ताकत बढ़ाने के लिए सदियों से भोजन रहे बैम्बू रैट्स, चीन में अब मारे जा रहे हैं, क्यों?

बैम्बू रैट्स 5 किलाग्राम वज़न तक के हो सकते हैं.
बैम्बू रैट्स 5 किलाग्राम वज़न तक के हो सकते हैं.

ये आम चूहे नहीं बल्कि बड़े महंगे और जानदार चूहे हैं. China में इनके कारोबार (Animal Farming) से किसानों को काफी मुनाफा होता रहा है क्योंकि 5 किलोग्राम तक के ये चूहे चीन की पारंपरिक Medicines में महत्वपूर्ण माने जाते रहे हैं. लेकिन Covid-19 के खतरे के चलते इन्हें खत्म किया जाने से किसानों के सामने संकट है.

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Coronavirus संक्रमण फैलने के डर का नतीजा है कि चीन में Wild Animal Farming का बड़ा व्यापार ठप होने से चीन के लाखों लोग परेशान हैं. पैंगोलिन और सांपों के साथ ही बैम्बू रैट्स भी इस प्रतिबंध के दायरे में आ गए हैं इसलिए अब लाखों Bamboo Rats को खत्म किया जा रहा है. हाल में, चीन के Hubei प्रांत में 1.6 टन खास तरह के मोटे चूहों को दफनाकर खत्म किए जाने की खबरें और वीडियो जारी ​हुए हैं.

पशुपालन और पशु खेती तकनीकों के ज़रिये बैम्बू रैट्स का कारोबार चीन के Guangxi प्रांत की रीढ़ है. डेली मेल की खबर के मुताबिक इस साल फरवरी में ही चीन की केंद्रीय सरकार ने जंगली जानवरों के व्यापार और उन्हें खाए जाने पर प्रतिबंध लगा दिया था. कोविड 19 महामारी और न फैले, इस कारण से यह बैन लगाया गया था. बैम्बू रैट्स चीन में परंपरागत भोजन और बड़ा व्यावसायिक आधार रहे हैं, लेकिन अब इन्हें मारा जा रहा है.

सदियों से खाए जाते हैं बैम्बू रैट्स क्योंकि...
चीनियों का मानना है कि बैम्बू रैट्स के गोश्त में काफी पोषक तत्व होते हैं. पेट और स्प्लीन यानी तिल्ली की समस्याओं में यह गोश्त लाभदायक होता है. इसी कारण न केवल चीन में सदियों से ताकत के लिए बैम्बू रैट्स को खाया जाता रहा, बल्कि इन चूहों में पाए जाने वाले तत्वों का उपयोग पारंपरिक दवाएं बनाने में होता रहा है.
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दक्षिण चीन में खाए जाने वाले जंगली जानवरों के गोश्त में बैम्बू रैट काफी पसंदीदा रहा है. (चित्र विकिकॉमन्स से साभार)


चूहे की कीमत 10 हज़ार रुपए से भी ज़्यादा!
बैम्बू रैट्स के एक जोड़े की कीमत करीब 10700 रुपए होती है. वहीं इन चूहों का एक किलोग्राम ग्रिल्ड गोश्त 2300 रुपए से भी ज़्यादा कीमत में मिलता है. बैम्बू रैट्स को चीन की भाषा मैंडेरिन में 'झू शू' कहते हैं. एक इंटरनेट फोरम 'मिस्टर झू शू' के पेज पर इस जानकारी के अलावा यह भी उल्लेख है कि पैन फ्राय से सूप और ग्रिल से लेकर रोस्ट तक चूहों के मांस की 30 से ज़्यादा रेसिपीज़ चीन में मशहूर हैं.

5 किलो वज़नी होते हैं बैम्बू रैट्स...
चीन के ये बैम्बू रैट्स बांस में बिल बनाकर या खोखले बांस के भीतर रहते हैं इसलिए इन्हें इस नाम से पुकारा जाता है. इनका वज़न 5 किलो तक हो सकता है और लंबाई करीब डेढ़ फुट तक. हुबेई और आसपास के इलाकों में ग्रामीण किसान इन चूहों का पालन और व्यवसाय करते रहे हैं, जो अब परेशान हो रहे हैं.

क्या सच में खतरा हैं बैम्बू रैट्स?
आधिकारिक तौर पर ऐसा कोई बयान नहीं है कि कोरोना वायरस संक्रमण इन चूहों से फैलना शुरू हुआ या इनसे फैलता ही है, लेकिन विशेषज्ञों ने आशंका जताई ​है कि वायरस भोजन के तौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले जंगली जीवों से फैलता है. बैम्बू रैट्स पर चाइना न्यूज़ की विस्तृ​त रिपोर्ट में कहा गया कि इस साल जनवरी में चीन के महामारी विशेषज्ञ डॉ. झोंग नैनशन ने कहा था कि महामारी फैलने का संबंध बैम्बू रैट्स खाने से हो सकता है.

इसके बाद से ही बैम्बू रैट्स के पालन, कारोबार और भोजन पर सवालिया निशान लगे थे. हालांकि बाद में, विशेषज्ञों ने वायरस फैलने के लिए चमगादड़ों, सांपों और पैंगोलिनों के स्रोत के होने की थ्योरीज़ दीं लेकिन चीन में इस तरह के सभी जंगली जीवों के व्यापार और भोजन को रोक दिया गया.

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अब तक प्रचलित थ्योरी के आधार पर कोरोना वायरस का स्रोत चमगादड़ को माना जा रहा है.


किसानों के लिए कितना बड़ा झटका है?
करीब 5 करोड़ की आबादी वाले गुआंग्ज़ी प्रांत में ज़्यादातर लोग खेती पर निर्भर हैं. इनमें से 1 लाख से ज़्यादा लोग बैम्बू रैट्स के व्यवसाय में हैं और ये करीब 2 करोड़ बैम्बू रैट्स का पालन व कारोबार करते हैं. इसके अलावा हुबेई सहित गुआंगडोंग जैसे इलाकों में भी बैम्बू रैट्स का कारोबार होता है. लेकिन चीन के इस उद्योग का 70% केवल गुआंग्ज़ी में है.

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जिनसे संक्रमण का खतरा है, उन जंगली जानवरों को रिसर्च में इस्तेमाल करने या खत्म करने की गाइडलाइन जारी हो चुकी है. चाइना न्यूज़ की मानें तो गुआंग्ज़ी के किसानों को एक चूहे के बदले करीब 600 से 1300 रुपए तक का मुआवज़ा मिल रहा था, लेकिन नियम अब भी साफ नहीं हैं. एक तरफ, गरीबी की मार झेल रहे ये किसान दूसरी तरफ, गन्ना उत्पादन या सूअर पालन जैसे धंधों में शिफ्ट हो रहे हैं तो कर्ज़ के ​भी शिकार हो रहे हैं.
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