देश में लू के पीछे पछुआ हवाओं और चक्रवात अम्फान का हाथ है?

देश में लू के पीछे पछुआ हवाओं और चक्रवात अम्फान का हाथ है?
हरियाणा में मौसम

पिछली सर्दियों के मौसम (Weather) से अगर आप गौर करें तो तकरीबन हर महीने यानी बेमौसम बारिश होती रही है. इस बार तापमान (Temperature) भी अपने चरम पर देर से पहुंचा है. मौसम के बदलते हुए तेवरों की वजह आखिर क्या है? जानिए कि कैसे बंगाल की खाड़ी (Bay of Bengal) और अरब सागर (Arabian Sea) की हवाएं मौसम के समीकरण तय कर रही हैं.

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मौसम विज्ञान (Meteorology) से जुड़ी एक संस्था ने ताज़ा रिपोर्ट में कहा कि दुनिया के 15 सबसे गर्म स्थानों (Hottest Places) में से 10 भारत में हैं. 50 डिग्री सेल्सियस तापमान तक पहुंचे चुरू (Churu) समेत राजस्थान (Rajasthan) के पांच शहर इन 10 स्थानों में शामिल हैं. उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के शहरों सहित नई दिल्ली सबसे गर्म इलाकों में शुमार है. उत्तर, पश्चिम और मध्य भारत बुरी तरह लू (Heatwave) की चपेट में है. ऐसे में, आपको जानना चाहिए कि इस बार गर्मी गैरमामूली क्यों है और पिछले चक्रवात अम्फान (Cyclone Amphan) से इसका क्या लेना-देना है.

लगातार बना हुआ है पश्चिमी डिस्टरबेंस
भारत में 15 के आसपास तक तापमान अपने चरम पर पहुंच जाता है लेकिन इस साल पश्चिम, उत्तर और मध्य भारत में 21 मई के बाद तापमान अपने चरम स्तर पर पहुंच रहा है. मौसम विभाग के मुताबिक 29 मई के बाद से तापमान में गिरावट देखी जाएगी. उत्तर भारत में तापमान बढ़ने के समय में देर होने का बड़ा कारण पश्चिमी डिस्टरबेंस का लगातार बने रहना बताया गया है.

पिछली सर्दियों के मौसम से ही, हर पांच से सात दिनों के भीतर लगातार पश्चिमी डिस्टरबेंस को उत्तर की तरफ जाते हुए देखा गया. अस्ल में पश्चिमी डिस्टरबेंस का मतलब मेडिटेरैनियन सागर से पैदा होने वाली उन हवाओं से है, जो निचले वातावरण स्तर पर पूर्व की तरफ बहती हैं.




इस साल बना डिस्टरबेंस का रिकॉर्ड


जब पश्चिमी डिस्टरबेंस दो दक्षिणी समुद्रों के साथ क्रिया प्रतिक्रिया करता है तो बंगाल की खाड़ी या अरब सागर की तरफ से गर्म हवाएं चलती हैं. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट की मानें तो इस साल जनवरी से मार्च के बीच रिकॉर्ड 20 पश्चिमी डिस्टरबेंस देखे गए. इस डिस्टरबेंस का प्रभाव ज़्यादातर दिसंबर से फरवरी के दौरान दिखता है लेकिन इस बार यह प्रभाव शुरूआती मई तक देखा गया.

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क्यों हुई बार बार बेमौसम बारिश?
बंगाल की खाड़ी की तरफ से चल रही पुरवा हवाओं के पछुआ हवाओं के साथ टकराने की वजह से राजस्थान, पंजाब, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और दिल्ली में मई के महीने तक तकरीबन हर महीने बेमौसम बारिश हुई. इसी वजह से तापमान अपने चरम पर देर से पहुंचा. भारतीय मौसम विज्ञान की मानें तो साल 2020 में अब तक तापमान सामान्य से कम रहा है, देखें :

जनवरी में - 0.6 डिग्री
फरवरी में + 0.2 डिग्री
मार्च में - 0.8 डिग्री
अप्रैल में - 0.1 डिग्री

इतनी गर्मी के पीछे क्या अम्फान का हाथ है?
हां. चक्रवात अम्फान के फौरन बाद लू की स्थिति बनने से विशेषज्ञ मान रहे हैं कि ताज़ा लू के दौर के पीछे सुपर साइक्लोन का कुछ प्रभाव है. अस्ल में, इस चक्रवात ने किया यह कि बंगाल की खाड़ी समेत पूरे दक्षिणी प्रायद्वीप पर जो नमी थी, 700 किमी के लंबे क्षेत्र में उसे खत्म कर दिया, यहां तक कि अरब सागर की सतह से भी. 16 मई से 20 मई के बीच अम्फान जब बंगाल और बांग्लोदश के बीच बढ़ा तो सारी नमी कमतर होती चली गई.

नमी खत्म हो जाने से पछुआ हवाओं को बल मिला और अब आलम यह है कि राजस्थान, दिल्ली, मप्र, उप्र और महाराष्ट्र के कई इलाकों में खुश्क उत्तर पश्चिमी हवाओं के बहने के कारण लू के हालात हैं. यह भी जान लीजिए कि लू क्या होती है. जब किसी जगह पर सामान्य रूप से रहने वाले तापमान में 4 से 5 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोत्तरी हो जाती है, तो माना जाता है कि उस जगह लू चल रही है.

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First published: May 27, 2020, 6:29 PM IST
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