भारत पर हमला करने वाले 'खलनायकों' के नाम पर क्यों हैं पाकिस्तानी मिसाइलों के नाम?

पाकिस्तानी मिसाइलों का बेड़ा.
पाकिस्तानी मिसाइलों का बेड़ा.

भारत-चीन के बीच भड़की आग (India-China Tension) में पाकिस्तान अपने रोटियां सेकने में लगा है. पिछले 70 साल छोड़ दें तो भारत के साथ सदियों का इतिहास साझा करने वाले पाकिस्तान ने हथियारों (Pakistan Arms & Ammunition) के लिए गज़नवी, ग़ौरी, तैमूर जैसे नाम क्यों चुने?

  • News18India
  • Last Updated: October 7, 2020, 2:33 PM IST
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पाकिस्तान और चीन के साथ साझा होने वाली भारत की सीमाओं (Indian Borders) पर हालात तकरीबन हमेशा ही नाज़ुक रहे हैं. अब भी बने हुए हैं. हथियारों की होड़ (Arms Race) में भी भारत और पाकिस्तान चिर प्रतिद्वंद्वी (India vs Pakistan) हैं. सभी जानते हैं कि दोनों ने एक दूसरे के खतरे के चलते ही परमाणु ​ताकत (Nuclear Power) का विकास किया है. भारत के लिए पाकिस्तान और चीन दो प्रमुख निशाने रहे हैं जबकि पाकिस्तान के लिए खास तौर पर सिर्फ भारत. ऐसे में पाकिस्तान के हथियारों या जंग से जुड़े हर पहलू का रिश्ता भारत से जुड़ना स्वाभाविक ही है.

ताज़ा मिसाल यह है कि भारत और चीन के बीच सीमाओं पर तनाव के हालात हैं, तो आग में घी डालने के लिए पाकिस्तान मौका नहीं चूक रहा. इस मौके का फायदा उठाकर चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के बूते पाकिस्तान कब्ज़े वाले कश्मीर (PoK) में सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों की साइटें बनाने में जुटा हुआ है. यह कदम भारत पर दोहरी मार करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है.

पाकिस्तान लगातार मिसाइलों को लेकर भारत के साथ होड़ में रहा है. अब तक तकरीबन हर तरह की मिसाइल अपने बेड़े में शामिल कर चुका पाकिस्तान आखिर मिसाइलों के नाम रखते वक्त क्या सोचता है? क्या कभी आपने सोचा है कि कुछ अहम पाकिस्तानी मिसाइलों के नाम उन नामों पर क्यों हैं, जो भारत के इतिहास में 'खलनायक' के तौर पर समझे जाते हैं?



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पाकिस्तान की गज़नवी मिसाइल.


गज़नवी मिसाइल : सतह से सतह पर मार करने वाली बैलेस्टिक मिसाइल का नाम तुर्क मूल के उस हमलावर (मेहमूद गज़नवी) के नाम पर है, जिसने भारत पर 17 बार हमला किया और सोमनाथ के मंदिरों को पूरी तरह लूटकर बर्बाद किया.

ग़ौरी मिसाइल : सतह से सतह वाली बैलेस्टिक मिसाइल उस हमलावर (मोहम्मद ग़ौरी) के नाम पर है, जिसने 1192 में भारत में हिंदू राजा पृथ्वीराज चौहान के राज्य पर हमला किया था. कुतुबुद्दीन ऐबक उसी का गुलाम था, जिसने भारत के कुछ हिस्सों को जीतकर दिल्ली सल्तनत यानी भारत में पहले इस्लामी साम्राज्य की स्थापना की.

बाबर मिसाइल : मीडियम रेंज वाली सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल का नाम मध्य एशिया से भारत पहुंचे और लोदी वंश को हराकर मुगल सल्तनत की स्थापना करने वाले ज़हीरुद्दीन मोहम्मद बाबर के नाम पर रखा गया है. बाबर इकलौता बाहरी शासक रहा, जिसकी पुश्तों ने भारत को लूट की नहीं बल्कि बसने की जगह समझा.

अब्दाली मिसाइल : छोटी रेंज की सुपरसोनिक बैलेस्टिक मिसाइल का नाम 18वीं सदी के उस अफगानी हमलावर (अहमद शाह अब्दाली) के नाम पर है, जिसने भारत के मराठा साम्राज्य के खिलाफ हमला बोला था और पानीपत की तीसरी ऐतिहासिक लड़ाई लड़ी थी. इस हमलावर ने भारत पर 7 बार आक्रमण किया था.

तैमूर मिसाइल : माना गया है कि पाकिस्तान 7000 किलोमीटर रेंज वाली यानी अन्य महाद्वीपों तक मार कर सकने वाली मिसाइल विकसित कर रहा है. हालांकि इसे लेकर कई सवाल रहे हैं, लेकिन इसका नाम फिर एक तुर्की शासक (तैमूर लंग) के नाम पर रखा गया, जिसने 14वीं सदी में दिल्ली में कत्ले आम को अंजाम दिया था.

