सुन्नी-सुन्नी भाई-भाई... क्यों आई सऊदी अरब और पाकिस्तान के रिश्तों में कड़वाहट?

सुन्नी-सुन्नी भाई-भाई... क्यों आई सऊदी अरब और पाकिस्तान के रिश्तों में कड़वाहट?
सऊदी अरब और पाकिस्तान के रिश्तों में आई दरार.

पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच अब तक मधुर रहे रिश्ते में कटुता आ चुकी है. मुस्लिम देशों (Muslim World) की दुनिया में ये दोनों ही देश कुदरती तौर पर दोस्ताना संबंधों के लिए जाने जाते थे लेकिन अब पाक की उल्टी पड़ी चाल से सऊदी उससे बेहद नाराज़ है. क्या है पूरा मामला और इसमें भारत और चीन (India and China) से जुड़े पहलू क्या हैं?

  • News18India
  • Last Updated: August 13, 2020, 5:12 PM IST
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कश्मीर मुद्दे (Kashmir Issue) पर भारत के खिलाफ मोर्चाबंदी के दांवपेंच उल्टे पाकिस्तान को ही महंगे पड़ गए हैं. सऊदी अरब के साथ पाकिस्तान के रिश्तों (Saudi Arabia and Pakistan) का इतिहास यूं तो ठीक ही रहा है और मुस्लिम देश होने के कारण दोनों के बीच दोस्ताना संबंध रहे हैं, लेकिन हाल यह है कि नाराज़ सऊदी अरब ने पाकिस्तान को तेल की सप्लाई (Oil Supply) न केवल रोक दी, बल्कि कर्ज़ों पर भी रोक लगा दी है. यही नहीं, सऊदी अरब अब पाकिस्तान से वसूली के मूड में भी है.

पाकिस्तान लगातार दबाव बना रहा था कि कश्मीर मुद्दे पर सऊदी अरब उसका साथ दे और भारत सरकार के कदमों को लेकर सख्त रवैया दिखाए. इसी दबाव को लेकर पाकिस्तान ने यहां तक धमकी दे दी कि सऊदी अरब के वर्चस्व वाली संस्था ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ इस्लामिक कॉन्फ्रेंस अगर कश्मीर मुद्दे पर साथ नहीं देगी तो पाक मुस्लिम देशों के दूसरे धड़े के साथ याराना निभाएगा.

अब यह चाल पाकिस्तान को महंगी पड़ रही है क्योंकि सऊदी अरब के पास भी शिकायतों का पिटारा है. उसने पाकिस्तान के कर्ज़ चुकाने के ढीले रवैये पर लगाम कसकर 1 अरब डॉलर की वसूली की है. बाकी कर्ज़ चुकाने के लिए पाक को चीन से मदद मांगनी पड़ रही है. पाकिस्तान और सऊदी के रिश्तों में खटास आने की क्या यही एक वजह है या कोई भौगोलिक राजनीति, कोई और खिचड़ी भी है, जो देर से पक रही थी?



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सऊदी अरब के प्रिंस सलमान और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान. फाइल फोटो.

भारत से जुड़े अरब के हित!
जी हां, पाकिस्तान के चक्कर में सऊदी अरब भारत से दुश्मनी मोल लेने के मूड में कतई नहीं है. सिर्फ सऊदी ही नहीं, बल्कि पूरे अरब वर्ल्ड को पता है कि सवा सौ करोड़ की आबादी वाला भारत एक बहुत बड़ा बाज़ार है और इससे व्यापारिक हित जुड़े हैं. अरब वर्ल्ड कश्मीर मुद्दे पर पूरे एहतियात के साथ कदम उठाना चाहता है.

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वैसे भी सऊदी ने समझा है कि पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे पर उतावलेपन से काम ले रहा है. अस्ल में सऊदी का मानना है कि उसने अरबों की मदद पाकिस्तान को दी है, लेकिन कश्मीर मुद्दे पर उसकी सुई ऐसी अटकती है कि वह सारे एहसान भूलकर दुश्मनों की भाषा बोलने से भी परहेज़ नहीं करता.

