कांग्रेस की कहानी में सोनिया के फिर लीड रोल में आने के मायने

सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) को अंतरिम अध्यक्ष चुनने से साफ ज़ाहिर हो चुका है कि गांधी परिवार (Gandhi Family) और कांग्रेस एक दूसरे के पर्याय ही हैं. जैसे इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) भी न चाहते हुए राजनीति में बनी रहीं, क्या वैसे ही सोनिया को भी बने रहना होगा?

News18Hindi
Updated: August 13, 2019, 4:34 PM IST
कांग्रेस की कहानी में सोनिया के फिर लीड रोल में आने के मायने
कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी.
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Updated: August 13, 2019, 4:34 PM IST
इनकार नहीं किया जा सकता कि संगठन के स्तर पर देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस (Congress Party) अपने सबसे खराब समय से गुज़र रही है. कांग्रेस के अध्यक्ष के पद से राहुल (Rahul Gandhi) के इस्तीफे के बाद पार्टी की वर्किंग कमेटी (CWC) ने अंतरिम अध्यक्ष के रूप में फिर सोनिया गांधी को चुनने का फैसला किया. इस फैसले के अर्थ क्या हैं और कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर सोनिया गांधी की वापसी से क्या वाकई पार्टी के दिन फिर सकते हैं? इसे समझने के लिए सोनिया गांधी के पिछले कार्यकाल और उनके राजनीति में आने के दौर की कहानी मददगार साबित हो सकती है.

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134 साल पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस (Oldest Indian Party) में सबसे लंबे समय तक अध्यक्ष रहने का रिकॉर्ड भी सोनिया गांधी के नाम ही है, जब वह 1998 से 2017 तक इस पद पर रहीं. फिर उन्होंने पार्टी की कमान अपने बेटे राहुल गांधी को सौंपी लेकिन 20 महीने के भीतर ही राहुल ने इस ज़िम्मेदारी को यह कहकर छोड़ने का मन बनाया कि कांग्रेस का अध्यक्ष किसी गैर गांधी (Non Gandhi President) यानी गांधी परिवार के बाहर के व्यक्ति को होना चाहिए. राहुल के इस कदम के बाद कांग्रेस पार्टी की वर्किंग कमेटी सर्वमान्य नेता न चुन पाने के कारण फिर गांधी परिवार यानी सोनिया के नाम पर ही सहमति बना सकी.

सोनिया का कांग्रेस से जुड़ना

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के बाद कांग्रेस के सामने कुछ इसी तरह का संकट गहराया था कि पार्टी की कमान किसके हाथ में होगी. महत्वपूर्ण नेताओं के होते हुए भी उस दौर में कांग्रेस की दूसरी शीर्ष पंक्ति के नेता गांधी परिवार की तरफ नेतृत्व की उम्मीद भरी निगाहों से देख रहे थे. रशीद किदवाई ने एक लेख में लिखा है कि दिग्विजय सिंह, कमलनाथ, अशोक गहलोत, अहमद पटेल और वायलार रवि जैसे दूसरी पंक्ति के नेताओं ने उस वक्त सोनिया गांधी से मुलाकात कर कहा था 'आप अपनी आंखों के सामने कांग्रेस को बिखरते हुए कैसे देख सकती हैं?'

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सबसे लंबे समय तक कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष पद पर रहने का रिकॉर्ड सोनिया गांधी के ही नाम है.

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इसके बाद 1997 में सोनिया गांधी ने कांग्रेस की कमान संभाली थी, हालांकि तब उनका जमकर विरोध हुआ था और उन्हें 'विदेशी बहू' कहकर राजनीति से खारिज करने की पूरी कोशिश की गई थी. राजीव गांधी की मृत्यु के बाद देश ने वो समय देखा था जब पांच साल के भीतर चार प्रधानमंत्री बने. 1998 के बाद अगले छह साल भाजपा केंद्र में रही और अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री रहे. इस दौरान संगठन स्तर पर सोनिया ने नेतृत्व दिया और 2004 में पार्टी फिर केंद्र की सत्ता में लौटी.

क्या थे 90 के दशक के हालात?
राजीव गांधी के मौत के बाद पीवी नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री रहे. उनका कार्यकाल 1996 में खत्म होने के बाद देश ने राजनीतिक अस्थिरता का दौर देखा. फिर 1998 में जब एनडीए की सरकार बनी और उसी समय कांग्रेस की कमान सोनिया गांधी के हाथ में आई थी, तब कांग्रेस केवल चार राज्यों में सत्ता में थी. दूसरी ओर, कांग्रेस के कई चर्चित नेता पार्टी छोड़ रहे थे. ऐसे में, सोनिया ने संगठन को संभाला और पार्टी को एक नई दिशा देने की कोशिश की. जानकार इन तमाम कोशिशों को श्रेय देते हैं कि वाजपेयी के चर्चित व्यक्तित्व के बावजूद 2004 में कांग्रेस ने केंद्र में वापसी करने की राह बनाई.

