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क्या है शाह फैसल का भविष्य, ब्यूरोक्रेसी के बाद अब क्यों छोड़ दी पॉलिटिक्स?

पूर्व आईएएस शाह फैसल.

पूर्व आईएएस शाह फैसल.

कश्मीरी आईएएस (IAS) के तौर पर चर्चित रहे शाह फैसल ने पिछले साल तब सुर्खियां बटोरी थीं, जब उन्होंने आईएएस से इस्तीफा देकर अपनी राजनीतिक पार्टी (Political Party) बनाई थी. अब उन्होंने यह पार्टी भी छोड़ दी है. ऐसा क्यों हुआ? ये भी जानिए कि 10 महीने गिरफ्तार रहने के बाद दो महीने पहले ही छूटे फैसल के सामने अब कितने विकल्प हैं.

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    करीब दस साल पहले इस नाम ने तब सुर्खियां बटोरी थीं, जब पहली बार किसी कश्मीरी (Kashmir Citizen) ने यूपीएससी की परीक्षा (UPSC Exam) में टॉप किया था. इसके बाद शाह फैसल कश्मीर में ही ब्यूरोक्रेट के तौर पर सक्रिय रहे और 2019 में तब सनसनी बनकर सामने आए जब आईएएस से इस्तीफा (IAS Officer Resign) देकर उन्होंने राजनीति में उतरने का फैसला किया. जम्मू-कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट (Jammu & Kashmir Peoples Movement) पार्टी बनाने वाले फैसल ने हाल में इस पार्टी के अध्यक्ष पद से भी इस्तीफा दे दिया है.

    अब सवाल यह खड़ा हो रहा है कि शाह फैसल का भविष्य क्या है? क्या अपनी ही पार्टी का अध्यक्ष पद छोड़ने के कदम को सियासत छोड़ देना माना जा सकता है? क्या फैसल वापस आईएएस के तौर पर ही नौकरी में लौट सकते हैं? इन तमाम सवालों के सिलसिलेवार जवाबों के साथ जानिए कि शाह फैसल असल में किस तरह चर्चाओं में रहे.

    जम्मू-कश्मीर में बतौर आईएएस रहते हुए सोशल मीडिया पर एक बोल्ड पोस्ट के बाद चर्चाओं में आए शाह फैसल ने राजनीतिक जीवन में संभावनाओं को तलाशने के बाद अब एक तरह से सियासत को अलविदा कहने का मन बना लिया है. खबरों की मानें तो हाल में कश्मीर में उप राज्यपाल मनोज सिन्हा के पहुंचने के बाद पार्टी प्रमुख पद से फैसल के इस्तीफे को लेकर अटकलें हैं कि वो सिन्हा के सलाहकार के तौर पर नौकरशाही में वापसी करने जा रहे हैं. हालांकि फैसल की तरफ से ऐसा कोई बयान नहीं आया है.

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    कश्मीर के एक गांव में शाह फैसल की यह तस्वीर उनके फेसबुक अकाउंट पर उपलब्ध है.


    बदल गए जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक समीकरण
    मार्च 2019 में फैसल ने अपनी नई क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टी बनाई थी और उन्हें राजनीति में संभावनाएं दिख रही थीं, लेकिन केंद्र सरकार ने कुछ ही महीनों बाद जम्मू-कश्मीर का नक्शा ही बदल दिया. अनुच्छेद 370 को खत्म कर जम्मू-कश्मीर के विशेष राज्य के दर्जे को खत्म कर राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों में बदल दिया गया. सीमांकन के हिसाब से लद्दाख बड़ा केंद्रशासित प्रदेश बन गया.

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    यही नहीं, भारी सुरक्षा बलों की तैनाती के साथ ही कश्मीर को सैन्य छावनी बनाकर आए दिन कर्फ्यू लगाकर केंद्र ने राज्य के कई नेताओं को पब्लिक सेफ्टी एक्ट के तहत नज़रबंद और गिरफ्तार भी किया. इनमें फैसल भी शामिल रहे. कुल मिलाकर कश्मीर की राजनीति के समीकरण पूरी तरह बदल गए और अब कश्मीर में सिर्फ फैसल ही नहीं बल्कि तमाम पॉलिटिशियनों को अपना भविष्य नए सिरे से ​खोजना पड़ रहा है.