ये पाकिस्तान की भाषा है या कुरैशी की?
पाकिस्तान के विदेश मंत्री अपने देश में खुद को 'कश्मीर का हमदर्द' ज़ाहिर करने के फेर में हैं. उन्होंने ही सऊदी के रवैये के खिलाफ ये बयान दिया था, जिसे उन्होंने बाद में अपनी निजी राय भी बताया. लेकिन, पाक के विदेश मंत्रालय ने इसे आधिकारिक तौर पर जारी करते हुए कह दिया कि पाक के विदेश मंत्री की राय, पाक की जनता की आवाज़ है. यहां से पाक और सऊदी के बीच बात बिगड़ना शुरू हो गई.

कश्मीर के अलावा कौन से कारण हैं?
पाकिस्तान से नाराज़ होने के पीछे सऊदी के पास कश्मीर मुद्दे पर पाक की बेचैनी के अलावा भी कारण हैं. सच तो यह है कि पाकिस्तान की विदेश नीति जिस तरह भारत को केंद्र में रखती है, उसी तरह सऊदी अरब की ईरान को. मध्य पूर्व में वर्चस्व के लिए सऊदी अरब और ईरान के बीच एक तरह का छद्म युद्ध कई दशकों से चल रहा है, जिसमें अब तक कोई जीता हारा नहीं है.

सुन्नी मुसलमानों की बहुलता के कारण पाकिस्तान और सऊदी अरब कुदरती तौर पर दोस्ताना संबंध वाले देश रहे हैं और ​दुनिया के सबसे शक्तिशाली शिया देश ईरान के दुनिया में तीन बड़े दुश्मन हैं - अमेरिका, इज़रायल और सऊदी अरब के नाम हैं. ईरान के साथ लड़ाई में पाकिस्तान कैसे सऊदी के गुस्से का शिकार हो गया?

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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ इमरान खान. फाइल फोटो.


चीन ने बिगाड़े हैं सारे गणित?
मध्य पूर्व में बेल्ड एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) की चीन की महत्वाकांक्षी परियोजना ने पूरा गणित बिगाड़ दिया है. ईरान और पाकिस्तान इस परियोजना में बड़े रोल में हैं. चीन ने पिछले दिनों ईरान के साथ जो 400 अरब डॉलर की डील की, उससे एक तरफ अमेरिका नाराज़ है क्योंकि चीन को इस डील के साथ मध्य पूर्व में अभूतपूर्व दखलंदाज़ी करने का मौका मिलता है तो दूसरी तरफ, सऊदी अरब भी परेशान है.

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अब ये डील अमेरिका की विदेश नीति के नाकाम होने का भी सबूत है तो साथ में चीन पाकिस्तान में लगातार भारी निवेश कर रहा है, पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर में भी. पाकिस्तान के साथ उसने आर्थिक कॉरिडोर भी बनाया है. ईरान और पाकिस्तान के साथ चीन के संबंधों की मज़बूती को सऊदी अरब खतरे के तौर पर भी देख रहा है.

सऊदी अरब की एक चिंता यह भी है कि पाकिस्तान और तुर्की के रिश्ते इस तरह बन रहे हैं, जितने पहले कभी नहीं रहे. अस्ल में, तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तय्यप एर्डोगान खुद को मुस्लिम देशों के बीच खलीफा के तौर पर पेश करने में लगे हैं. इस कोशिश को सलाफिया मुसलमान यानी सऊदी तिरछी नज़र से देखते हैं और इसे खारिज करते हैं.


पाकिस्तान का डैमेज कंट्रोल
कुरैशी के बयान के बाद सऊदी का मिज़ाज बिगड़ा तो पाकिस्तान ने नुकसान की भरपाई के कदम उठाने शुरू किए. एक तरफ कुरैशी ने अपने तेवर ढीले करते हुए कहा कि सऊदी ने पाक के लिए बहुत कुछ किया है, जिसे भुलाया नहीं जा सकता. ये भी कहा कि 'भाइयों के बीच अनबन' तो होती रहती है. लेकिन कुरैशी के इतने कहने से बात न बनती देख पाकिस्तान ने और भी कदम उठाए हैं.

रिपोर्ट्स की मानें तो कुरैशी के इस तरह के बयानों के बाद इस्लामाबाद में पाकिस्तान के 'वास्तविक शासकों' के बीच धड़ाधड़ बैठकें हुईं. पाक आर्मी चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा ने सऊदी अरब के राजदूत से मुलाकात की और कहा जा रहा है कि अब बाजवा सऊदी दौरे पर जाकर उलझे तार सुलझाएंगे.
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