शिक्षा मंत्रालय क्यों बन गया था HRD और अब कैसे मिला पुराना नाम?

शिक्षा मंत्रालय क्यों बन गया था HRD और अब कैसे मिला पुराना नाम?
अब मानव संसाधन विकास मंत्रालय को शिक्षा मंत्रालय के नाम से पुकारा जाएगा.

नई शिक्षा नीति (Education Policy) पर हो रही चर्चाओं में नया पॉइंट यह है कि केंद्र सरकार ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय (HRD Ministry) का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय क्यों किया. यह नया बदलाव नहीं है क्योंकि आज़ादी के बाद से देश में शिक्षा मंत्रालय था, जिसका नाम और स्वरूप 1980 के दशक में बदला था. क्यों बदला था? ये भी जानिए कि कैसे हुई 'नाम वापसी'.

  • News18India
  • Last Updated: August 4, 2020, 4:16 PM IST
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मानव संसाधन विकास (Human Resource Development) मंत्रालय का नाम पिछले हफ्ते 29 जुलाई को बदलकर​ शिक्षा मंत्रालय रखा गया. यह बदलाव इसलिए किया गया ताकि मंत्रालय ज़्यादा स्पष्टता और फोकस के साथ अपने काम को परिभाषित कर सके. हालांकि आज़ादी (Independence Day) के बाद से इस मंत्रालय को शिक्षा मंत्रालय ही कहा जाता था लेकिन करीब 35 साल पहले राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) की सरकार के समय इसका नाम बदलकर HRD हो गया था. प्राइमरी से यूनिवर्सिटी स्तर तक की शिक्षा (Higher Education) पर फोकस रखने वाले इस मंत्रालय के सफर की दास्तान रोचक है.

राजीव सरकार ने क्यों बदला था नाम?
भारत की आज़ादी के बाद मौलाना अबुल कलाम आज़ाद पहले शिक्षा मंत्री थे. उनके बाद भारत के कई अहम व्यक्तित्व इस पद पर रहे जैसे हुमायूं कबीर, फखरुद्दीन अली अहमद, त्रिगुण सेन, सिद्धार्थ शंकर रे, वीकेआरवी राव और कर्ण सिंह आदि. 1984-85 में केसी पंत शिक्षा मंत्री थे, जिनके कार्यकाल के बाद इस मंत्रालय का नाम राजीव गांधी सरकार में बदल दिया गया.

अस्ल में, इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1984 में जब राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने, तब उनके इर्द गिर्द सलाहकारों की एक नई फौज थी. खुद राजीव बहुत से बदलाव और नयेपन के हामी थे. 26 सितंबर 1985 को शिक्षा मंत्रालय को बदलकर मानव संसाधन विकास मंत्रालय कर दिया गया और इसके अंतर्गत संस्कृति, युवा कल्याण, खेल और महिला व बाल विकास जैसे कई और विभाग भी रख दिए गए.
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भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी.


कैसे चला HRD मंत्रालय, कौन रहे मंत्री?
हालांकि इस निर्णय का ​विरोध भी हुआ था, लेकिन फैसला ले लिया गया था. राजीव सरकार ने मिलते जुलते विकास कार्यों से जुड़े विभागों को एक बैनर के तले लाने के लिए बदलाव किए थे और पहले HRD मंत्री पीवी नरसिम्हाराव बनाए गए थे. उनके बाद पी शिवशंकर, वीपी सिंह, अर्जुन सिंह, माधवराव सिंधिया जैसे दिग्गज इस मंत्रालय के प्रमुख रहे.

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इसके बाद वाजपेयी सरकार में मुरली मनोहर जोशी के पास ये मंत्रालय रहा तो यूपीए 1 में अर्जुन सिंह के पास फिर मंत्रालय लौटा. उनके बाद कपिल सिब्बल HRD मंत्री रहे. 2014 से मोदी सरकार में यह मंत्रालय स्मृति ईरानी, प्रकाश जावड़ेकर और रमेश पोखरियाल निशंक के पास रहा.

राजीव सरकार में बने इस मंत्रालय की सबसे बड़ी उपलब्धि थी कि 1986 में केंद्र सरकार ने नई शिक्षा नीति बनाई. देश के इतिहास में यह दूसरी शिक्षा नीति रही, जो अब तक प्रचलित रही. लेकिन इस मंत्रालय में समय समय पर बदलाव आगे भी होते रहे.


फिर अलग होते रहे मंत्रालय
1998 में जब अटलबिहारी वाजपेयी की सरकार बनी, तब सरकार ने HRD मंत्रालय से संस्कृति को अलग किया गया. 1999 में अलग से संस्कृति मंत्रालय बना, जिसकी कमान अनंत कुमार को सौंपी गई. इसी तरह, युवा मामलों को भी HRD मंत्रालय से अलग कर एक नया मंत्रालय बनाया गया और अनंत कुमार ही इसके भी मंत्री बने. वाजपेयी सरकार में इस तरह के बदलावों के साथ फिर अलग शिक्षा मंत्रालय बनाए जाने की राह बुलंद हुई थी.

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देश के पहले शिक्षा मंत्री रहे अबुल कलाम आज़ाद, आसफ अली और जवाहरलाल नेहरू.


साल 2006 में यूपीए 1 सरकार के समय महिला एवं बाल विकास विभाग को अलग से मंत्रालय बनाया गया. अब सिर्फ शिक्षा से जुड़े तमाम पहलू ही HRD मंत्रालय में प्रमुख रूप से बाकी रह गए थे.

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नाम फिर शिक्षा मंत्रालय होने की वजहें?
HRD मंत्रालय में जो विभाग जोड़े गए थे, धीरे धीरे उनका अलग हो जाना वैसे भी इस मंत्रालय के नाम और कल्पना को सार्थक नहीं कर रहा था, लेकिन इसके अलावा भी वजहें रहीं कि इस मंत्रालय का नाम बदलकर फिर शिक्षा मंत्रालय किया गया. अस्ल में, वाजपेयी सरकार के समय आरएसएस का दबाव था कि नाम बदला जाए लेकिन पाठ्यपुस्तकों को नए सिरे से लिखवाने के आरोपों के चलते वाजपेयी सरकार ने ​इस दिशा में कदम नहीं लिये.

इस बारे में इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में RSS के सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि संघ की बैठकों में कई बार इस मुद्दे पर चर्चा हुई और पिछले छह सालों में केंद्र को कुछेक बार लिखित तौर पर भी यह प्रतिवेदन भेजा गया कि शिक्षा मंत्रालय को पुराना नाम दिया जाए. साथ ही, नई शिक्षा नीति के ड्राफ्ट के समय भी सरकार को कई सुझाव मिले. इन तमाम वजहों से HRD मंत्रालय का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय कर दिया गया.
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