ईरान में पहलवान को फांसी पर क्यों दुनिया है नाराज़? क्या यह निर्दोष की हत्या है?

ईरान में पहलवान को फांसी पर क्यों दुनिया है नाराज़? क्या यह निर्दोष की हत्या है?
ईरान के नेशनल चैंपियन रेसलर नाविद अफकारी.

इस्लामिक रिपब्लिक (Islamic Republic) कहलाने वाले ईरान की दो अदालतों (Iran Judiciary) ने सिर्फ इसलिए फांसी की सज़ा सुनाई कि खिलाड़ी ने सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों (Protests) में हिस्सा लिया था! क्या यह पूरा केस झूठा था? जानिए क्या है सच्चाई.

  • News18India
  • Last Updated: September 16, 2020, 2:45 PM IST
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ईरान ने बीते शनिवार यानी 12 सितंबर को अपने रेसलिंग चैंपियन (Wrestling Champion) नाविद अफकारी (Navid Afkari) को फांसी पर लटका दिया तो पूरी दुनिया में शोक के साथ ही गुस्सा भी देखा गया. सरकार के खिलाफ प्रदर्शनों (Protest Against Government) के दौरान एक सुरक्षा गार्ड की हत्या (Security Guard Killing) के इल्ज़ाम में 27 वर्षीय अफकारी को शिराज़ (Shiraz) में फांसी पर लटाकाए जाने की खबरें मीडिया में आने के बाद भारत समेत दुनिया भर में लोग जानना चाह रहे हैं कि अफकारी को फांसी की सज़ा क्यों दे दी गई और एक नेशनल चैंपियन के खिलाफ मुकदमा कैसे चला?

न्यूज़18 ने आपको अफकारी के बारे में बताया था कि उनका खेलों में रिकॉर्ड कितना शानदार रहा. अब जानिए कि अफकारी के खिलाफ किस तरह मुकदमा चला और कैसे उन्हें दो सज़ा ए मौत (Capital Punishment) दी गईं.

अफकारी और उसके भाइयों पर आरोप?
साल 2018 में 17 सितंबर में अफकारी को गिरफ्तार किए जाने के बाद पिछले दिनों ईरान के क्रिमिनल कोर्ट ने उन्हें हत्या का दोषी करार देकर मौत की सज़ा दी और फिर रिवॉल्यूशनरी कोर्ट ने ईशनिंदा का दोषी करार देकर यही सज़ा सुनाई. इन दोनों फैसलों के पीछे 2 अगस्त 2018 को शिराज़ शहर में एक सिक्योरिटी गार्ड की हत्या का एक मामला था.
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नाविद अफकारी को मौत की सज़ा न दिए जाने के पक्ष में ईरान में प्रदर्शन होते रहे.




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इसके साथ ही, अफकारी के दो भाइयों वाहिद को 56 साल और हबीब को 24 साल कैद की सज़ा सुनाई गई है. ये भी अदालती फरमान है कि दोनों को 74-74 कोड़े मारे जाएं. तीनों अफकारी भाइयों ने तमाम इल्ज़ामों से इनकार किया था, लेकिन बीते अगस्त महीने के आखिर में ये फैसले सुना दिए गए.

किस मामले में हुई इतनी सख्त सज़ा?
ईरान में बढ़ती हुई बेरोज़गारी के मोर्चे पर नाकामी और डूबती अर्थव्यवस्था को उबारने में नाकाबिल साबित हो रही सरकार के खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शन 2017 से शुरू हुए थे. मांग की गई थी कि इस्लामिक शासन पद्धति को खत्म किया जाए. इन विरोध प्रदर्शनों में अफकारी बंधु शामिल हुए थे. नाविद अफकारी चूंकि सेलिब्रिटी खिलाड़ी थे, इसलिए कथित तौर पर सरकार ने उन्हें निशाने पर लिया.

