाम से मशहूर देश नीदलैंड्स (Netherlands) के एक ग्रामीण इलाके रूवर से शुरू हुआ एक ट्रेंड दुनिया भर में अपनाया जा रहा है. इस तरह की खबरें आईं कि रूवर में 'को नफलेन' (डच भाषा का शब्द 'Koe Knuffelen', जिसका अर्थ है गाय को गले लगाना 'Cow Hugging') प्रैक्टिस शुरू हुई और देखते ही देखते दुनिया भर के लोग इसे अपनाने लगे. ऐसा क्यों हुआ? इसका कारण बताया गया है कि गाय को गले लगाने (Cow Cuddling) से न केवल तनाव से राहत मिलती है बल्कि मा​नसिक स्वास्थ्य (Mental Health) के लिहाज़ से किसी पालतू जानवर (Pets) का साथ बहुत उपयोगी है.

जी हां. वैसे 'थेरेपी एनिमल' का कांसेप्ट नया नहीं है, लेकिन कोरोना वायरस (Corona Virus Pandemic) की महामारी से जूझने वाली दुनिया में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं से कई लोग जूझ रहे हैं इसलिए यह ट्रेंड काफी पॉपुलर हो रहा है. इस ट्रेंड, गाय को गले लगाने से जुड़ी तमाम दिलचस्प बातें और वैज्ञानिक समझ के बारे में आपको जानकर न केवल मज़ा आएगा बल्कि हो सकता है कि आपको कुछ मदद मिले.

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क्या सच में गाय से लिपटने में सुकून है?
पहले तो आपको यह जानना चाहिए कि लिपटने के लिए सबसे ज़्यादा मुफीद पालतू जानवर गाय ही है. साल 2007 में एक स्टडी हुई थी, जिसमें पता चला था कि गाय की गर्दन और पीठ की तरफ कुछ खास नर्म हिस्सों को सहलाया जाए तो गाय को बड़ा आराम मिलता है और वह आपके साथ बहुत दोस्ताना हो जाती है. जो लोग ग्रामीण इलाकों से वास्ता रखते हैं, उन्हें पता है कि दूध दुहने से पहले गाय के साथ इस तरह प्यार किया जाता है.

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कुछ समय पहले लॉकडाउन के दौरान क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग का गायों की देखभाल करने का वीडियो चर्चित हुआ था.


लेकिन यह सिर्फ गाय के लिए ही फायदेमंद नहीं है. बीबीसी की रिपोर्ट की मानें तो इस तरह के बर्ताव से आपको भी एक सकारात्मक ऊर्जा मिलती है, तनाव कम करने में अहम ऑक्सिटॉसिन हार्मोन शरीर में बढ़ता है, जो आम तौर से सोशल बांडिंग के वक्त शरीर में बनता है. पालतू जानवरों के साथ खेलने में शरीर और मन को शांति मिलती है और ये भी फैक्ट है कि बड़े स्तनधारी पशु के साथ प्यार करने से ज़्यादा.

कोविड-19 : अकेलेपन के साथी हैं पेट्स?
जी हां. इस ट्रेंड के पीछे प्रमुख कारण यही है कि सोशल डिस्टेंसिंग, घरों में कैद होने और सामाजिक गतिविधियों के कम से कम हो जाने के कारण दुनिया भर में लोग अकेलेपन के शिकार हुए हैं. इससे कई तरह की मानसिक समस्याएं पेश आई हैं. स्वास्थ्य विशेषज्ञों के हवाले से रिपोर्ट्स कह रही हैं कि दुनिया भर में कोविड के कारण मानसिक स्वास्थ्य के मोर्चे पर सेवाएं संभवत: सबसे ज़्यादा प्रभावित हुईं.

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पालतू जानवरों से जुड़ी एक कंपनी पेटवॉच के डेटा की मानें तो कोविड 19 महामारी के दौरान पालतू जानवरों को लेने के आंकड़े कम हुए लेकिन मार्च के मध्य से पशुपालन केंद्रों में पशुओं की संख्या बढ़ी. एक और संस्था ASPCA के डेटा के मुताबिक पशुपालन केंद्रों में कुछ देर के लिए आकर लोग पालतू जानवरों के साथ खेलने और उनकी देखभाल करने में पहले से ज़्यादा रुचि लेते भी दिखे.

कैसे लोकप्रिय हुआ गाय के साथ खेलना?
असल में, दस साल से भी पहले हॉलैंड के गांवों में यह एक पासटाइम मस्ती के तौर पर शुरू हुआ था, लेकिन अब यह आंदोलन जैसा बन चुका है. इसे लोगों के प्रकृति के साथ जुड़ने और वक्त बिताने के अभियान के तौर पर प्रचार दिया गया. रॉटेरडम, स्विटज़रलैंड और अमेरिका तक यह मुहिम पहुंची और अब तनाव से राहत और मानसिक सेहत के लिए बाकायदा 'गाय को गले लगाने' के सेशन आयोजित किए जा रहे हैं.

हालांकि भारत और कई दक्षिण एशियाई देशों या पशुपालन करने वाले कम या मध्यम आय वर्ग के देशों में इस तरह की प्रैक्टिस होती रही है. इन देशों की बड़ी आबादी चूंकि गांवों में है इसलिए यहां यह आम बात है और शहरी इलाकों में भी पालतू जानवरों के साथ लोगों का रहना आम जीवन का हिस्सा है. विकसित देशों में प्रकृति से दूरी बढ़ने के कारण वहां यह ट्रेंड काफी लोकप्रिय हो रहा है.
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