फिर प्रधानमंत्री न बनना...
सोनिया गांधी के प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी को लेकर भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने काफी विवाद खड़ा कर दिया था, लेकिन फिर भी कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी और केंद्र में सरकार बनाई थी. उस वक्त सोनिया गांधी ने 'आत्मा की आवाज़' वाला बयान देकर प्रधानमंत्री न बनने का फैसला किया था और मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री का पद सौंपा गया. सोनिया गांधी के इस फैसले ने कांग्रेस के लिए तकरीबन संजीवनी का काम किया था और पार्टी मज़बूत स्थिति बनाए रखने में कामयाब रही.

जानकार बताते हैं कि उनकी नेतृत्व क्षमता के कई नेता कायल रहे हैं. कहा जाता है कि सोनिया गांधी से धैर्य, सहनशीलता और कम बोलने की कला नेताओं को सीखना चाहिए. न्यूज़18 की ही एक रिपोर्ट के मुताबिक सोनिया मीडिया में कम बोलती थीं और यही उनका कारगर हथियार भी था, लेकिन कांग्रेस के भीतर वह दमदारी से बात करती थीं.


सोनिया और इंदिरा गांधी कनेक्शन
सोनिया जब देश की राजनीति में आईं, तब उन्होंने अपनी सास इंदिरा गांधी की न सिर्फ बातें कीं बल्कि उनका कॉटन साड़ी का स्टाइल भी अपनाया और वह छवि बनाने की कोशिश की, जो देश की इच्छा के अनुरूप थी. इतिहासकारों के हवाले से कहा जाता है कि इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सोनिया ने राजीव को प्रधानमंत्री बनने से रोका था. अस्ल में, सोनिया सार्वजनिक जीवन को लेकर उस वक्त हिचकिचाई हुई रहती थीं और संजय गांधी की मौत के बाद भी उन्होंने राजीव को राजनीति में न उतरने की सलाह दी थी.

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इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सोनिया ने राजीव को प्रधानमंत्री बनने से रोका था.


राजनीति से दूर नहीं हो सकता गांधी परिवार
अपने लेख में किदवाई कहते हैं कि राजीव की मौत के बाद सोनिया गांधी को राजनीति में आने का इरादा नहीं था, लेकिन कांग्रेस और राजनीति से गांधी परिवार का चोली दामन का नाता रहा है इसलिए इससे दूर नहीं हुआ जा सकता. इसकी एक मिसाल ये भी है कि 1950 के दशक में फिरोज़ गांधी की मौत के बाद इंदिरा गांधी भी विदेश जाकर बसना चाहती थीं लेकिन उन्हें जवाहरलाल नेहरू के उत्तराधिकारी का पद अपने आप मिल चुका था और वह भारत की राजनीति या कांग्रेस पार्टी को छोड़कर नहीं जा सकीं.

इसी तरह, इच्छा न होते हुए सोनिया राजनीति में आईं लेकिन आईं तो कांग्रेस के लिए उन्होंने अपने परिवार की परंपरा को निभाया. बाद में, 2016 में सोनिया ने सक्रिय राजनीति से रिटायरमेंट की इच्छा ज़ाहिर की थी और राहुल को उत्तराधिकार सौंपना उसी इच्छा का नतीजा भी था, लेकिन घूम फिरकर बात फिर वहीं आ जाती है कि गांधी परिवार और कांग्रेस एक दूसरे के पर्याय रहे हैं, तो ये मुमकिन नहीं है.


कमान संभालने फिर क्यों आईं सोनिया?
90 के दशक में कांग्रेस की कमान संभालने के बाद सोनिया ने एक इंटरव्यू में कहा था कि कांग्रेस से दामन न छुड़ा पाना उनकी मजबूरी नहीं बल्कि राजीव के प्रति उनके प्यार और सम्मान का विस्तार है. उन्होंने यह भी कहा था​ कि जिस देश को उन्होंने जीवन भर रहने के लिए चुना, वह उसके प्रति अपनी ज़िम्मेदारी भी निभाएंगी. ताज़ा संदर्भों में कांग्रेस जिस मुसीबत में है, उसमें सोनिया उससे किनारा नहीं कर सकतीं क्योंकि यह उनकी ही नहीं बल्कि पूरे गांधी परिवार और उसके इतिहास की साख से जुड़ा सवाल है.

अब क्या हैं उम्मीदें?
कांग्रेस के अंतरिम अध्यक्ष के तौर पर सोनिया गांधी के नाम पर सहमति बनना ये ज़ाहिर करता है कि गांधी परिवार के इर्द गिर्द ही कांग्रेस की धुरी रहेगी. ये भी कहा गया कि गैर गांधी अध्यक्ष बना तो वर्तमान समय में कांग्रेस बुरी तरह बिखर जाएगी. सोनिया को लेकर जानकार मान रहे हैं कि उनकी प्रतिभा ऐसी रही है कि वह कांग्रेस को पुनर्जीवित करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं क्योंकि 90 के दशक के ऐसे ही खराब दौर से वह पार्टी को एक बार उबार चुकी हैं. अब परीक्षा ये है कि ऐसा दूसरी बार भी होगा या नहीं.

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First published: August 13, 2019, 4:34 PM IST
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