जानें क्‍यों दी जाने वाली थी महान चित्रकार लियोनार्डो दा विंची को मौत की सजा

जानें क्‍यों दी जाने वाली थी महान चित्रकार लियोनार्डो दा विंची को मौत की सजा
इटली के महान चित्रकार लियोनार्डो दा विंची के जीवन में एक समय ऐसा भी आया जब उन्‍हें मौत की सजा दी जाने वाली थी.

इटली के महान चित्रकार लियोनार्डो दा विंची (Leonardo da Vinci) ने पूरी जिंदगी किसी से शादी नहीं की थी. लेकिन, उनकी कई महिला मित्र थीं. इनमें बीट्राइस और इजाबेला नाम की दो बहनें भी थीं. लाइफ फ्रॉम बिगिनिंग में लिखा है कि उन्‍होंने इजाबेला की कई तस्वीरें बनाई थीं, जो वक्त के साथ खोती चली गईं.

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इटली के महान चित्रकार लियोनार्डो दा विंची (Leonardo da Vinci) के जीवन में एक समय ऐसा भी आया जब फ्लोरेंस (Florence) में उन्‍हें मौत की सजा (Capital Punishment) दी जाने वाली थी, लेकिन शायद उन्‍हें दुनिया को बहुत कुछ अनमोल देकर जाना था, इसलिए वो बच गए. दरअसल, 1476 में लियोनार्डो और उनके चार दोस्तों पर गैरकानूनी ढंग से यौनाचार का आरोप लगा. उस समय फ्लोरेंस में इसके लिए मौत की सजा का प्रावधान था.

लियोनार्डो की जीवनी 'लाइफ फ्रॉम बिगिनिंग' के मुताबिक, विंची को उस समय फ्लोरेंस की सबसे मशहूर तवायफ के साथ पकड़ा गया था. हालांकि, पर्याप्त गवाहों और सबूतों के अभाव में उन्हें बरी कर दिया गया. इटली में विंचीटाउन के अंचियानो गांव में 15 अप्रैल 1452 को जन्‍मे लियोनार्डो इस घटना के बाद दो साल तक किसी को कहीं भी नजर नहीं आए. उन्‍होंने पूरी जिंदगी किसी से शादी नहीं की थी. लेकिन, उनकी कई महिला मित्र थीं. इनमें बीट्राइस और इजाबेला नाम की दो बहनें भी थीं. लाइफ फ्रॉम बिगिनिंग में लिखा है कि उन्‍होंने इजाबेला की कई तस्वीरें बनाई थीं, जो वक्त के साथ खोती चली गईं.

विंची ने मिलान में खुद को फौजी मशीनरी का जानकार बताया
लियोनार्डो को चित्रकारी के साथ ही ही संगीत से भी गहरा लगाव था. उन्होंने 1482 में घोड़े के सिर के आकार का एक वाद्ययंत्र बनाया. इसे देख फ्लोरेंस के ड्यूक बहुत खुश हुए. उन्होंने वह वाद्ययंत्र मिलान के ड्यूक को तोहफे में भिजवाया. खुद लियोनार्डो इसे लेकर मिलान गए थे. मिलान में उन्‍होंने खुद को चित्रकार के बजाय फौजी मशीनरी के जानकार की तरह पेश किया. उनको लगता था कि इस तरह उन्हें मिलान में ऊंचा पद मिल सकता है. ड्यूक की नजरों में खुद को साबित करने के लिए लियोनार्डो ने जंगी मशीनों के कई चित्र बनाए, जिनमें दोनों तरफ तलवार लगे रथ, धातु के टैंक और बड़े धनुष शामिल थे. ड्यूक लियोनार्डो की कलाकारी से बहुत खुश हुए. इसके बाद लियोनार्डो ने अगले 17 साल मिलान में ही गुजारे.
मिलान के ड्यूक के सामने विंची ने खुद को चित्रकार के बजाय फौजी मशीनरी का जानकार बताकर पेश किया. इसके बाद उन्‍होंने वहां रहते हुए कई हथियारों के स्‍कैच बनाए.




मिलान में रहते हुए लियोनार्डो ने बनाई 'द लास्‍ट सपर' पेंटिंग
लियोनार्डो धीरे-धीरे लोकप्रिय होने लगे. उस समय ड्यूक कठपुतली शासक होते थे. शासन का पूरा नियंत्रण पोप और चर्च के हाथों में रहता था. इसलिए राजसंरक्षण पाने वाले कलाकारों को उसी तरह का काम करना होता था, जो धार्मिक होने के साथ-साथ चर्च को भी स्वीकार्य हो. इसी दौर में लियोनार्डो ने 'द लास्ट सपर' नाम की वह रचना पूरी की, जिसके लिए उन्हें हमेशा याद किया जाता रहेगा. इस पेंटिंग में ईसा मसीह अपने बारह शिष्यों के साथ सफेद चादर बिछी एक मेज पर रखा खाना खाते दिख रहे हैं. बताया जाता है कि जूडस नाम का वह अनुयायी भी इस भोज में शामिल था़ जिसने आगे चलकर ईसा मसीह को धोखा दिया. जीसस इस बात को जानते थे.

