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  • KNOW WHY INDIAN AIR FORCE IS LOSING TRAINED PILOTS AND IF THERE IS SHORTAGE FOR RAFALE PILOT BHVS

वायु सेना के पास राफेल जेट तो हैं, ट्रेंड पायलट नहीं?

लड़ाकू विमान पायलट. फाइल फोटो.

लड़ाकू विमान (Fighter Airplanes) के लिए प्रशिक्षित पायलट का होना बेहद ज़रूरी भी है और महत्वपूर्ण भी. लेकिन लगातार कई पायलट वायु सेना (Indian Air Force) क्यों छोड़ रहे हैं? और क्या इन पायलटों को रोकने के लिए वायु सेना किसी कारगर कदम पर विचार कर रही है? जानिए क्या है पूरा सच.

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    भारत अपनी वायु सेना (Airforce) को मज़बूत करने के लिए कई तरह के रक्षा उपकरणों और आधुनिक लड़ाकू विमानों (Modern Fighter Planes) की खरीदारी में कतई पीछे नहीं है. भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव (India China Border Tension) के हालात के बाद फ्रांस से भारत पहुंची राफेल विमानों (Rafale Jets) की पहली खेप इसका उदाहरण है. लेकिन, अब सोचने की बात ये है कि भारतीय वायुसेना के पास कहीं ऐसा तो नहीं कि राफेल जैसे विशिष्ट विमानों को उड़ाने के लिए प्रशिक्षित पायलट (Fighter Pilots) ही न हों?

    राफेल की पहली खेप जो भारतीय वायु सेना के अंबाला एयरबेस पर पहुंच चुकी है और जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के रक्षा मंत्री फ्लोरेंस पार्ली की मौजूदगी में एक समारोह के बाद इन विमानों को औप​चारिक तौर पर सेना में शामिल कर लिये जाने की तैयारी ज़ोरों पर है. लेकिन, इस बीच पायलटों की कमी एक गंभीर मुद्दा बन गई है.

    क्यों उठ रहा है ये सवाल?
    राफेल जेट के अलावा मिग 29 और सुखाई 30 विमानों के साथ भारतीय वायु सेना को ताकतवर बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है. इंडिया टुडे द्वारा फाइल किए गए एक आरटीआई आवेदन के जवाब में ये बात पता चली कि पिछले 10 सालों में वायु सेना के 798 पायलटों ने इस्तीफा दिया, जिनमें से 289 को नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट दिया जा चुका है यानी अब वो पायलट प्राइवेट एयरलाइन्स में सेवाएं दे सकते हैं.

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    पिछले महीने भारत को राफेल विमानों की पहली खेप मिली थी.


    साल 2016 में 100 और 2017 में 114 पायलटों के वायु सेना छोड़ने से ये दो साल सेना के लिए सबसे खराब दौर साबित हुए थे. इसके उलट 2015 में 37 पायलटों ने सेना छोड़ी थी. कुल मिलाकर हर साल औसतन 80 पायलट वायु सेना छोड़ रहे हैं. इसका सीधा मतलब ये है कि वायु सेना में पायलटों की भारी कमी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता.

    क्या वाकई पायलटों की कमी है?
    फरवरी 2018 में सरकार ने राज्य सभा में एक सवाल के जवाब में आंकड़े बताते हुए कहा था कि भारतीय वायु सेना में 3855 पायलट सेवा में थे, जबकि कुल स्वीकृत स्ट्रेंथ 4231 पायलटों की थी. इसका मतलब साफ है कि तब भी 376 पायलटों की कमी थी. इस मुद्दे पर यूरेशियन टाइम्स की रिपोर्ट की मानें तो जितने पायलट सेना छोड़ते हैं, उनमें से एक तिहाई को प्राइवेट एयरलाइनों में काम करने के लिए एनओसी मिल जाता है.

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    रिपोर्ट्स की मानें तो वायु सेना के एक पायलट को हर महीने करीब 2 लाख रुपये तक की सैलरी मिलती है, जबकि अगर वही पायलट निजी एयरलाइनों के लिए सेवाएं देते हैं तो इससे चार गुना सैलरी तक पा लेते हैं. हालांकि सेना के ज़्यादातर पायलट 20 साल की सेवा देने के बाद ही सर्विस छोड़ते हैं ताकि वो पेंशन के लिए पात्र हो सकें. एक अनाम पायलट के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है :

    वायु सेना का जीवन बहुत अच्छा है और वेतन की बात नहीं, बल्कि कई तरह के फायदे भी हैं. लेकिन एक निजी एयरलाइन के पायलट होने में वर्कलोड काफी कम हो जाता है. निजी सेक्टर में पायलट का काम सिर्फ विमान उड़ाने का ही है.


    क्या पायलटों को रोकना चाहती है वायु सेना?
    इसी साल फरवरी में एचटी की रिपोर्ट में कहा गया था कि भारतीय वायु सेना अपने पायलटों को नौकरी छोड़कर प्राइवेट एयरलाइनों में जाने से रोकने के लिए सैलरी और अन्य सुविधाओं के बारे में विचार कर रही थी. हालांकि इस बारे में कोई टाइमलाइन रिपोर्ट में नहीं बताई गई थी कि सेना कब तक और किस तरह के सुधार करने जा रही है.

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    हालांकि इस रिपोर्ट का खंडन करते हुए आईटी ने लिखा है कि आरटीआई आवेदन के जवाब में सेना ने कहा कि वायु सेना के पास ऐसी कोई योजना या नीति नहीं है. दूसरी तरफ, विशेषज्ञ मान रहे हैं कि पायलटों को रोक पाना वायु सेना के लिए वाकई अहम भी है और चुनौती भी.

    रिटायर्ड एयर मार्शल और एयर पावर स्टडीज़ सेंटर के डीजी केके नोहरवार के हवाले से कहा गया है कि 'कई तरह के विमानों पर 250 से 300 घंटे की ट्रेनिंग के बाद एक पायलट वायु सेना में तैयार होता है. यानी एक पायलट पर बहुत खर्च होता है. आप इतने खर्च के बाद किसी पायलट को गंवाना अफोर्ड नहीं कर सकते. हालांकि दुनिया भर की वायु सेनाएं इस तरह के संकट से जूझ रही हैं.'