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ट्रंप के एक ट्वीट से क्यों है अप्रवासी भारतीयों में डर और खलबली?

ट्रंप के एक ट्वीट से क्यों है अप्रवासी भारतीयों में डर और खलबली?

न्यूज़18 क्रिएटिव

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स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था पर कोविड 19 महामारी का असर तो चर्चा में है, लेकिन अमेरिका में अब बात स्वदेशियों और विदेशियों के बीच रोज़गार के अवसरों में अंतर और नागरिकता तक आ गई है. जानें कैसे सोशल मीडिया पर ट्रंप के एक पोस्ट के बाद से लाखों भारतीयों के सामने रोज़गार और इमिग्रेशन को लेकर संकट गहरा गया है.

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    कोरोना वायरस (Corona Virus) संक्रमण की वैश्विक महामारी (Pandemic) से अमेरिका (USA) में मची तबाही का एक नतीजा यह है कि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था (Economy) पर संकट के बादल छा गए हैं. ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति (US President) ने इमिग्रेशन (Immigration) को स्थगित कर देने संबंधी एक ट्वीट (Tweet) किया तो अमेरिका में रहने वाले भारतीयों (NRIs) समेत अप्रवासियों के सिर पर संकट मंडराने लगा. लाखों की आबादी अपने भविष्य को लेकर सहमी हुई है.

    खास तौर से तकनीक और व्यापार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण पदों पर रहने वाले भारतीय (Indian Americans) अप्रवासी ट्रंप (Donald Trump) के इस तरह के फैसले से न सिर्फ डरे बल्कि चौंक भी गए हैं. कई लोगों के सामने अपने परिवार से दूर होने का संकट खड़ा हो गया है तो कई अपने रोज़गार (Employment) को लेकर परेशान हैं. आपको जानना चाहिए कि कैसे अमेरिकी एनआरआई इस समस्या से दो चार होने पर मजबूर हैं.

    क्या था ट्रंप का ट्वीट?
    सोमवार देर रात ट्रंप ने ट्वीट में लिखा : 'अदृश्य दुश्मन (कोविड-19 के लिए ट्रंप इस शब्द का इस्तेमाल करते रहे हैं) के हमले की वजह से और साथ ही अपने अमेरिकी नागरिकों के रोज़गार बचाने की ज़रूरत के मद्देनज़र, मैं एक आधिकारिक आदेश पर हस्ताक्षर करने जा रहा हूं, जो अमेरिका में इमिग्रेशन को अस्थायी रूप से स्थगित कर देगा.' इसके बाद ट्रंप ने ग्रीन कार्ड के आवेदनों को भी दो महीने टालने की बात कही.

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    क्या निकाला जाए इस फैसले का अर्थ?
    इस ट्वीट से कई प्रश्न और जिज्ञासाएं उठना स्वाभाविक है, लेकिन ट्रंप ने इस फैसले संबंधी डिटेल्स और समय सीमा नहीं बताई इसलिए विशेषज्ञ इसे लेकर अलग अलग राय रख रहे हैं. ईटी की रिपोर्ट सवाल उठाती है कि क्या इस फैसले से एच1बी वीज़ा वाले भारतीयों के वर्क प​रमिट पर असर पड़ेगा या उन ​छात्रों पर, जो ओपीटी पर हैं और एच1बी लॉटरी में चुने जा चुके हैं?

    इन सवालों के जवाब विशेषज्ञों के हवाले से देते हुए कहा गया है हालांकि ग्रीन कार्ड पर पहले से अमेरिका में रह रहे भारतीयों को बहुत खतरा नहीं है, लेकिन अगर यह फैसला विदेशियों के वर्किंग वीज़ा को भी दायरे में ले लेता है, तो अमेरिका छात्रों और करियर चाहने वालों के बीच कम लोकप्रिय हो जाएगा.


    किस कदर डर गए हैं भारतीय?
    अमेरिका में माइक्रोसॉफ्ट में अपने पति के साथ काम करने वाली प्रियंका नागर कुछ समय के लिए भारत अपने घर आई थीं, लेकिन ट्रंप के ट्वीट के बाद से चिंतित हैं. प्रियंका के पति और अमेरिका में ही जन्मी 5 साल की बेटी अमेरिका में हैं और फिलहाल वीज़ा एक्सटेंशन नहीं मिल रहा, दूतावास बंद हैं और ऐसे में ट्रंप के इस ट्वीट के कारण वह पसोपेश में हैं कि क्या होने वाला है. प्रियंका भविष्य सोचकर रो भी पड़ती हैं, इस तरह की कई कहानियां बयान करती एनवायटी की रिपोर्ट कहती है कि भारतीय अप्रवासियों की बड़ी आबादी परेशान है.

    ऐसी ही एक कहानी अटलांटा में सॉफ्टवेयर डेवलपर हरकमल सिंह की है, जिनकी नींद उड़ गई है. हरकमल का कहना है कि भले ही सरकार हमें बाहर न निकाले, लेकिन पहले ही ​अस्थिर जॉब मार्केट में उनका इमिग्रेशन स्टेटस कमज़ोर हो चुका था, जो अब भगवान भरोसे है. 'यह जॉब की नहीं, हमारे सपनों के बिखरने की बात है.' वहीं, न्यूजर्सी बेस्ड इमिग्रेशन वकील नंदिनी नायर के हवाले से लिखा गया है कि वैधानिक इमिग्रेशन समुदाय में कितना तनाव है, बताया नहीं जा सकता. एक ट्वीट से ऐसे ज़िंदगी खत्म की जा सकती है.

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    ट्रंप का ट्वीट और उस पर प्रतिक्रिया स्वरूप लगे नस्लभेद के आरोप.


    क्या कोर्ट में दी जा सकती है चुनौती?
    इमिग्रेशन कानून कंपनी में वकील राजीव खन्ना के हवाले से ईटी ने लिखा है कि जो अधिकार पहले ही मान्यता प्राप्त हैं, उन्हें वापस नहीं लिया जा सकता. कानून विशेषज्ञ मान रहे हैं कि ट्रंप के हस्ताक्षर किए गए आधिकारिक आदेश को कोर्ट में चुनौती दी जा सकेगी. एक और कानूनविद के हवाले से लिखा गया है कि उम्मीद है कि एक या एक से ज़्यादा अदालतें इस पर प्राथमिक निषेधाज्ञा जारी कर इसे रोक देंगी.

    अमेरिका-भारत संबंधों पर असर
    क्या ट्रंप के इस तरह के फैसले से भारत के साथ पिछले कुछ समय में बने सौहार्द्रपूर्ण संबंधों पर असर पड़ेगा? इमिग्रेशन समूहों की चेतावनी के तौर पर एनवायटी ने लिखा है कि इस तरह के फैसले से अमेरिका अपनी सबसे काबिल आबादी के साथ ही बहुसांस्कृतिक संपन्नता की धरोहर को भी खो सकता है. विश्लेषक भी मान रहे हैं कि हाल के वक्त में आपसी साझेदारी के ​जो रिश्ते दो प्रचारित लो​कप्रिय देशों के बीच बने हैं, उनमें दरार आ सकती है. दूसरी ओर, ट्रंप के इस ट्वीट के बाद सोशल मीडिया पर उन्हें नस्लभेदी भी कहा जा रहा है.

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