जर्मनी में रिकॉर्ड 1 करोड़ लोगों के काम के घंटे कम, जानें कारण और असर

जर्मनी में रिकॉर्ड 1 करोड़ लोगों के काम के घंटे कम, जानें कारण और असर
जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल. फाइल फोटो.

दूसरे विश्व युद्ध के बाद आर्थिक मंदी की सबसे भयानक हालत से जूझ रहे जर्मनी ने अपने कामगारों और कर्मचारियों को मदद देने का जो रास्ता अपनाया है, कई देश उसी रास्ते पर चलने लगे हैं. मई दिवस के मौके पर जानें कि कैसे जर्मनी की अर्थव्यवस्था के सामने संकट गहरा रहा है और आंकलन क्या कह रहे हैं.

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कोरोना वायरस (Corona Virus) की महामारी जर्मनी के लिए दूसरे विश्व युद्ध (World War) से भी ज़्यादा दर्दनाक साबित हो रही है, खासकर अर्थव्यवस्था (Economy) को लेकर. सिर्फ मार्च के महीने में जर्मनी (Germany) में तीन लाख से ज़्यादा लोग बेरोज़गार (Unemployed) के रूप में पंजीबद्ध किए गए तो वहीं, जिन लोगों के वर्किंग घंटे (Working Hours) घटा दिए गए हैं, उनकी संख्या रिकॉर्ड 1 करोड़ से ज़्यादा हो गई.

ये आंकड़े कैसे जर्मनी की अर्थव्यवस्था (German Economy) पर असर डालने वाले हैं और कोविड 19 (Covid 19) महामारी की इस मुश्किल घड़ी में लोगों की मदद के लिए जर्मन प्रशासन कैसे व्यवस्था कर रहा है? इसके साथ ये भी जानना चाहिए कि कैसे जर्मनी की राह पर और भी देश चलने के लिए उत्सुक दिख रहे हैं.

जर्मनी में रोज़गार का भारी संकट
संघीय रोज़गार एजेंसी यानी जर्मन संस्था बीए ने इस हफ्ते कहा कि युद्ध के बाद से अब तक ये महामारी जर्मनी में सबसे भयावह मंदी लाने जा रही है. जॉब मार्केट पर इसका संकट गहराने लगा है. इस हफ्ते जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल में बेरोज़गारी और अल्प रोज़गारी बढ़ी है. जबकि कर्मचारियों के काम के समय और वेतन में कटौती के आंकड़े भी उछले हैं. और यह दूसरे विश्वयुद्ध के सबसे खतरनाक आंकड़े हैं.
क्या है कुरज़ाबएट, जिसमें दर्ज हुए 1 करोड़ लोग


मार्च और अप्रैल के महीने में सैकड़ों कंपनियों ने कुल मिलाकर एक करोड़ से ज़्यादा लोगों को कुरज़ाबएट के तहत सूचीबद्ध किया है. इसका मतलब यह होता है कि इन कर्मचारियों के काम के समय के अनुसार कंपनियों ने वेतन कम कर दिया है, जिसकी आपूर्ति सरकार करती है ताकि बेरोज़गार होने से लोगों को बचाया जा सके.

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इस सूची या नियम के अंतर्गत आने वाले लोगों के वेतन की भरपाई जर्मन सरकार करती है.


कुरज़ाबएट में 1 करोड़ लोगों का यह आंकड़ा रिकॉर्ड स्तर पर है क्योंकि इससे पहले इस नियम के अंतर्गत करीब 33 लाख तब आए थे, जब 2009 में वैश्विक आर्थिक मंदी का दौर जर्मनी में खासा देखा गया था.

कुरज़ाबएट में किए गए बदलाव
1 मई से इस स्कीम में कुछ बदलाव कर लोगों को मदद दिए जाने की घोषणा की गई है. कोविड 19 की वजह से इस स्कीम के तहत आए लोगों की दो तिहाई तक सैलरी सरकार कवर करेगी. यह भी गौरतलब है कि पहले नियम था कि अगर आप इस ​स्कीम के अंतर्गत हैं और कोई पार्ट टाइम काम करते हैं, तो सरकार आपके कवर की राशि कम कर देती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा. यानी आप पार्ट टाइम भी कर सकते हैं.

क्या होगा जर्मन अर्थव्यवस्था का?
संघीय सरकार ने इसी हफ्ते कहा कि जर्मन अर्थव्यवस्था कोरोना की मार से अगले डेढ़ से दो साल बाद ही उबर सकेगी. आर्थिक मामलों के मंत्री पीटर आल्टमियर ने कहा है कि पिछले साल यानी 2019 के स्तर पर पहुंचने में जर्मनी को शुरूआती 2022 तक का वक्त लग जाएगा. वहीं म्यूनिख के थिंक टैंक आईएफओ ने आंकलन किया है कि 2020 में जर्मनी की अर्थव्यवस्था को कुल 6.6% का झटका लगेगा.

कैसे जर्मनी के रास्ते पर चल रही है दुनिया?
अपने लोगों को संकट के समय राहत देने के लिए जर्मनी की बहुत पुरानी कुरज़ाबएट स्कीम की तर्ज़ पर यूरोप के कई देशों सहित अमेरिका भी नागरिकों को मदद देने के लिए कार्यक्रम बना रहा है. इटली, स्पेन, यूके और पुर्तगाल सहित कई यूरोपीय देशों ने बेरोज़गारों या उन लोगों को आर्थिक मदद के कार्यक्रम घोषित किए हैं, जिनका वेतन कम किया गया है. वहीं, अमेरिका में भी 27 राज्यों में वर्क शेयरिंग कार्यक्रमों के तहत वर्किंग आवर्स घटाए गए लोगों को बेरोज़गारों की तरह ही आर्थिक मदद देने के प्रावधान किए गए हैं.

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