'द लास्‍ट सपर' में बिलकुल अकेले नजर आते हैं ईसा मसीह
बाइबिल के मुताबिक, जीसस लास्‍ट सपर के समय कहते हैं कि तुम लोगों में से कोई एक विश्वासघात करने वाला है. ये शब्द सुनकर उनके अनुयायियों में हलचल मच जाती है और वे इस पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रिया देते हैं. बताया जाता है कि इन्ही क्षणों की कल्पना करते हुए लियोनार्डो ने ये पेंटिंग बनाई. इसे बनाने में विंची को करीब तीन साल लगे. लास्ट सपर की खासियत यह है कि इसमें सभी अनुयायियों के चेहरे और भावभंगिमाएं स्पष्ट दिखाई देती हैं. वे एकदूसरे के नजदीक और ईसा मसीह से दूर हैं. पेंटिंग के बीच में ईसा मसीह हैं, जो अपने अनुयायियों से घिरे हुए हैं. इसके बाद भी वह बिलकुल अकेले दिखते हैं. विंची ने पेंटिंग में दिखाया कि जब ईसा मसीह विश्‍वासघात की बात करते हैं तो उनके सभी आपस में बातचीत करने लगते हैं और ईसा मसीह अकेले रह जाते हैं.

पेंटिंग के बीच में ईसा मसीह हैं, जो अपने अनुयायियों से घिरे हुए हैं. इसके बाद भी वह बिलकुल अकेले दिखते हैं.


मिलाना छोड़ने के बाद 1503 में शुरू की 'मोनालिसा' की पेंटिंग
लियोनार्डो 'द लास्ट सपर' के बाद भी ड्यूक की पसंद की पेंटिंग्‍स बनाते रहे. जब 1499 में जंग के दौरान फ्रांस की सेना मिलान में घुसी तो ड्यूक और उनके परिवार के साथ लियोनार्डो ने भी शहर छोड़ दिया. मिलान छोड़ने के चार साल बाद 1503 में उन्‍होंने रहस्यमयी मुस्कान वाली रहस्यमयी महिला 'मोनालिसा' की पेंटिंग बनाना शुरू किया. इस पेंटिंग ने लियोनार्डो को अमर कर दिया. बता दें कि बचपन में लियोनार्डो घर के नजदीकी जंगल में घूमते रहते थे और पक्षियों से लेकर झरनों तक की तस्वीरें बनाकर अपने साथ रख लेते थे. कुछ साल बाद जब उनके पिता को यह बात पता चली तो बेटे के हुनर को समझते हुए उन्होंने लियोनार्डो को फ्लोरेंस के सबसे मशहूर चित्रकार और मूर्तिकार वेरोचियो के पास भेज दिया.

विंची के अंतिम शब्‍द थे, 'मैं समस्‍त मानव जाति का गुनहगार हूं'
लियोनार्डो की चित्रकारी की शिक्षा 20 वर्ष के होते-होते पूरी हो चुकी थी. इसके बाद उन्होंने अपने उस्ताद वेरोचियो के साथ जीसस क्राइस्ट के बैप्टिज्म की तस्वीर बनाई. यह तस्वीर वेरोचियो के जीवन की सबसे बेहतरीन पेंटिंग थी. इसे बनाने में लियोनार्डो ने ऑयल पेटिंग की जिन तकनीकों का सहारा लिया उसे पहले किसी दूसरे चित्रकार ने इस्तेमाल नहीं किया था. अपने शागिर्द का हुनर देखकर वेरोचियो ने हमेशा के लिए कूची नीचे रख दी और चित्रकारी से संन्यास ले लिया. इस तरह लियोनार्डो फ्लोरेंस में एक शानदार चित्रकार के रूप में पहचाने जाने लगे. एक से एक बेहतरीन पेंटिंग्‍स बनाने के बाद 2 मई 1519 को इटली के इस महान चित्रकार का फ्रांस में निधन हो गया. 'लाइफ फ्रॉम बिगिनिंग' के मुताबिक, उनके अंतिम शब्द थे, 'मैं ईश्वर और समस्त मानवजाति का गुनहगार हूं. मेरा काम गुणवत्ता के उस स्तर तक नहीं पहुंच पाया जहां उसे पहुंचना चाहिए था.'

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