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इनके अलावा, इतिहास से कुछ और ऐसे नाम छांटे जाएं, जो भारत के नज़रिये से नायक नहीं रहे, तो पाकिस्तानी जंगी बेड़े में वो भी मिलते हैं. जैसे 8वीं सदी में सिंध को जीतने वाले अरबी कमांडर मोहम्मद बिन कासिम के नाम पर सिंध प्रांत में एक पाकिस्तानी बंदरगाह है. वहीं, पाकिस्तानी के एक जंगी जहाज़ का नाम क्रूर बादशाह कहे जाने वाले औरंगज़ेब की उपाधि के नाम पर 'आलमगीर' है.

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पाकिस्तानी मिसाइल शाहीन.


अब सवाल ये है कि मिसाइलों के साथ ही अन्य हथियारों आदि के नाम पाकिस्तान क्या सोचकर चुनता है. इतिहास की नज़र से ये तो हम समझ ही चुके हैं कि इनके नाम सीधे तौर पर भारत के खिलाफ हैं, लेकिन इसके पीछे क्या नज़रिया है? और क्या ज़ाहिर होता है? यह समझना चाहिए.

घुसपैठ : हमलावरों के नाम पर हथियारों के नाम रखने का सबसे अहम और सीधा अर्थ यही है कि भारत की ज़मीन पर पाकिस्तान बुरी नीयत रखता है. घुसपैठ करने के लिए हमले करना चाहता है. सीमाएं और भूभाग कब्ज़ाना चाहता है.

ईगो : अस्त्रों के नाम इस तरह के किरदारों पर रखने से धर्म के आधार पर बनने की पहचान रखने वाले देश के अहम को संतुष्टि देती है, जैसा कि प्रतीक जोशी के लेख में इशारा है.

भूगोल : इतिहास में अपने नज़रिये से इन नामों को 'नायक' के तौर पर ज़ाहिर करने वाला पाकिस्तान भूगोल संबंधी भी नज़र दर्शाता है. ये तमाम हमलावर मध्य पूर्व से खैबर पास से होते हुए गंगा और सिंध के उपजाउ इलाके तक पहुंचे और फिर भौगोलिक महत्व की ज़मीन के लालच में हमले किए.

विदेश/रक्षा नीति : एक और अहम पहलू यह है कि पाकिस्तान की विदेश और रक्षा नीति पूरी तरह से 'भारत केंद्रित' रही है और है. भारत पर एक मनोवैज्ञानिक या मानसिक हमले के मंसूबे के चलते भी पाकिस्तान इस तरह की चालें चलता है.

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धार्मिक मान्यताओं की थ्योरी क्या है?
पाकिस्तानी मिसाइलों के जो नाम बताए गए हैं, उन्हें इस्लामी मज़हब या कल्चर से जोड़कर देखना मुनासिब नहीं है. लेकिन पाकिस्तान की दूसरी मिसाइलों या हथियारों के नाम ज़रूर इस संदर्भ में देखे जा सकते हैं. जैसे पैगंबर मोहम्मद की तलवार का नाम था जुल्फिकार या मोहम्मद के ही सिपेहसालार रहे तलहा के नाम पर पाक के हथियारों के नाम धार्मिक मान्यताओं का आधार रखते हैं. इसके अलावा, अबाबील, शाहीन, शमशीर और नस्र जैसे नामों को भी इस परिभाषा में माना जा सकता है.

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भारत की अग्नि सीरीज़ की मिसाइल.


भारत का नज़रिया क्या है?
'हत्फ' अरबी शब्द है, जिसका मतलब प्रतिहिंसा या बदले की भावना से होता है और इस नाम की मिसाइलों से पाकिस्तान का नज़रिया साफ है. लेकिन भारत का नज़रिया ऐसा नहीं रहा है. रक्षा नीति के मामले में भारत के लिए भी पाकिस्तान और चीन का खासा महत्व रहा है, उसके बावजूद भारत की मिसाइलों या अन्य हथियारों के नाम ऐसी नफरत, हिंसा या दुर्भावना को बढ़ावा नहीं देते.

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शांतिप्रिय देश की छवि रखने वाले भारत ने जब 1974 में सफल परमाणु परीक्षण किया था, तब भी उस ऑपरेशन का नाम 'स्माइलिंग बुद्ध' रखा था. 'बुद्ध जयंती' के दिन ही परीक्षण हुआ था और इस तरह हथियारों के ज़रिये भी भारत ने हमले, घुसपैठ या नफरत का नहीं बल्कि आत्मरक्षा और शांति का संदेश दुनिया को दिया था.
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