स्टेट की तरफ से आरोप लगाया गया कि प्रदर्शनों के दौरान अफकारी ने एक सिक्योरिटी गार्ड हुसैन तुर्कमान पर चाकू से हमला किया, जिससे उसकी मौत हुई. इस मामले की हकीकत पर किस तरह सवाल खड़े हैं?

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अफकारी बंधुओं को दी गई सज़ा को न्याय के बजाय क्रूरता करार दिया जा रहा है.


अफकारी की फांसी पर दुनिया की नाराज़गी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से लेकर अंतर्राष्ट्रीय ओलिंपिक कमेटी और यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग ने अफकारी को इतनी सख्त सज़ा न दिए जाने की मांग की थी. काफी अंतर्राष्ट्रीय दबाव के बावजूद ईरान सरकार ने अफकारी को फांसी पर लटका दिया. इसके बाद से पूरी दुनिया से तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है. ईरान में फांसी की सज़ा पर रोक लगाने की मांग की जा रही है.

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'ये किसी देश का आतंरिक मामला नहीं हो सकता...' संयुक्त राष्ट्र ने अफकारी मामले में हुए मानवाधिकार हनन के बारे में तीखी राय ज़ाहिर की. इसके अलावा, यूरोपीय संघ के प्रवक्ता जोसेफ बॉरेल और अमेरिका के गृह सचिव माइक पॉम्पियो ने भी ईरान के इस क्रूर फैसले की आलोचना की. एमनेस्टी जैसी कई अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं ने इसे न्याय के साथ डरावना खिलवाड़ करार दिया है.

ईरान की ही पत्रकार मसीह अलीनिजाद ने ट्विटर पर लिखा कि 'हम ईरानियों में बहुत गुस्सा है क्योंकि हममें से एक को विरोध करने के जुर्म में इस्लामिक रिपब्लिक ने मार डाला. 21वीं सदी में यह बर्दाश्त किए जाने वाली बात नहीं है.' मसीह ने लिखा कि ईरान को खेल जगत से बहिष्कृत कर देना चाहिए. मसीह ने अपने वीडियो में अफकारी के ट्रायल पर उंगली उठाते हुए इसे सरकार द्वारा हत्या करार दिया है.



क्या विश्वसनीय नहीं ईरान न्याय प्रणाली?
मसीह ने अपने वीडियो में साफ तौर पर आरोप लगाया है कि अफकारी के खिलाफ एक झूठा मुकदमा चलाया गया. मसीह के मुताबिक सिक्योरिटी गार्ड की हत्या को लेकर कोई सबूत ज़ाहिर तौर पर सामने नहीं आया, अफकारी को बचाव के लिए वकील की इजाज़त नहीं दी गई और इस पूरे ट्रायल के बारे में कोई तथ्य सार्वजनिक नहीं किया गया. सिर्फ दो घंटे में अफकारी को दोषी ठहराकर सज़ा दे दी गई.

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अफकारी के मामले में स्टेट की संदिग्ध भूमिका को लेकर खबरें कह रही हैं कि अफकारी का जो टेलीवाइज़ इकबाले-जुर्म प्रसारित किया गया, उस बयान का ए​क हिस्सा उन सैकड़ों इकबालिया बयानों से मैच करता है, जो पिछले एक दशक में इस्लामिक रिपब्लिक ने जबरन झूठे केसों में दर्ज किए.

अफकारी को हो गई थी भनक?
बेशक. अफकारी को सरकारी इरादों की भनक लग चुकी थी. एमनेस्टी इंंटरनेशनल ने जेल में बंद अफकारी की एक वीडियो रिकॉर्डिंग जारी की है, जिसमें वो कह रहे थे 'अगर मुझे मार डाला जाता है तो मैं आपको बताना चाहता हूं कि उस निर्दोष आदमी को फांसी पर चढ़ाया गया, जिसने पूरी कोशिश की थी कि उसकी बात सुनी जाए.' यही नहीं, अफकारी बंधुओं के बारे में किसी भी खबर से उनके परिवार को अधिकारियों ने महरूम रखा.
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