जानिए जनहित याचिकाओं से कितना गहरा नाता है वकील प्रशांत भूषण का

जानिए जनहित याचिकाओं से कितना गहरा नाता है वकील प्रशांत भूषण का
प्रशांत भूषण ने 500 से अधिक जनहित याचिकाओं में पैरवी की है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

प्रशांत भूषण (Prashant Bhushan) को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने अवमानना का दोषी पाया है, उनका जनहित याचिकाओं (PIL) से बहुत गहरा नाता रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 14, 2020, 7:23 PM IST
  • Share this:
जाने माने वकील प्रशांत भूषण (Prashant Bhushan) को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने अपनी अवमानना (Contempt) का दोषी पाया है. उनकी सजा का ऐलान 20 अगस्त को होगा. पिछले कुछ सालों से प्रशांत भूषण न्यायपालिका में भ्रष्टाचार (Corruption in judiciary) के खिलाफ आवाज उठाने के अलावा आमआदमी पार्टी (AAP) में अपनी सक्रियता को लेकर भी चर्चित थे. लेकिन वे अपनी 500 अधिक जनहित याचिकाओं (Public Interest Litigation) के लिए ज्यादा जाने जाते हैं.

भूषण के रुचि के विषय
एक आईआईटी ड्रॉपआउट होने के बाद प्रशांत भूषण ने अमेरिका से अर्थशास्त्र की पढ़ाई की और फिर इलाहबाद यूनिवर्सिटी से कानूनी पढ़ाई कर वकील बन गए. लेकिन उनकी दिलचस्पी जनसक्रियता और लोकहित में ज्यादा थी. यहां उन पर उनके पिता का प्रभाव दिखाई देता है. जो खुद एक बड़े वकील और जनसक्रियता से जुड़े कानूनविद थे. भूषण की प्रमुख दिलचस्पी मानव अधिकार, पर्यावरण संरक्षण और लोकसेवकों की जवाबदेही जैसे विषयों में रही है. बाद में वे न्यायपालिका में सुधार और उसमें भ्रष्टाचार  संबंधी मामलों की वजह से ज्यादा चर्चा में रहे.

इन मामलों में दिखी ज्यादा सक्रियता
जल्दी ही वे जनहित याचिकाओं वाले मामलों में प्रमुखता से दिखाई देने लगे. 1990 के दशक में उन्हें कई मामलों में निराशा मिली, लेकिन बाद में वे ज्यादा संवेदनशील जनहित मामलों की पैरवी करते दिखाई दिए जिनमें लोकसेवकों और न्यायसेवकों से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले ज्यादा रहे.



विविधता भी रही उनकी याचिकाओं में
हाल ही में वे एक याचिका की पैरवी करते दिखे जिसमें याचिका कर्ता ने मांग की थी कि जिस तरह न्यायपालिका में कोलेजियम जैसी व्यवस्था है, उसी तरह से चुनाव आयोग में व्यवस्था होनी चाहिए. भूषण ने रोहिंग्या मामले में भी एक जनहित याचिका की पैरवी की है. इस मामले में उन्होंने एक रोहिंग्या शरणार्थी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई रोकने के लिए उन्होंने कोर्ट में पैरवी की थी. हालाकि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 7 रोहिंग्या शरणार्थियों को निर्वासित करने के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था.

Supreme Court, Prashant Bhushan, tweet, contempt of court
प्रशांत भूषण पर साल 2009 में भी मामला दर्ज हुआ था. (Photo- PTI)


सुप्रीम कोर्ट तक ने उठाए उनपर ऐसे सवाल
भूषण एक गैर सरकारी संगठन सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (CPIL) से जुड़े हैं. उनकी सक्रियता पर सुप्रीम कोर्ट तक ने साल 2016 में सवाल उठाते हुए एनजीओ की ओर से जनहित याचिका दायर करने के तरीके पर आपत्ति जताई थी. जस्टिस लोया मामले में भी प्रशांत भूषण की भूमिका पर जनहित याचिकाओं के दुरुपयोग पर सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी झेली थी.

कौन हैं गगनदीप गंभीर जो सुशांत केस की जांच करने वाली CBI टीम में हैं शामिल

कोरोना काल में भी याचिका
हाल ही में कोरोना संकट के दौरान लॉकडाउन में फंसे मजदूरों को सुरक्षित घर पहुंचवाने के लिए भी उन्होंने एक जनहित याचिका दायर की थी. यह भी कहा जाता है कि उन्होंने आम आदमी पार्टी से जुड़ने के बाद सरकारी मामलों के विरोध में जनहित याचिकाएं ज्यादा दायर की है. चाहे राफेल का मामला हो या फिर सीबीआई का यहां भी भूषण की मौजदूगी सक्रिय तौर पर दिखाई दी.

जजों को देने पड़ा था संपत्ति का ब्यौरा
साल 2009 में उन्होंने कार्यकर्ता सुभाष चंद्र अग्रवाल की उस याचिका की पैरवी की जिसमें मांग की गई थी कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के न्यायाधीशों को आरटीआई के दायरे में जाए. इसके बाद न्यायाधीशों ने अपने संपत्ति का ब्यौरा इंटरनेट पर दिया था.

PRASHANT BHUSHAN
प्रशांत भूषण देश के जाने-माने वकील हैं. लेकिन अक्सर अपने बयानों और टिप्पणियों के कारण विवादों में भी रहते आए हैं


ये चर्चित मामले भी
उनके जनहित याचिकों में, पेप्सी और कोकाकोला जैसी कंपनियों के अपने पेय पदार्थों को लेकर दी जानी वाली चेतावनी न देने और गुमराह करने वाले विज्ञापनों के खिलाफ याचिका, साल 2011 में सीवीसी में पीजे थॉमस की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका, जैसे कई मामले शामिल हैं.

जानिए IAF ऑफिसर गुंजन सक्सेना के बारे में, पहली महिला जिसे मिला शौर्य चक्र

खुद प्रशांत का कहना है कि उन्होंने 500 से ज्यादा जनहित याचिका दायर की हैं. न्यायपालिका संबंधी जनहित मामलों में उनकी सफलता उल्लेखनीय है, जिसमें 2जी स्कैम और राडिया टेप मामले शामिल हैं.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज