पाकिस्तान चाहे जो कर ले FATF की ग्रे लिस्ट में ही बना रहेगा, क्यों?

न्यूज़18 इलस्ट्रेशन
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एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट (FATF Grey List) से निकलने के लिए छटपटा रहे पाकिस्तान ने अमेरिका की कृपा पाने की कवायद की है तो दूसरी तरफ मुस्लिम वर्ल्ड (Muslim World) में भी हाथ जोड़े हैं, लेकिन पाक को साथ मिलने की गुंजाइश कितनी है?

  • News18India
  • Last Updated: October 13, 2020, 3:38 PM IST
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आगामी 21 और 23 अक्टूबर को वित्तीय एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की बैठकें होंगी, जो पाकिस्तान के भविष्य और नज़रिये से बेहद अहम होंगी. असल में पाकिस्तान (Pakistan Crisis) लगातार इस फोर्स की ग्रे लिस्ट में बना हुआ है और उसके सामने ब्लैक लिस्ट (Black List) होने का खतरा भी खड़ा है. इन बैठकों में अमेरिका का रवैया (US Support Pakistan) बहुत कुछ तय करेगा कि पाकिस्तान इस लिस्ट से मुक्त हो सकेगा या नहीं. पाकिस्तान को इस लिस्ट से बाहर आना है, लेकिन यह कैसे मु​मकिन होगा? क्या अमेरिका के सपोर्ट ये संभव होगा?

वास्तव में, आतंकवादी गतिविधियों (Terrorism) के खिलाफ कारगर कदम न उठाने वाले देशों को FATF ग्रे और ब्लैक लिस्ट में रखता है. ग्रे लिस्ट में रखने का मतलब गंभीर चेतावनी है और ब्लैक लिस्ट में आते ही अंतरराष्ट्रीय स्तर से जो वित्तीय मदद देशों को मिलती है, वो खासी प्रभावित होती है. पाकिस्तान ने ग्रे लिस्ट से मुक्त होने के लिए अमेरिका की सबसे बड़ी निगोसिएशन फर्म को हायर किया है. भारत ने तो साफ कह दिया है कि पाक की यह चाल काम नहीं आएगी. जानिए कि कैसे पाक के सामने मुश्किल बहुत बड़ी है.

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पाकिस्तान को चाहिए भारी सपोर्ट
ग्रे लिस्ट से निकलने के लिए पाक को 12 सदस्य देशों का सपोर्ट चाहिए, जिसमें अमेरिका का रवैया बेहद अहम होने वाला है. लेकिन, पाक इस लिस्ट से बाहर निकल पाए, इसकी संभावनाएं कितनी कम हैं, आप समझ सकते हैं क्योंकि उसके पास अभी सिर्फ चीन, तुर्की और मलेशिया तीन देशों का ही सपोर्ट है. ब्लैक लिस्ट में पाक को न डाला जाए, इसके लिए पाक को तीन देशों का सपोर्ट चाहिए.

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पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान.


इन कठिन हालात में, एक तरफ पाकिस्तान FATF के 39 सदस्यों में से सऊदी अरब जैसे अपने संभावित सहयोगियों का दरवाज़ा खटखटा रहा है. तो दूसरी तरफ, अमेरिका का मुंह ताक रहे पाक ने लिंडेन स्ट्रैटजीज़ फर्म को हायर किया है ताकि ट्रंप प्रशासन को अपने पक्ष में कर सके. ये भी देखिए कि यह फर्म क्या और कैसे काम करती है.

क्या है Linden Strategies फर्म?
अपनी वेबसाइट पर इस फर्म ने लिखा है कि यह सरकार के साथ संबंधों और व्यावसायिक विकास के लिए काम करती है. साथ ही, रणनीतिक तौर विश्लेषण और सलाह आदि देती है. इस फर्म के कामकाज का दायरा केवल अमेरिकी नहीं, बल्कि दुनिया भर के क्लाइंटों का है. इस फर्म का दावा है कि इसके पास ऐसे विशेषज्ञ हैं, जिन्हें सरकार और व्यवसाय संबंधी काफी अनुभव है.

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इस फर्म की टैगलाइन कहती है 'जटिल समस्याएं, अनूठी रणनीतियां, कारगर नतीजे'. यह फर्म राजनीतिक मशविरों के साथ ही बिज़नेस संबंधी सलाहें देती है. इस फर्म की शरण में पहुंचे पाकिस्तान को क्या यह फर्म बचा पाएगी?

क्यों ग्रे लिस्ट में ही रह सकता है पाक?
महत्वपूर्ण बात ये है कि 2019 में आपसी मूल्यांकन पर आधारित रिपोर्ट में कहा गया कि पाकिस्तान को अभी काफी कुछ सकारात्मक नतीजे लाना है और सभी 27 पॉइंट्स पर खरा उतरना है. विशेषज्ञों के हवाले से खबरें कह रही हैं कि FATF की ग्रे लिस्ट से बाहर निकलने के लिए कर्ज़ के बोझ तले दबे पाकिस्तान ने बीते अगस्त महीने में ही करीब 88 आतंकी समूहों पर प्रतिबंध जारी किए थे.

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FATF में पाकिस्तान को अमेरिका का सपोर्ट मिलना मुश्किल है.


जिन संगठनों और उनके सरगनाओं पर पाकिस्तान ने प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की, उनमें जमात उद दावा के हाफिज़ सईद, जैश ए मोहम्मद के प्रमुख मसूद अज़हर और दाउद इब्राहिम के नाम शामिल थे. आतंकवाद को फंडिंग और मनी लांड्रिंग के खिलाफ पाकिस्तान ने कितने कारगर कदम उठाए, इसके बारे में FATF की आगामी बैठकों में चर्चा होगी और तय होगा कि पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट से निकाला जाए या रखा जाए.

क्या सपोर्ट करेगा अमेरिका?
इस पूरी रामायण का आखिरी सवाल यही है कि पाकिस्तान की इतनी कवायद क्या काम आएगी? क्या FATF बैठक में अमेरिका उसका सपोर्ट करेगा? इस सवाल के जवाब में विशेषज्ञ मान रहे हैं कि चूंकि पाकिस्तान पिछले कुछ समय एक तरह से चीन की गोद में बैठा हुआ है इसलिए अमेरिका का रुख सख्त हो सकता है.

चीन का बीआरआई प्रोजेक्ट हो या चीन पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर की बात हो, पाकिस्तान एक तरह से अपनी चाबी चीन को दे बैठा है, ऐसे में अमेरिका का सपोर्ट मिलना किसी न किसी बड़े समझौते के तहत ही संभव हो पाएगा. दस दिन बाद खुलासा हो जाएगा कि पाक की कवायद कितनी और कैसे रंग लाएगी. रंग लाएगी भी या नहीं!
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