चांद रोज गोल क्यों नहीं दिखता, जानिए क्या है इसका कारण

दक्षिण कोरिया (South Korea) का यह चंद्र अभियान (Moon Mission) साल 2016 से तैयार हो रहा है.
दक्षिण कोरिया (South Korea) का यह चंद्र अभियान (Moon Mission) साल 2016 से तैयार हो रहा है.

चंद्रमा (Moon) के रोज अलग आकार दिखने के पीछे चंद्रमा की पृथ्वी की परिक्रमा (orbiting earth) और सूर्य (Sun) से आने वाली किरणें (Rays) का प्रतिबिंबित (Reflect) होना है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 26, 2020, 5:28 PM IST
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कई बार बच्चे भी बड़ों से ऐसे सवाल (Question) पूछ लेते हैं जिन्हें समझाना बहुत मुश्किल होता है. कई बार बच्चे भी ऐसे सवाल पूछ लेते हैं जो उन्हें आसानी से समझ नहीं आ सकते. ऐसा है एक सवाल है कि चांद (Moon) रोज क्यों नहीं दिखाई देता और वह रोज ही पूरा गोल (Round) क्यों नहीं दिखाई देता है. या फिर यह रोज अलग आकार (Shape) का क्यों दिखाई देता है. यह अपने आप में जटिल सवाल है और इसका जवाब कुछ लंबा सा है. इसके लिए हमें पृथ्वी (Earth), सूर्य (Sun)और चंद्रमा के बीच के रिश्ते को समझना होगा.

पृथ्वी, चंद्रमा और सूर्य के बीच रिश्ता
इस सवाल के जवाब के लिए हमें कुछ मूल बातें समझनी होंगी. सबसे पहली बात पृथ्वी चंद्रमा और सूर्य क्या हैं. ये तीनों गेंदों की तरह बहुत ही बड़ी वस्तुएं हैं जो अंतरिक्ष में स्थित हैं. सूर्य बहुत विशाल है और खुद का प्रकाश उत्सर्जित करता है. जबकि पृथ्वी और चंद्रमा बहुत छोटे हैं जैसे फुटबाल के सामने राई के दाने. वहीं चंद्रमा पृथ्वी के एक चौथाई के आकार जितना बड़ा है और दोनो का अपना प्रकाश नहीं होता.

चंद्रमा आखिर दिखता क्यों है
चंद्रमा पृथ्वी का चक्कर लगाता है और दोनों मिल कर सूर्य के चक्कर लगाते हैं. सबसे पहल हम इस सवाल का जवाब देते हैं कि अगर चंद्रमा का अपना कोई प्रकाश नहीं है तो वह हमें दिखाई कैस देता है, वह भी चमकता हुआ? हमें चंद्रमा इस वजह से दिखाई देता है क्योंकि उस पर आने वाला सूर्य का प्रकाश प्रतिबिंबित हो कर पृथ्वी पर आता है. इस तरह चंद्रमा आइने का काम करता है.



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चंद्रमा (Moon) के पृथ्वी (Earth) का चक्कर लगाना उसके आकार बदलने का प्रमुख कारण है. (तस्वीर: Pixabay)


चंद्रमा की पृथ्वी परिक्रमा
अब बात करें चंद्रमा के अलग-अलग आकार बदलने की. चंद्रमा पृथ्वी का चक्कर 30 दिन में पूरा करता है. इस दौरान वह एक बार पृथ्वी और सूर्य के बीच में आता है तो एक बार पृथ्वी के पीछे और पूरे चक्कर के दौरान वह सूर्य और पृथ्वी से अलग-अलग कोण बनाता है. जब चंद्रमा पृथ्वी के आगे आता है तब सूर्य से आने वाली किरणें प्रतिबिंबित हो कर पृथ्वी पर नहीं आती और वह दिखाई नहीं दे पाता. ऐसा रात अमावस की रात होती है.

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कब दिखता है पूरा गोल चंद्रमा
जब चंद्रमा पृथ्वी के पीछे होता है तो सूर्य की किरणें चंद्रमा पर पड़कर पृथ्वी तक सीधे आ जाती हैं और चंद्रमा पूरा गोल दिखाई देता है. यह पूर्णिमा की रात होती है. वहीं महीने में दो बार सूर्य पृथ्वी और चंद्रमा समकोण बनाते हैं. ऐसे में चंद्रमा आधा दिखाई देता है. इसी तरह अलग अलग कोणों के कारण चंद्रमा के अलग आकार दिखाई देते हैं जिन्हें चंद्रमा की कलाएं कहते हैं और अंग्रेजी में फेजेज ऑफ द मून (Phases of the moon) कहते हैं, लेकिन चंद्रमा हमेशा  पूरा का पूरा गोल ही रहता है.

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चंद्रमा (Moon) के बदलते आकार (Shape) ने बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी में हमेशा ही कौतूहल पैदा किया है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


सूर्यग्रहण का भी यही कारण
इस प्रक्रिया में चंद्रग्रहण और सूर्यग्रहण का रहस्य भी छिपा है. पहले सूर्यग्रहण को लें. जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच में आता है तो चंद्रमा की छाया पृथ्वी पर दिखाई देती है और इस दौरान उस छाया पड़ने वाले इलाके में सूर्य दिखाई नहीं देता इसे सूर्यग्रहण कहते हैं. इसीलिए सूर्यग्रहण हमेशा अमावस के रात वाले समय के आसापास दिन के वक्त होता है.

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और ऐसे होता है चंद्रग्रहण
वहीं जब पृथ्वी चंद्रमा और सूर्य के बीच में आती है तो पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है और चंद्रमा पर सूर्य का प्रकाश नहीं पहुंच पाता जिससे चंद्रमा का प्रतिबिंबित प्रकाश पृथ्वी पर नहीं आता और चंद्रमा अंधेरे में चला जाता है. यह समय चंद्र ग्रहण का होता है. चंद्रग्रहण हमेशा पूर्णिमा की रात को ही होता है.
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