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न्यूयार्क में क्यों बुलेट ट्रेन सरीखी स्पीड से बढ़ रहा है कोरोना?

News18India
Updated: March 25, 2020, 5:47 PM IST
न्यूयार्क में क्यों बुलेट ट्रेन सरीखी स्पीड से बढ़ रहा है कोरोना?
अमेरिका बन रहा है कोरोना वायरस संक्रमण का नया केंद्र.

चीन, दक्षिण कोरिया, इटली और ईरान के बाद अब अमेरिका कोरोना वायरस संक्रमण का नया केंद्र बन रहा है. अमेरिका में भी न्यूयॉर्क शहर तेज़ी से इसकी चपेट में आ रहा है. डब्ल्यूएचओ की मानें तो अमेरिका में सैकड़ों या हज़ारों और मौतें हो सकती हैं. क्या आप जानते हैं कि इसके पीछे कारण क्या हैं?

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  • Last Updated: March 25, 2020, 5:47 PM IST
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कोरोना वायरस (Corona Virus) जनित कोविड 19 (Covid 19) की चपेट में अमेरिका (United States) बुरी तरह से आ चुका है और अमेरिका में न्यूयॉर्क (New York) बेहद तेज़ी के साथ इस संक्रमण का केंद्र बनकर उभर रहा है. न्यूयॉर्क के गवर्नर एंड्रयू क्योमो ने बेहद चिंता ज़ाहिर करते हुए कहा है कि सिर्फ दो हफ्तों के भीतर न्यूयॉर्क में 40 हज़ार लोगों के आईसीयू (ICU) में भर्ती होने की नौबत आ सकती है. लेकिन सवाल यह है कि हालात इतने खराब हो कैसे गए?

अस्ल में, कोरोना वायरस (Coronavirus) संक्रमण के अमेरिका में कुल मामलों के एक तिहाई से ज़्यादा न्यूयॉर्क में सामने आए हैं और वह भी बहुत तेज़ी के साथ. एक आंकड़े के अनुसार यहां हर हज़ार लोगों में से एक कोविड 19 से पीड़ित है. न्यूयॉर्क के गवर्नर ने इस संक्रमण के फैलने की रफ्तार को बुलट ट्रेन (Bullet Train Speed) की रफ्तार से कम्पेयर करते हुए कहा कि हालात बेहद नाज़ुक हैं और न्यूयॉर्क के लिए उन्होंने काफी बड़े बजट की भी की है.

जानिए कि न्यूयॉर्क में संक्रमण इतनी तेज़ी से फैलने के पीछे वजहें क्या रहीं. लोग कितने ज़िम्मेदार रहे और प्रशासन कितना? ये भी जानें कि किन बातों को नज़रअंदाज़ न किया गया होता तो क्या होता.

एनवायसी (NYC) का खराब रवैया



गार्जियन की एक रिपोर्ट की मानें तो न्यूयॉर्क के गवर्नर ने लोगों से सोशल डिस्टेंसिंग की अपील समय रहते की थी लेकिन लोगों ने बात नहीं मानी. गवर्नर क्योमो के हवाले से लिखा गया है कि शहर ने असंवेदनशील और एरोगेंट ढंग से बर्ताव किया और बात नहीं मानी. समय रहते सड़कों को खाली किया जा सकता था और ट्रैफिक को बंद किया जा सकता था लेकिन ऐसा हुआ नहीं.

लोगों ने खुलकर किया सेलिब्रेशन
बिज़नेस इनसाइडर की एक रिपोर्ट कहती है कि न्यूयॉर्क, बॉस्टन और कुछ अन्य शहरों के लोगों ने तमाम हिदायतों को दरकिनार कर कोरोना वायरस के खतरे को समझा नहीं. 14 और 15 मार्च के वीकेंड पर इन शहरों में सेंट पैट्रिक डे के सेलिब्रेशन को बजाय टालने के धूमधाम से मनाया गया और बड़ी संख्या में लोग जुटे.

सबसे ज़्यादा टेस्ट न्यूयॉर्क में
इंटैलिजेंसर की एक रिपोर्ट की मानें तो न्यूयॉर्क में कोविड 19 के मामले इसलिए भी इतने बढ़े क्योंकि यहां सबसे ज़्यादा टेस्ट किए गए. सोमवार तक 78 हज़ार से ज़्यादा टेस्ट किए जा चुके थे और जारी थे. क्योमो के हवाले से रिपोर्ट कहती है कि कैलिफोर्निया में 26 हज़ार से कुछ ज़्यादा टेस्ट के मुकाबले ये टेस्ट बहुत ज़्यादा रहे.