    तो क्या वापस नौकरी है रास्ता?
    ऐसे हालात में माना जा रहा है कि नई तस्वीर के चलते फैसल वापस नौकरी में आ सकते हैं और हाल में कश्मीर पहुंचे लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा की टीम का हिस्सा बन सकते हैं. ऐसा इसलिए भी संभव हो सकता है क्योंकि फैसल का आईएएस के तौर पर दिया गया इस्तीफा अब तक मंज़ूर नहीं हुआ है, जो उन्होंने 9 जनवरी 2019 को दिया था.

    क्यों दिया था IAS फैसल ने इस्तीफा?
    शाह फैसल ने एक सभा में भाषण के दौरान आईएएस के तौर पर करीब दस साल की अपनी नौकरी को 'दस साल जेल में बिताने' जैसा अनुभव बताया था. उन्होंने कहा था कि बार बार कर्फ्यू के आदेश देना, लोगों को जबरन जेल में ठूंसने के निर्देश देते हुए वो थक गए थे. ये भी कि कश्मीर में 'लगातार हत्याओं' का सिलसिला जारी रहा इसलिए इन तमाम वजहों से वो कश्मीर की बेहतरी के लिए नौकरी छोड़कर सियासत में आना चाहते थे.

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    हार्वर्ड कैनेडी स्कूल में फुलब्राइट फेलो हैं शाह फैसल.


    अब क्या होगा फैसल का भविष्य?
    जम्मू-कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट पार्टी से फैसल के इस्तीफे के बाद बिज़नेसमैन और पार्टी उपाध्यक्ष पीरज़ादा फिरोज़ को पार्टी का अंतरिम अध्यक्ष चुन लिया गया है. फिरोज़ की मानें तो पार्टी ने एक महीने तक लाख कोशिशें कीं कि फैसल अध्यक्ष बने रहें लेकिन ऐसा नहीं हुआ. फिरोज़ का मानना है कि अब फैसल आईएएस के तौर पर लौट सकते हैं या आगे पढ़ाई के लिए विदेश जा सकते हैं.

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    चूंकि फैसल अभी कोई बयान नहीं दे रहे हैं इसलिए उनके भविष्य को लेकर अटकलों का दौर जारी है. एक रिपोर्ट की मानें तो सेफ्टी एक्ट के तहत गिरफ्तार होने के बाद इसी साल जून में छूटे फैसल ने पिछले दिनों लगातार ​नई दिल्ली के दौरे किए हैं, जिन्हें भविष्य की उनकी रणनीति के दांव पेच के तौर पर समझा जा रहा है.

    फैसल से जुड़े कुछ खास तथ्य
    * अपने ट्विटर अकाउंट में बायो से फैसल ने हाल में राजनीतिक पार्टी के अध्यक्ष होने की जानकारी डिलीट की. अब उनके बायो के हिसाब से वो हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के फेलो, मेडिको, फुलब्राइट और सेंट्रिस्ट यानी मध्यमार्गी हैं.
    * SKIMS से एमबीबीएस की डिग्री हासिल करने वाले फैसल के पास उर्दू में मास्टर्स की डिग्री भी है.
    * फैसल के माता, पिता और दादा भी टीचर थे. उनके पिता गुलाम रसूल शाह की 2002 में आतंकियों ने हत्या कर दी थी, जब फैसल 19 साल के थे.
    * जुलाई 2018 में फैसल के एक ट्वीट के बाद उनके खिलाफ जांच हुई थी. मूलत: अंग्रेज़ी में किया गया ट्वीट कुछ इस तरह था: आबादी +पितृसत्ता +अशिक्षा +शराब +पॉर्न +तकनीक +अराजकता = रेपिस्तान.
    * मीडिया में फैसल की तुलना बुरहान वानी से की जा रही थी. तब फैसल ने इस प्रोपैगेंडा का विरोध कर सोशल मीडिया पर अपनी सिविल सर्विस छोड़ने तक की धमकी दी थी.
    * पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के साथ ही दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल को फैसल रोल मॉडल बता चुके हैं. वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने उन पर लेख लिखा था, जिसका टाइटल था 'कश्मीर का केजरीवाल'.

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