वैज्ञानिक आखिर हिमालय में हींग क्यों उगाना चाह रहे हैं?

हिमाचल के गांव में हींग की पहली खेप रोपी गई है.
हिमाचल के गांव में हींग की पहली खेप रोपी गई है.

कश्मीरी में यांग, तेलुगू में इंगुवा, मराठी में कायम के नाम से मशहूर हींग फारस (Persia) में अंगुश्तगंध, अरब में तयिब और अंग्रेज़ी में डेविल्स डंग (Devil's Dung) कहलाती है. जानिए कि भारत में एक बार फिर हींग उत्पादन (Hing Cultivation) की कोशिश क्यों हो रही है.

  • News18India
  • Last Updated: October 21, 2020, 9:48 AM IST
  • Share this:
दाल से लेकर सांभर (Sambar) तक.. भारत में उत्तर से दक्षिण तक ज़्यादातर परिवारों की रसोई (Kitchen Spices) में हींग होना बहुत स्वाभाविक है. शायद यह भी आपको पता हो कि भारत में हींग (Asafoetida) की पैदावार न के बराबर है इसलिए हर साल भारत करीब 600 करोड़ रुपये की हींग विदेशों से मंगवाता (India Imports Hing) है. लेकिन, अब वैज्ञानिकों ने कमर कस ली है कि वो भारत में हींग का उत्पादन (Hing Production) करके ही मानेंगे. जी हां, हिमालयीन बायोरिसोर्स के इंस्टिट्यूट (IHBT) के वैज्ञानिक भारतीय हिमालय के इलाकों में हींग उगाने को मिशन बना चुके हैं.

भारत सहित कुछ यूरोपीय देशों में भी दवाओं में इस्तेमाल होने वाली हींग की पहली खेप हिमाचल प्रदेश की लाहौल वादी में पिछले हफ्ते रोपी जा चुकी है. वैज्ञानिक इस तरह का बीड़ा क्यों उठा रहे हैं? इसके साथ ही हींग के उत्पादन और कारोबार से जुड़े कुछ और ज़रूरी फैक्ट्स भी आपको जानने चाहिए.

ये भी पढ़ें :- यूरोपीय न्यूक्लियर रिसर्च सेंटर में नटराज की मूर्ति क्यों रखी है?



क्या और क्यों है ये हींग मिशन?
भरपूर पोषण से युक्त औषधीय गुणों वाली हींग मुख्यत: अफगानिस्तान, ईरान और उज़बेकिस्तान से भारत आती है. सरकारी डेटा की मानें तो भारत हर साल 1200 टन कच्ची हींग का आयात करता है. साल 1963 से 1989 के बीच भी भारत ने एक बार हींग उगाने की कोशिश की थी, लेकिन कोई सकारात्मक नतीजे नहीं मिले थे. इसके बाद 2017 में वैज्ञानिकों ने एक नये आइडिया के साथ दोबारा यह प्रस्ताव रखा.

ईरान से हींग के बीज मंगाए जाने के बाद उनके बारे में अध्ययन किया गया. कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) से तमाम मंज़ूरियां मिलने के बाद IHBT ने पालमपुर में रिसर्च आदि को अंजाम दिया. चूंकि यह पौधा रेगिस्तानी स्थितियों में फलता फूलता है इसलिए वैज्ञानिकों ने इसे नियंत्रित लैब कंडीशन में खास केमिकल ट्रीटमेंट दिया. इसके बाद हिमाचल के कृषि मंत्रालय के साथ एक समझौते के तहत अगले पांच साल तक हींग उगाने का यह प्रोजेक्ट शुरू किया गया.

hing cultivation in india, hing plant, hing tree, hing ki kheti, हींग उत्पादन, हींग कैसे बनती है, हींग के फायदे, हींग का पानी
हींग न सिर्फ उपयोगी मसाला है बल्कि लाभदायक औषधि है.


क्या भारत में हींग के मुफीद स्थितियां हैं?
बीते 15 अक्टूबर को लाहौल के क्वारिंग गांव में हींग की पहली खेप उगाने की कोशिश की गई है. कृषि विज्ञान के विशेषज्ञों के मुताबिक एक रिपोर्ट में कहा गया है कि हींग उत्पादन के अनुकूल परिस्थितियां मिलने की उम्मीद है. इसकी शुरूआत जांच परख के बाद लाहौल स्पिति वैली से की गई है. यहां चार लोकेशनों फाइनल करने के बाद क्षेत्र के 7 किसानों को हींग के बीज मुहैया कराए गए हैं.

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि 35 से 40 डिग्री और सर्दियों में -4 डिग्री तापमान के बीच हींग का पौधा पनप सकता है, लेकिन इससे अलग स्थितियों में यह पौधा खत्म हो जाता है. ठंडे और सूखे मौसम के आदी इस पौधे के लिए मौसम देखकर ही ये स्थान चुने गए हैं. इससे पहले कुछ प्रयोग मंडी, किन्नौर, कुल्लू, मनाली और पालमपुर में किए गए थे और अब रिसर्चर लद्दाख व उत्तराखंड में प्रयोगों के विस्तार को लेकर सोच रहे हैं.

ये भी पढ़ें :-

Everyday Science : हम वज़न कम करते हैं, तो वज़न जाता कहां है?

चीन में किस तरह होती है हजारों बाघों की फार्मिंग और तस्करी?

आखिर क्यों इतनी खास है हींग?
हींग एक औषधि के तौर पर पुराने समय से ही भारत में उपयोग में लाई जाती रही है. पाचन समस्या, पेट की ऐंठन, दमा और ब्रोंकाइटिस जैसी समस्याओं में हींग उपयोगी साबित हो चुकी है. वात रोगों में उपयोगी होने के कारण नवजातों की मांओं को इसका सेवन कराया जाता है. साथ ही, मासिक धर्म के समय अधिक ब्लीडिंग होने या प्री मेच्योर लेबर पेन होने के वक्त भी हींग के उपयोग को लेकर सकारात्मक नतीजे मिल चुके हैं.

अंतत: बात यह है कि हींग के उत्पादन के लिए प्रयोग शुरू हो चुके हैं, लेकिन इसके नतीजे आने में करीब पांच साल का समय लगेगा. इन पांच सालों में वैज्ञानिक इन पौधों को मॉनिटर करेंगे. इस साल के आखिर तक एक हेक्टेयर में हींग का उत्पादन करने का लक्ष्य है और अगले पांच सालों में 300 हेक्टेयर में, अगर सब कुछ ठीक रहा तो.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज