OXFORD की संभावित वैक्सीन के ट्रायलों का रुकना और फिर शुरू होना

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9 लाख से ज़्यादा मौतों और पौने तीन करोड़ से ज़्यादा संक्रमणों का कारण बन चुके ​Covid-19 के खिलाफ अग्रणी संभावित वैक्सीन AZD1222 के ट्रायल रुकने से दुनिया भर की उम्मीदों को झटका लगा था. अब ये ट्रायल (Clinical Trials) फिर शुरू होने का पूरा मतलब क्या है?

  • News18India
  • Last Updated: September 13, 2020, 10:03 AM IST
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ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी (Oxford University), फार्मा कंपनी एस्ट्राज़ेनेका (Astrazeneca) के साथ मिलकर जिस एंटी कोरोना वैक्सीन का विकास कर रही है, उसके ट्रायल (Human Trials) फिर शुरू किए जाने की खबरें हैं. दूसरी तरफ, भारत में इस वैक्सीन के उत्पादन में सहयोगी फार्मा कंपनी सीरम इंस्टिट्यूट (Serum Institute) भी इस संभावित वैक्सीन के ट्रायल करने के लिए मंज़ूरी जुटाने के अंतिम पायदान (Advanced Phase) पर है. उधर, ब्रिटिश स्वास्थ्य विभाग ने ट्रायल फिर से शुरू किए जाने की खबर को 'गुड न्यूज़' करार दिया तो चर्चा यह है कि यह इतना अहम क्यों है.

पिछले दिनों यूके में वैक्सीन ट्रायल में शामिल एक वॉलेंटियर के बीमार पड़ने के बाद संभावित वैक्सीन के ट्रायल रोक दिए गए थे. हालांकि वैक्सीन के प्रभाव जांचने के लिए हो रहे इस ट्रायल को दो दिन बाद फिर शुरू किए जाने की मंज़ूरी मिली. लेकिन दुनिया में कोविड 19 से जूझने की रेस में सबसे आगे चल रही इस वैक्सीन के ट्रायल रुकने से एक निराशा और चिंता की लहर दौड़ गई थी.

वैक्सीन ट्रायल रुकने का मतलब?

विशेषज्ञों के मुताबिक खबरों में कहा गया है कि साइड इफेक्ट नज़र आने पर सेफ्टी प्रोटोकॉल के तहत इस वैक्सीन के ट्रायल को रोका जाना संकट की घड़ी में भी जल्दबाज़ी न करने और समझदारी भरा फैसला लेने की मानसिकता को दर्शाता है. कैंब्रिज यूनिवर्सिटी की डॉ. शर्ली समर्स की मानें तो एक वॉलेंटियर की तबीयत ज़रा बिगड़ने पर ऑक्सफोर्ड ने जो निर्णय लिया, वो सुरक्षा को प्राथमिकता देने वाला नज़रिया साबित करता है.
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एडवांस स्टेज पर हैं ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन के ट्रायल. (File Photo)


क्यों यह वैक्सीन है अहम?



ऑक्सफोर्ड की संभावित वैक्सीन दुनिया भर में उन तमाम वैक्सीनों में अग्रणी है, ​जो ट्रायल के अलग अलग चरणों में हैं. इस समय दुनिया में करीब एक दर्जन संभावित वैक्सीनों के ट्रायल एडवांस चरणों में चल रहे हैं. डॉ. समर्स का कहना है कि लोग जिस पर विश्वास कर सकें और जो लोगों के लिए वाकई सुरक्षित हो, ऐसी ​वैक्सीन और इलाज विकसित किए जाने की ज़रूरत कोविड 19 महामारी के समय में बनी हुई है, इसलिए जल्दबाज़ी नहीं बल्कि सेफ्टी को ही प्राथमिकता दी जाना चाहिए.

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क्या वैक्सीन ट्रायल में रुकावट सामान्य बात है?

एक दवा या वैक्सीन के निर्माण में इस तरह की बातें होती रहती हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन और वैज्ञानिक पहले भी कह चुके हैं कि यह एक लंबी प्रक्रिया है और काफी सिरदर्द वाली भी. इससे पहले भी, ऑक्सफोर्ड और एस्ट्राज़ेनेका की यह वैक्सीन जुलाई में कई दिनों के लिए ट्रायल से रोक दी गई थी क्योंकि एक व्यक्ति में कुछ गंभीर साइड इफेक्ट नज़र आए थे, लेकिन बाद में दावा किया गया कि वह रोग वैक्सीन से संबंधित नहीं था.

हालांकि अब वैक्सीन निर्माताओं का कहना है कि बड़े स्तर पर हो रहे इस ट्रायल में कुछ लोगों की तबीयत नासाज़ होना सामान्य बात होगी, हालांकि उनकी सेहत पर बारीक नज़र रखी जाएगी.

कितने लोगों पर ट्रायल के बाद कब आएगी वैक्सीन?

जो खबरें आ रही हैं, उनके मुताबिक एस्ट्राज़ेनेका ने अब भी यही उम्मीद जताई है कि इस साल के आखिर तक या फिर अगले साल की शुरूआत तक वैक्सीन लोगों के लिए उपलब्ध हो सकती है. अभी जो ट्रायल जारी हैं, उनमें ​ब्रिटेन, ब्राज़ील और दक्षिण अफ्रीका में करीब 18 हज़ार लोग शामिल हैं और अमेरिका में करीब 30 हज़ार वॉलेंटियरों को इन ट्रायलों के लिए तैयार किया जा चुका है.
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