नेवी ने अचानक क्यों समुद्र में तैनात कर दिए बड़ी संख्या में जहाज?

नेवी ने अचानक क्यों समुद्र में तैनात कर दिए बड़ी संख्या में जहाज?
भारतीय नौसेना के लिए प्रतीकात्मक तस्वीर.

लद्दाख में चीन के साथ स्टैंडऑफ (India-China Stand-Off) के बीच ताज़ा खबरें हैं कि हिंद महासागर में भारतीय नौसेना (India Navy) ने अपने जहाज़ बड़ी संख्या में तैनात किए हैं. बात भले ही भारत की उत्तरी सीमा की हो, लेकिन चीन को जवाब देने के लिए ज़मीन और हवा ही नहीं बल्कि समुद्र में भी पूरी तैयारी की जा रही है. जानिए क्या है पूरा मामला.

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गलवान वैली (Galwan Valley) में 15 जून को हुई हिंसक झड़प में भारतीय जवानों के शहीद होने के बाद से भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव (India China Border Tension) के हालात बने हुए हैं. कई स्तरों पर बातचीत का दौर जारी रहने के बीच ताज़ा घटनाक्रम में हिंद महासागर (Indian Ocean) में भारतीय नेवी की ईस्टर्न और वेस्टर्न कमांड ने चीन को स्पष्ट 'संदेश' देने के लिए अपने बेड़े समुद्र में उतार दिए हैं. खबरों की मानें तो चीन तक ये 'संदेश' पहुंच भी गया है.

लद्दाख में अस्ल में, सीमाओं पर तनाव की स्थिति मई से ही नज़र आने लगी थी और तभी से भारतीय सेना (Indian Military) के तीनों अंग संयुक्त रूप से रणनीति बनाने में जुटे हैं. चूंकि चीन के साथ युद्ध की स्थिति में पाकिस्तान भी भारत पर हमले से नहीं चूकेगा इसलिए चीनी आक्रामक नज़रिये के मुकाबले के लिए आर्मी (Army), नेवी और एयरफोर्स (Air Force) के साथ ही रणनीतिकार व अर्थशास्त्री भी योजनाओं में हिस्सा ले रहे हैं.

एक तरफ, राफेल की भारत में आमद से चीन को संदेश पहुंचाए जा रहे हैं तो दूसरी तरफ समुद्री तैनाती से भी. भारत की ओर से समुद्र में जहाज़ उतारे जाने के पीछे क्या रणनीति है? इसके साथ ही ये भी जानना चाहिए कि भारतीय नेवी की आगामी योजनाएं क्या हो सकती हैं. साथ ही, ये भी नहीं भूलना चाहिए कि क्यों लद्दाख में लड़ाई के वक्त भारतीय नेवी की भूमिका अहम हो सकती है.



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चीन तक कैसे पहुंचा संदेश?
भारत समुद्री गतिविधि के ज़रिये जो संदेश चीन को पहुंचाना चाह रहा था, क्या वो पहुंच गया? इसके जवाब में रक्षा अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि बेशक चीन तक बात पहुंच गई है. हालांकि भारत का संदेश क्या था और कैसे पहुंचा, इस पर फिलहाल गोपनीयता बरती गई है. लेकिन समुद्र में भारत के जहाज़ उतरने से कुछ संकेत तो सीधे समझ में आते ही हैं.

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भारतीय नौसेना चीन के खिलाफ समुद्र में पूरी तैयार कर रही है.


चीन का बड़ा कारोबार समुद्र के ज़रिये होता है. मिडिल ईस्ट से पेट्रोलियम के साथ ही और भी कई चीज़ें हिंद महासागर से होकर गुज़रती हैं और बहुत लंबे रूट से होकर चीन पहुंचती हैं. यह वही क्षेत्र है, जो गुजरात से लेकर बंगाल की खाड़ी तक भारतीय समुद्र की बहुत बड़ी सीमा है. चीन को हमेशा इस बात का डर रहा है कि भारत उसके इस कारोबार में मलक्का स्ट्रेट को ब्लॉक कर सकता है.

क्या समुद्र में जंग के आसार हैं?
फिलहाल नहीं. खबरों की मानें तो भारतीय नेवी ने अब तक चीनी आर्मी या नौसेना की तरफ से किसी किस्म की ऐसी हरकत को स्पॉट नहीं किया है, जो असामान्य हो या सतर्क रहने की चेतावनी हो. ऑपरेशनल गोपनीयता के लिए भारतीय सेनाएं अभी कुछ सूचनाएं गुप्त रख रही हैं. भारत के समुद्री अपडेट भी कहा जा रहा है कि काफी समय बाद बताए गए हैं, हालांकि ये जहाज़ पहले ही तैनात कर दिए गए थे.

अंडमान कमांड की क्या हैं योजनाएं?
भारत की इकलौती ट्राइ-सर्विस कमांड के तौर पर अंडमान और निकोबार कमांड (ANC) भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वूपर्ण है. चूंकि यह मलक्का स्ट्रेट के पास भी है इसलिए भारत इस कमांड का ज़्यादा से ज़्यादा इस्तेमाल करने की रणनीति पर विचार करेगा. तैयारी के लिहाज़ से भारतीय वायुसेना ने जगुवार फाइटर विमानों को भी ANC के निकोबार एयरबेस पर पहुंचाया है.

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जंगी विमान राफेल का पहला बैच आज यानी 29 जुलाई को भारत पहुंच गया.


इस कमांड के ज़रिये भारतीय नौसेना के पास मलक्का स्ट्रेट पर वर्चस्व बनाने का पूरा मौका भी है और योग्यता भी. ये भी गौरतलब है कि इसी समुद्री क्षेत्र और इसके आसपास नेवी की ईस्टर्न कमांड ने अमेरिका के साथ मिलकर पहले बड़ा सैन्य अभ्यास किया था.

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समुद्र में कैसे बन रहा है युद्धक्षेत्र?
भारत की नौसैनिक गतिविधि के पीछे बड़ा कारण ये भी होने के संकेत मिल रहे हैं कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की नौसेना ने दक्षिण चीन समुद्र में बड़ी भारी तैनाती की थी. ये तब हुआ था, जब अमेरिका ने सीमाएं हथियाते जाने की चीन की रणनीति का विरोध किया था. जवाब में अमेरिका ने भी दक्षिण चीन समुद्र में उन देशों की मदद के लिए कई वॉरशिप तैनात किए थे, जिनकी सीमाओं को चीन से खतरा है.

इस पूरे घटनाक्रम के चलते अमेरिका और जापान जैसे मददगार देशों की नौसेनाओं के साथ कंधे से कंधे मिलाकर ऑपरेशनल साथ देने के इरादे से भारतीय नौसेना ने भी कमर कसी है. अब हालात ये हैं कि देश में राफेल फाइटर जेट वायुसेना के जंगी बेड़े में शामिल हो रहे हैं, नौसेना ने समुद्र में जंगी जहाज़ उतार दिए हैं, लद्दाख में भारतीय आर्मी की बड़ी तैनाती पहले ही हो चुकी है. चीन की तरफ से भी इसी तरह की तैनाती सीमाओं पर हो चुकी है. इस सबके बीच दोनों देश शांति के लिए बातचीत कर रहे हैं.
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