महाराष्ट्र में अब सबसे अहम होगी प्रोटेम स्पीकर की भूमिका, जानें वजह

प्रोटेम स्पीकर, चुनाव के बाद पहले सत्र में स्थायी अध्यक्ष या उपाध्यक्ष के चुने जाने तक संसद का कामगाज स्पीकर के तौर पर चलाता है यानि संसद का संचालन करता है.
प्रोटेम स्पीकर, चुनाव के बाद पहले सत्र में स्थायी अध्यक्ष या उपाध्यक्ष के चुने जाने तक संसद का कामगाज स्पीकर के तौर पर चलाता है यानि संसद का संचालन करता है.

प्रोटेम स्पीकर (Protem Speaker)चुनाव के बाद पहले सत्र में स्थायी अध्यक्ष या उपाध्यक्ष के चुने जाने तक सदन का कामगाज स्पीकर के तौर पर चलाता है यानि सदन का संचालन करता है. सीधे कहें तो यह कामचलाऊ और अस्थायी स्पीकर होता है. बेहद कम वक्त के लिए इन्हें चुना जाता है.

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  • Last Updated: November 26, 2019, 1:33 PM IST
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मुंबई. महाराष्ट्र (Maharashtra) के हाईवोल्टेज सियासी ड्रामे के बीच सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने भारतीय जनता पार्टी और अजित पवार को सदन में बहुमत साबित करने के लिए कहा है. कोर्ट ने कहा है कि 27 नवंबर शाम पांच बजे से पहले विधायकों का शपथ लेना अनिवार्य है. साथ ही कोर्ट ने कहा है कि प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति भी का जाए. दोनों पक्षों के बीच मचे घमासान के में अब प्रोटेम स्पीकर की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है. अब ये देखना दिलचस्प होगा कि आखिर किसे विधानसभा का प्रोटेम स्पीकर बनाया जाता है.

क्यों नियुक्त किया जाता है प्रोटेम स्पीकर?
प्रोटेम स्पीकर, चुनाव के बाद पहले सत्र में स्थायी अध्यक्ष या उपाध्यक्ष के चुने जाने तक सदन का कामगाज स्पीकर के तौर पर चलाता है यानि सदन का संचालन करता है. सीधे कहें तो यह कामचलाऊ और अस्थायी स्पीकर होता है. बेहद कम वक्त के लिए इन्हें चुना जाता है.

वरिष्ठतम सदस्य को चुनने की परंपरा 
अभी तक ज्यादातर मामलों में परंपरा रही है कि सदन के वरिष्ठतम सदस्यों में से किसी को यह जिम्मेदारी दी जाती है. प्रोटेम स्पीकर तभी तक अपने पद पर रहते हैं जब तक स्थायी अध्यक्ष का चयन न हो जाए.



कब देख सकता है काम-काज
हालांकि केवल चुनावों के बाद ही प्रोटेम स्पीकर की जरूरत नहीं होती बल्कि उस हर परिस्थिति में प्रोटेम स्पीकर की जरूरत पड़ती है जब सदन में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का पद एक साथ खाली हो. यह उनकी मृत्यु की स्थिति के अलावा दोनों के साथ इस्तीफा देने की परिस्थितियों में हो सकता है.

महाराष्ट्र विधानसभा
महाराष्ट्र विधानसभा


क्या होती हैं प्रोटेम स्पीकर की शक्तियां?
संविधान में प्रोटेम स्पीकर की शक्तियों का जिक्र नहीं किया गया है. प्रोटेम शब्द की बात करें तो यह लैटिन शब्द प्रो टैम्पोर का संक्षिप्त रूप है. जिसका मतलब होता है- कुछ समय के लिए. प्रोटेम स्पीकर ही नवनिर्वाचित सांसदों/विधायकों का शपथ ग्रहण कराता है. इस कार्यक्रम की देखरेख का जिम्मा उसी का होता है. सदन में जब तक नवनिर्वाचित सांसद/विधायक शपथ ग्रहण नहीं कर लेते तब तक वे औपचारिक तौर पर सदन का हिस्सा नहीं होते हैं. इसलिए पहले सांसदों/विधायकों को शपथ दिलाई जाती है, जिसके बाद वे अपने बीच से अध्यक्ष का चयन करते हैं. प्रोटेम स्पीकर वैसे किसी गलत प्रैक्टिस के जरिए वोट करने पर किसी सांसद/विधायक के वोट को डिसक्वालिफाई कर सकता है. इसके अलावा वोटों के टाई होने की स्थिति में वह अपने मत का इस्तेमाल फैसले के लिए कर सकता है.

सचिवालय ने भेजे 17 नाम
महाराष्ट्र में प्रोटेम स्पीकर बनाने के लिए 17 संभावित नाम सचिवालय की तरफ से भेजे गए हैं. इन नेताओं के नाम हैं- हरिभाऊ बागडे, बालासाहेब थोराट,  दिलीप वलसे पाटील, बबनराव पाचपुते, जयंत पाटील, छगन भुजबल, राधाकृष्ण विखे पाटील, के सी पाडवी, कालिदास कोलंबकर, सुधीर मुनगंटीवार, विजय कुमार गावित, गिरीष महाजन, गोवर्धन शर्मा, हितेंद्र ठाकुर, प्रकाश भारसाखले, मंगलप्रभात लोढा, बबनराव शिंदे.
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