कोरोना वायरस: आखिर मलेरिया की इस दवा के पीछे क्यों पड़े हैं ट्रंप? जानें वजह

कोरोना वायरस: आखिर मलेरिया की इस दवा के पीछे क्यों पड़े हैं ट्रंप? जानें वजह
न्यूज़18 क्रिएटिव

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कोविड 19 के इलाज के लिए मलेरिया की एक दवा का ज़बरदस्त प्रचार किया, जिससे एक तरफ मेडिकल विशेषज्ञों की मुश्किलें बढ़ गई हैं तो दूसरी तरफ, ये बात भी सामने आई है कि ट्रंप उस फार्मा कंपनी के शेयरहोल्डर हैं, जो यह दवा बनाती है. जानें हालात क्या और क्यों बन रहे हैं?

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पिछले कुछ समय से मलेरिया के इलाज में इस्तेमाल की जाने वाली एक विशेष दवाई की लगातार और ज़बरदस्त वकालत करते दिखे हैं, लेकिन इसका अंजाम क्या हुआ? कोरोना वायरस के मरीज़ों के इलाज के लिए यह दवाई कितनी कारगर है? इस बारे में मेडिकल विशेषज्ञ भी एकराय नहीं हो पा रहे हैं. कुछ ट्रंप की वकालत को सही बता रहे हैं तो कुछ परेशानी ज़ाहिर कर रहे हैं.

ट्रंप ने एक बार फिर हाल में, मलेरिया के इलाज में इस्तेमाल होने वाले फॉर्मूले हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन hydroxychloroquine को कोविड 19 संक्रमण के इलाज के लिए उपयुक्त बताते हुए कहा था 'मैं डॉक्टर तो नहीं हूं लेकिन मुझमें कॉमन सेंस तो है'. अस्ल में, ट्रंप के इस दवा के इस तरह के प्रचार के कारण इस दवा की बिक्री बेतहाशा बढ़ गई और दूसरी समस्याएं भी खड़ी हुईं. जानें क्या है पूरा परिदृश्य और कैसे विशेषज्ञ ट्रंप के दावे से सहमति और असहमति दर्ज कर रहे हैं.

ट्रंप के कदम को खतरनाक ठहराया
टीवी शो पर ओरेकल के एक डॉक्टर लैरी एलिसन और न्यूयॉर्क के पूर्व मेयर रूडी ​ग्यूलिआनी ने साफ तौर पर ट्रंप के चमत्कारी दवा के दावे को खतरनाक बताते हुए कहा कि एक बड़ा कारण यही ​है कि अमेरिका में वायरस संक्रमण से इतनी मौतें हुईं और जनजीवन ठप हो गया. साथ ही, दुनिया भर में एक ऐसी दवा को लेकर बहस छिड़ गई, जिसके कोरोना संक्रमण के लिए प्रयोग के बारे में विज्ञान के पास अब भी कोई प्रामाणिक अध्ययन नहीं है.



क्या दावे के पीछे ट्रंप का कोई फायदा है?


एनवायटी के हवाले से आ रही खबर को अगर सही माना जाए तो हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवा के इस समय इस्तेमाल से कई फार्मा कंपनियों को बेतहाशा लाभ हो सकता है. साथ ही, इनके शेयरहोल्डरों और वरिष्ठ कर्मचारियों को भी. कहा गया है कि ट्रंप के निजी वित्तीय हित एक फ्रेंच फार्मा कंपनी सनोफी से जुड़े हुए हैं, जो हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन के एक ब्रांड प्लैक्वेनिल का उत्पादन करती है.

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ट्रंप के दावों के बाद न सिर्फ अमेरिका बल्कि दुनिया में कई जगह हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवा की मांग काफी बढ़ गई. फाइल फोटो.


यही नहीं, ट्रंप के कुछ सहयोगियों के हित भी सनोफी से जुड़े हैं. रिपब्लिकन पार्टी के लिए बड़े दानदाता रहे केन फिशर की म्यूचुअल फंड कंपनी फिशर एसेट मैनेजमेंट सनोफी की सबसे बड़ी शेयरहोल्डर है. सनोफी और एक अन्य फार्मा कंपनी मायलान में इनवेस्को का भी निवेश है और इनवेस्को से वाणिज्य सचिव विलवर रॉस का संबंध रहा है.

ट्रंप के पक्ष में आए विशेषज्ञों की राय
ट्रंप के इस तरह के दावे के बाद अब संकट यह खड़ा है कि मेडिकल क्षेत्र के विशेषज्ञ इस दवा के कोविड 19 संक्रमण के इलाज के लिए उपयोग को लेकर एकराय नहीं हैं. ट्रंप के दावे को डिफेंड करते हुए ब्रुकलिन अस्पताल के डॉ. जोशुआ का बयान इस तरह रहा :

ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति हैं और वह राष्ट्र में आशा का संचार करना चाहते हैं. मुसीबत के समय में अगर आपके पास उम्मीद न हो, तो हालात बहुत खराब हो जाते हैं. भले ही इस दावे के पीछे पुख्ता वैज्ञानिक अध्ययन न हो, फिर भी ट्रंप के इस कदम को अनुचित नहीं कहना चाहिए.




क्या दावे को इस दलील से जायज़ माना जाए?
न्यूयॉर्क के ब्रुकलिन के एक अस्पताल वायकॉफ के डॉक्टर के हवाले से कहा गया है कि इस अस्पताल में यह दवा मुहैया नहीं कराई जा रही. वहीं, ब्रॉंक्स के एक अस्पताल के एक और डॉक्टर ने बगैर प्रमाण के एक दवा का प्रचार करने के ट्रंप और स्थानीय प्रशासन की आलोचना करते हुए कहा 'झूठी उम्मीद का सहारा देना भी बहुत खराब हालात का कारण हो सकता है.'

क्या बन रहे हैं हालात?
एक तरफ इस दवा के गंभीर साइड इफेक्ट सामने आने के बाद स्वीडन के अस्पतालों में कोरोना वायरस संक्रमण के इलाज के लिए इस दवा के इस्तेमाल को रोक दिया गया है, वहीं न्यूयॉर्क के स्थानीय प्रशासन ने कहा है कि वो ट्रंप से चर्चा कर तय करेगा कि इस दवा की सप्लाई को बढ़ाया जाए या नहीं. स्थानीय प्रशासन ने माना है कि इसके पीछे कोई मानक अध्ययन नहीं है, फिर भी कहा है कि इस दवा के बारे में सामने आए दावों से एक उम्मीद तो है.

भारत सरकार से मांगी बड़ी मात्रा में दवा
अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने एक आपातकालीन आदेश जारी करते हुए कहा था कि डॉक्टर ठीक समझें तो मलेरिया के लिए प्रचलित इस दवा का इस्तेमाल कोरोना वायरस सक्रमण के ​इलाज के लिए करें. ट्रंप ने कहा था कि उनकी सरकार इस दवा के करीब तीन करोड़ डोज़ बांटेगी और इसके बाद उन्होंने भारत सरकार से और ज़्यादा की गुज़ारिश की.

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अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ. फाइल फोटो.


डॉक्टरों के बीच ​है चिंता का माहौल
न्यूयॉर्क के लैंगॉन हेल्थ के निदेशक डॉ डेनियल स्टरमैन के हवाले से एनवायटी की रिपोर्ट में कहा गया है कि हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन का इस्तेमाल डॉक्टर कर ज़रूर रहे हैं लेकिन इसके असर को लेकर मौजूद डेटा 'कमज़ोर और अप्रामाणिक' है. स्टरमैन के मुताबिक 'इस समय हम नहीं जानते कि हमारे मरीज़ों को इस दवा से लाभ हो रहा है या नहीं'.

वहीं, वील कॉर्नेल मेडिसिन के संक्रामक रोग विभाग के प्रमुख डॉ. रॉय गलिक के हवाले से कहा गया है कि मामले को देखकर इस दवा का इस्तेमाल किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि वो इस दवा के फायदे और नुकसान बताने और यह भी बताने के बाद कि उन्हें नहीं पता कि यह दवा असरदार होगी या नहीं, मरीज़ को यह दवा देते हैं. इसी तरह की कई डॉक्टरों की राय रिपोर्ट में दर्ज है, जिससे समझा जा सकता है कि डॉक्टर इस दवा को लेकर पसोपेश में हैं.

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