जानें मुंबई में कभी क्‍यों नहीं आया कोई तूफान, फिर इस बार क्‍यों टकराएगा 'निसर्ग'?

मुंबई में तूफान की आशंका के चलते रेड अलर्ट जारी किया गया.

मुंबई में तूफान की आशंका के चलते रेड अलर्ट जारी किया गया.

मौसम विभाग के मुताबिक, मुंबई (Mumbai) में आज किसी भी समय चक्रवाती तूफान 'निसर्ग' (Cyclone Nisarga) टकरा सकता है. इस दौरान हवा की रफ्तार 100 से 120 किमी प्रति घंटा रहेगी. मौसम विभाग के मुताबिक, मुंबई में इससे पहले कभी तूफान नहीं आया. आईए जानते हैं इसकी वजह क्‍या है...

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कोरोना संकट के बीच एक के बाद एक मुसीबतें आ रही हैं. सबसे पहले कोरोना, फिर सुपर साइक्‍लोन अम्‍फान, फिर बार-बार भूकंप और अब चक्रवाती तूफान 'निसर्ग' (Cyclone Nisarga) ने लोगों की नींद उड़ा दी है. मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक, 'निसर्ग' उत्तरी महाराष्ट्र व हरिहरेश्वर और दमन के बीच अलीबाग के पास दक्षिण गुजरात के तट को 3 जून यानी आज पार करेगा. इस दौरान हवा की रफ्तार 100 से 120 किमी प्रति घंटा रहेगी. महाराष्ट्र, गोवा और गुजरात के तटीय इलाकों में चक्रवाती तूफान निसर्ग के टकराने का रेड अलर्ट (Red Alert) जारी कर दिया गया है. मुंबई (Mumbai) के अलावा महाराष्ट्र के तटीय इलाकों को अलर्ट पर रखा गया है. बता दें कि मुंबई में आमतौर पर ऐसे चक्रवाती तूफान नहीं आते हैं. कहा जा रहा है कि 'निसर्ग' का मुंबई के तट से टकराना अपवाद होगा. अगर ये बात सही है तो सवाल उठता है कि सागर तट पर बसे होने के बाद भी मुंबई में चक्रवाती तूफान क्‍यों नहीं आते हैं.

साल 1882 में मुंबई में आए तूफान को लेकर है विवाद

मुंबई में अब से पहले 1882 में एक तूफान के तबाही मचाने का जिक्र अकसर होता है. कहा जाता है कि उस तूफान के कारण मुंबई में 1 लाख से ज्‍यादा लोगों की मौत हो गई थी. हालांकि, इसके टकराने और अफवाह होने को लेकर विवाद है. फिर भी ये माना जा रहा है कि आज टकराने वाला तूफान मुंबई ने पहले कभी नहीं देखा है. मौसम विज्ञानियों के मुताबिक, अमूमन अरब सागर (Arabian Sea) में उठने वाले तूफान भारत के तटीय इलाकों (Indian Coastal Line) को छोड़ते हुए आगे बढ़ जाते हैं. ऐसे में निसर्ग के मुंबई के तट से टकराने के लिए पर्यावरण परिवर्तन (Climate Change) को जिम्‍मेदार माना जा रहा है. आईए जानते हैं कि मुंबई में चक्रवाती तूफान क्‍यों नहीं आते हैं. भारत में मौसम विभाग (IMD) ने 1891 में तूफानों का आधिकारिक रिकॉर्ड दर्ज करना शुरू किया था. साइक्‍लोन ई-एटलस रिकॉर्ड के मुताबिक, मुंबई में कभी भी चक्रवाती तूफान नहीं आया है. वहीं, जून में पूरे महाराष्‍ट्र में कभी तूफान नहीं आया है.

साइक्‍लोन ई-एटलस रिकॉर्ड के मुताबिक, मुंबई में कभी भी चक्रवाती तूफान नहीं आया है. वहीं, जून में पूरे महाराष्‍ट्र में कभी तूफान नहीं आया है.

मुंबई से टकराने से पहले कमजोर जाते हैं सभी तूफान

चक्रवाती तूफान 'ओखी' ने 2017 में महाराष्‍ट्र (Maharashtra) में दस्‍तक दी थी, लेकिन तब तक ये कमजोर होकर साधारण तूफान के तौर पर तटीय इलाकों से टकराया था. इससे मुंबई में भारी बारिश हुई थी. साल 2009 में उसी रास्‍ते से चक्रवाती तूफान फ्यान (Phyan) आगे बढ़ रहा था, जिस पर 'निसर्ग' आ रहा है, लेकिन ये मुंबई को छोड़ता हुआ आगे बढ़ गया था. तब भी मुंबई में भारी बारिश हुई थी. बताया जाता है कि मुंबई कुछ इस तरह से बसा हुआ (Geography) है कि कभी तूफान नहीं आते हैं. भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक, अरब सागर में उठने वाले ज्‍यादा चक्रवाती तूफान की दिशा पश्चिम-उत्‍तर-पश्चिम होती है. ये तूफान अरब सागर के तटीय इलाकों से मई में टकराते हैं. इसके बाद जून में उत्‍तर दिशा में बढ़ते हुए गुजरात के तटीय इलाकों की ओर बढ़ जाते हैं. ये पृथ्‍वी के घूर्णन (Rotational Character) या साधारण शब्‍दों में कहें तो धुरी पर घूमने के कारण होता है. इससे चक्रवात उत्तरी गोलार्ध में घड़ी की सुइयों की दिशा के उलटे (Anti-Clockwise) चलते हैं.

स्‍टीयरिंग विंड्स तय करती हैं तूफान के बढ़ने की दिशा



अरब सागर में सामान्‍य तौर पर पूर्वी मध्‍य या दक्षिण पूर्वी हिस्‍से में तूफान बनना शुरू (Origin) होते हैं. इसका सीधा सा मतलब है कि अरब सागर में उठने वाले चक्रवात तूफानों की स्वाभाविक प्रवृत्ति अरब प्रायद्वीप की ओर है. ये तूफान गुजरात (Gujarat) में सौराष्‍ट्र और कच्‍छ से टकरा सकते हैं. ऐसे में कहा जा सकता है कि मुंबई अरब सागर के तूफानों के टकराने की प्राकृतिक जगह नहीं है. इसके अलावा हवाओं की दिशा के कारण भी मुंबई में तूफान नहीं आते हैं. इन्‍हें स्‍टीयरिंग विंड्स (Steering Winds) कहा जाता है. ये हवाएं ही तूफान के बढ़ने की दिशा तय करती हैं. ये हवाएं पृथ्‍वी की सतह से ऊपर वातावरण की बीच की परत में बहती हैं. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, ये हवाएं तूफान की ऊपरी परत बनाती हैं और उसे अपने बहने की दिशा में मोड़ देती हैं. साइक्‍लोन समुद्र तट के नजदीक नहीं बनते हैं. ऐसे में ये हवाएं अरब सागर में बनने वाले तूफानों को भारत के तटीय इलाकों से दूर ले जाती हैं. अरब सागर के ज्‍यादातर चक्रवाती तूफान उत्‍तर-पश्चिम में ओमान व यमन या अफ्रीका में सोमालिया की ओर बढ़ जाते हैं.

अरब सागर में सामान्‍य तौर पर पूर्वी मध्‍य या दक्षिण पूर्वी हिस्‍से में तूफान बनना शुरू होते हैं.


सब-ट्रॉपिकल रिज के कारण भी नहीं आते मुंबई में तूफान

मुंबई को चक्रवाती तूफानों से एक और ढाल बचाती है, जिसे मौसम विज्ञानी उपोष्‍ण कटिबंध (Subtropical Ridge) कहते हैं. ये दक्षिण पश्चिमी मानसून से जुड़ा है. उपोष्‍ण कटिबंध उच्‍च दबाव वाली हवा की बड़ी बेल्‍ट होती है. इनमें धीमी रफ्तार वाली ठंडी हवाएं होती हैं. वहीं, निसर्ग जैसे उष्‍णकटिबंधीय तूफान ठंडी हवाओं में बहुत कमजोर पड़ जाते हैं. मुंबई समेत पश्चिमी तटीय इलाकों में प्री-मानसून सीजन में ये उपोष्‍ण कटिबंध बन जाता है. इससे मुंबई समेत पश्चिम तटीयस इलाकों में चक्रवाती तूफान आने की आशंका खत्‍म हो जाती है. दूसरी ओर तूफान कटिबंध के पीछे-पीछे चलते हैं. ऐसे में ये मुंबई को छोड़कर आगे बढ़ जाते हैं. इसके बाद उत्‍तर में गुजरात की ओर मुड़ सकते हैं. कुछ ऐसा ही गुजरात में 1998 में आए तूफान और 2019 में वायु के साथ भी हुआ था. इस समय भी अरब सागर में हवा के पैटर्न बदल रहे हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि पर्यावरण परिवर्तन के कारण अरब सागर का तापमान बढ़ रहा है. निसर्ग भी पर्यावरण परिवर्तन और ग्‍लोबल वार्मिंग का सबूत है. आईएमडी के मुताबिक, निसर्ग मुंबई से लेकर मध्‍य प्रदेश के इंदौर तक असर छोड़ेगा.

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