जानिए भारत में आज क्यों मनाया जाता है ‘जन औषधि दिवस’

जन औषधि दिवस (Jan Aushadhi Diwas) आम लोगों के लिए बहुत महत्व का दिन माना जाता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

जन औषधि दिवस (Jan Aushadhi Diwas) आम लोगों के लिए बहुत महत्व का दिन माना जाता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

7 मार्च को देश भर में जन औषधि दिवस (Jan Aushadhi Diwas) के रूप में मानाया जा रहा है. यह देश में आम लेकिन जरूरी दवाइयों (Generic Medicines) के प्रति जागरुकता और विश्वास पैदा करने के उद्देश्य से मनाया जाता है.

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7 मार्च को देश भर में जन औषधि दिवस (Jan Aushadhi Diwas) मनाया जाता है. इसका उद्देश्य देश के लोगों को जेनरिक दवाओं (Generic Medicines) के प्रति जागरुकता और विश्वास पैदा करना है. यह दिन प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (PMBJP) कि उपलब्धियों को मनाने का भी दिन है. इस दिन को देश में लोगों को सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जागरुकता फैलाने के उद्देश्य से भी मनाया जाता है.

स्वास्थ्य कर्मियों से चर्चा का मौका
जन औषधि दिवस को जेनरिक मेडिसन्स डे भी कहा जाता है. इस दिन भारत के पीएम नरेंद्र मोदी एक और परंपरा का पालन करते है जो उन्होंने शुरू की थी. वे देश के जनऔषधि केंद्रों के मालिकों और प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना लाभकर्ताओं से से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बातचीत करते हैं.

कार्यक्रमों को इन लोगों की होती है शिरकत
जन औषधि दिवस के मौके पर बहुत सारे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. इसमें पीएमबीजेपी के लाभार्थियों सहित डॉक्टर, स्वास्थ्य विशेषज्ञ, गैर सरकारी संगठन आदि भाग लेते हैं. जन औषधि दिवस का उद्देश्य जेनरेकि दवाओं के उपयोग को बढ़ावा देने और उनके प्रति जागरुकता बढ़ाना है. इस दिन को सरकार द्वारा देशवासियों को आयुष्मान भारत, पीएमबीजेपी, जैसी वहन करने योग्य स्वास्थ्य सेवाएं देने की दिशा में किए गए प्रयासों से अवगत करना भी है.



5 साल पहले की गई थी इस योजना की घोषणा
प्रधानमंत्री जनऔषधि योजना भारत के प्रधानमंत्री ‪नरेन्द्र मोदी द्वारा 1 जुलाई 2015 को घोषित एक खास योजना है. इस योजना में सरकार द्वारा उच्च गुणवत्ता वाली जेनरिक (Generic) दवाइयां बाजार मूल्य से कम कीमत पर उपलब्ध कराई जाती हैं. इसके लिए सरकार द्वारा 'जन औषधि स्टोर' बनाए गए हैं, जहां जेनरिक दवाइयां उपलब्ध करवाई जाती हैं.

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पीएम मोदी (PM Modi) ने पीएमबीजेपी की घोषणा साल 2015 में की थी. (फाइल फोटो)


यह लक्ष्य है इस योजना का
इस योजना का लक्ष्य देश के हर ब्लॉक में कम से कम एक पीएमबीजेपी केंद्र  खोलने का है. पिछले साल जनऔषधि दिवस के दिन तक देश के 700 जिलों में जदन औषधि केंद्र के 6200 आउटलेट खुल चुके थे. ये केंद्र एक स्वरोजगार के बहुत अच्छे अवसर के रूप में जाने जाते हैं.

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सस्ते दामों पर दवाइयां
आमतौर पर दवाईयों के दाम बाजार से तय होते हैं जिसमें दवाकंपनियों की दाम तय करने में भूमिका भी होती है. इस वजह से जरूरी दवाइयां भी आम लोगों के लिए बहुत महंगी होती हैं. जेनरिक दवाइयां ब्रांडेड फार्मा कंपनियों की दवाइयों से सस्ती होती हैं, लेकिन उनका असर उन्हीं के बराबर होता है.

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जन औषधि दिवस (Jan Aushadhi Diwas) साल 2019 में सबसे पहले मनाया गया था. सांकेतिक तस्वीर.


लोगों को नहीं है जानकारी
बहुत से लोगों को यह नहीं पता होता है कि ब्रांडेड दवाओं की तुलना में जेनरिक दवाएं कम मूल्य पर उपलब्ध हैं. इसके साथ ही इनकी गुणवत्ता में किसी तरह की कमी नहीं हैं और इन्हें आसानी से हासिल भी किया जा सकता है. इस योजना में आम नागरिकों को 60 से 70 फीसदी कम कीमत पर दवाइयां मुहैया कराया जाता है.

डॉक्टरों को भी किया जाता है प्रोत्साहित
जब भी कोई मरीज बीमार हो कर डॉक्टर के  पास जाता है तो डॉक्टर उन्हें वे दवाएं सुझाते हैं जिनके दाम बाजार में ज्यादा होते हैं. पीएमबीजेपी का एक लक्ष्य डॉक्टरों को इस बात के प्रेरित करना है कि वे लोगों को जेनेरिक दवाओं की सलाह दें खास तौर पर गरीब और आर्थिक रूप कमजोर मरीजों को.

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इन दवाओं में सामन्य बुखार, मौसमी बीमारियों से संबंधित दर्द, जुखाम, सर्दी आदी की दवाएं शामिल होती हैं जिनका आम जीवन में बहुत उपयोग होता है. सराकर इन दवाओं की कीमत करने के लिए विशेष प्रयास करती है और उन्हें सस्ते दामों पर मुहैया कराने का प्रयास भी करती है.
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