आसमान क्यों दिखाई देता है नीले रंग का

आसामान (Sky) हमेशा ही नीला (Blue) क्यों दिखाई देता है इसके पीछे एक खास वैज्ञानिक कारण हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)
आसामान (Sky) हमेशा ही नीला (Blue) क्यों दिखाई देता है इसके पीछे एक खास वैज्ञानिक कारण हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

आसमान (Sky के हमेशा ही नीले (Blue) रंग के दिखाई देने के पीछे प्रकाश (Light) के एक खास प्रभाव (Effect) का होना है जिसे भारतीय वैज्ञानिक सीवी रमन (CV Raman) ने भी इसी सवाल का जवाब खोजते हुए ढूंढा था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 30, 2020, 8:47 PM IST
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आसामान (Sky) साफ हो और सूरज (Sun) की रोशनी (light) भी तेज न हो यह नजारा किसे अच्छा नहीं लगेगा. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि साफ आसमान हमेशा नीला (Blue) ही क्यों दिखाई देता है और क्या कारण है से सूर्यास्त के समय पश्चिम और सूर्योदय के समय पूर्व का आसामान लाल रंग क दिखाई देता है. इस सबके पीछे एक ही कारण हैं वह प्रकाश का बिखरना (Scattering of light). आइए जानते हैं कि यह प्रक्रिया कैसे काम करती है.

पहले प्रकाश के रंग को समझें
इस प्रक्रिया को समझने के लिए पहले हमें प्रकाश को समझना होगा. सूर्य से आने वाली  किरणें जो हम तक पहुंचती हैं उनका रंग सफेद होता है, लेकिन असल में वे सभी अलग-अलग रगों की किरणों या तरंगों का मिश्रण होता है. जब हम इस प्रकाश को किसी प्रिज्म से गुजरने देते हैं तो ये विभिन्न रंग की तरंगें अलग हो जाती हैं और एक इंद्रधनुष की तरह दिखाई देने लगती हैं. इंद्रधनुष के मामले में भी पानी की बूंदें छोटे छोटे प्रिज्म की तरह काम करती हैं.

तो आसामान में क्या होता है
जब सूर्य से किरणें पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करती हैं तो उनका सामना उससे पहले ऐसी किसी चीज से नहीं होता जिससे टकरा कर वह वापस लौट जाए जैसा कि आइने के साथ होता, मुड़ जाए जैसा कि प्रिज्म के साथ हो जाए या फिर बिखर जाए जैसा कि वायुमंडल के गैसीय कणों से टकराने पर होता है. लेकिन जो भी स्थिति हो ऐसा नहीं होता है कि सारे रंगों का प्रकाश या सारी तरंगें एक जैसे मुड़े या फिर एक ही तरह से बिखर जाए.



तो इन तरंगों के कारण नीला दिखता है आसमान
अलग रंगों की तरंगें अलग तरह से मुड़ती है और अलग तरह से बिखरती भी हैं. इसीलिए तो प्रिज्म और इंद्रधनुष में ये तरंगें अलग अलग दिखाई देती हैं. ऐसा ही कुछ इनके बिखरने की प्रक्रिया में भी होता है. और होता यह है कि नीले और बैंगनी रंग की तरंगे ही हवा के गैसीय अणुओं से टकरा कर आसानी से और सबसे ज्यादा बिखरती हैं और हमारी आंखों तक पहुंच जाती हैं जिससे हमें आसमान नीला दिखाई देता है.

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सूर्य (Sun) से आने वाली किरणें (Rays) सफेद (White) रंग की होती हैं जिनमें सभी रंगों (colours) की तरंगें (Waves) मिली हुई होती हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


लेकिन फिर बैंगनी रंग
बैंगनी रंग की ज्यादातर तरंगें हमारे वायुमंडल का ऊपरी हिस्सा अवशोषित कर लेता है. इसलिए वे कम मात्रा में हम तक पहुंच पाती हैं. इसके अलावा हमारी आंखें भी बैंगनी के बजाए नीले रंग के प्रति ज्यादा संवेदनशील होती हैं. इसी लिए हमें आसमान नीला दिखाई देता है बैंगनी कम.

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नीला और बैंगनी ही क्यों हरा या लाल क्यों नहीं
लेकिन नीले और बैंगनी रंग की तरंगों में ऐसा क्या खास होता है जिससे यही तरंगों अणुओं से टकराकर सबसे ज्यादा बिखरती हैं. इसी वजह से उनका आकार या साइज साइज इन तरंगों का आकार अणुओं के आकर से मिलता है तो इस वजह से वे गैसीय अणुओं से आसानी से और ज्यादा मात्रा में टकराती हैं जबकि बाकी तरंगें सफेद किरणों के साथ बनी रहती हैं.

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प्रकाश बिखराव (Scattering of light) ही दूसरे तरीके से सूर्यास्त (Sunset) के समय पश्चिमी आसमान का रंग लाल (Red colour) कर देता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


लेकिन क्षितिज पर लाल रंग क्यों
क्षितिज के पास से आना वाला प्रकाश हमारे पास आते समज बहुत ज्यादा हवा से होकर गुजरता है. ऐसे में नीला रंग इतना ज्यादा बिखर जाता है कि वह हम तक कम मात्रा में ही पहुंच पाता है. इसी वजह से लाल और पीले रंग की तरंगों का नीले रंग की तरंगों से सामना तक नहीं होता इसीलिए आमतौर पर हावी रहने वाली नीले रंग की तरंगों पर इस मामले में लाल और पीले रंग की तरंगें हावी हो जाती है  और हमें आसामान उस ओर लाल या पीला दिखाई देता है.

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प्रकाश की बिखराव की इस प्रक्रिया की खोज बीसवीं सदी में भारतीय वैज्ञानिक सीवी रमन ने की थी. हैरानी की बात यही है कि रमन से पहले कोई भी इस बात का वैज्ञानिक कारण नहीं पता नहीं लगा सका कि आसमान नीला ही क्यों दिखाई देता है.
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