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न्यूयॉर्क में लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग जैसे कदम सख्ती से उठाने में देर की गई.


क्या वेंटिलेटर कम हैं?
न्यूयॉर्क के स्वास्थ्य सेवाओं के पूरे ढांचे पर कोरोना वायरस के मामलों ने सवालिया निशान खड़ा कर दिया. वैश्विक महामारी से निपटने को लेकर किसी किस्म की तैयारी सामने नहीं आई. मीडिया में आ रही रिपोर्टों के मुताबिक गवर्नर क्योमो और शहर के मेयर लगातार वेंटिलेटरों की मांग कर रहे हैं. अल जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार गवर्नर का अनुमान है कि 20 हज़ार वेंटिलेटरों तक की ज़रूरत पेश आ सकती है और शहर के पास सिर्फ 7 हज़ार वेंटिलेटर ही हैं.

अस्पतालों में पूरी सुविधाएं नहीं
न्यूयॉर्क के गवर्नर ने कहा है कि राज्य में 1 लाख 40 हज़ार अस्पताली बिस्तरों की ज़रूरत पड़ सकती है जबकि शहर में अभी सिर्फ 53 हज़ार अस्पताली बिस्तर ही मौजूद हैं. इसके अलावा रिपोर्टों की मानें तो गवर्नर ने अस्पतालों को अपनी क्षमता 50 फीसदी बढ़ाने के निर्देश हाल में दिए थे. ये तमाम बातें ज़ाहिर करती हैं कि न्यूयॉर्क के अस्पतालों में महामारी से निपटने के लिए पूरी तैयारी नहीं थी.

हेल्थकेयर ढांचे की पोल खुली
न्यूयॉर्क में तीन दिनों में पॉज़िटिव मरीज़ों की संख्या दोगुनी हो जाने के बाद शहर के हेल्थकेयर ढांचे की पोल खुलने लगी है. एक तरफ, अमेरिकी संसद देश के लिए फंड जारी करने का विधेयक पास करने में देर कर रही है और दूसरी तरफ, कई चेतावनियों को दरकिनार किए जाने की बातें भी सामने आ रही हैं.

अस्ल में, वॉशिंगटन पोस्ट में​ दिसंबर 19 में एक लेख न्यूयॉर्क की स्वास्थ्य अधिकारी सायरा मदद ने लिखा था, जिसका शीर्षक था 'वैश्विक महामारी से हमें बचाने वाला प्रोग्राम दम तोड़ने को है'. इस लेख में शहर के स्वास्थ्य सेवाओं के ढांचे और बराक ओबामा के कार्यकाल में शुरू किए गए स्वास्थ्य कार्यक्रम को नये फंंड और मंज़ूरियां न मिलने की बात कही गई थी. इंटेलिजेंसर की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इस चेतावनी भरे लेख से कोई सबक नहीं लिया गया.

समय पर नहीं उठाए गए सख्त कदम
न्यूयॉर्क में शायद खतरा इस कदर न बढ़ता, अगर समय रहते सख्त कदम उठा लिये गए होते. इंटेलिजेंसर की ही रिपोर्ट कहती है कि यात्राएं प्रतिबंधित करने जैसे सख्त कदम नहीं उठाए गए जबकि विशेषज्ञों ने हिदायतें दी थीं. सोशल डिस्टेंसिंग, क्वारैन्टीन जैसे कदमों को भी सख्ती से लागू करवाने में प्रशासन नाकाम रहा.

न्यूयॉर्क में कोविड 19 के आंकड़े और हालात
ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक न्यूयॉर्क में 25 हज़ार से ज़्यादा इस संक्रमण के मामले सामने आ चुके हैं और 210 से मौतों की खबर है. इंटैलिजेंसर की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका में संक्रमण के कुल मामलों के आधे से ज़्यादा न्यूयॉर्क में सामने आ चुके हैं और देश में इससे हुई कुल मौतों में से 33 फीसदी न्यूयॉर्क में ही हुई हैं.

प्रति व्यक्ति कोरोना वायरस के मामलों की दर देखी जाए तो न्यूयॉर्क में सामने आए मामले इटली से भी ज़्यादा हैं. इसे आप ऐसे भी समझ सकते हैं कि न्यूयॉर्क अगर एक स्वतंत्र देश होता तो यहां कोविड 19 के मामले इटली, ईरान, चीन, स्पेन और जर्मनी को छोड़कर दुनिया के बाकी सभी देशों से ज़्यादा हैं.

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First published: March 25, 2020, 5:47 PM IST
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