अफ्रीका में मिलिट्री बेसों के लिए भारत और कई देश क्यों कर रहे हैं होड़?

अफ्रीका का नक्शा.
अफ्रीका का नक्शा.

अमेरिका बनाम चीन (US vs China) और चीन बनाम भारत (China vs India) की लड़ाई अफ्रीकी ज़मीन पर बड़ी होती दिख रही है. हॉर्न ऑफ अफ्रीका (Horn of Africa) में कम से कम 11 देशों के सैन्य बेस बन चुके हैं. क्या है ये पूरा माजरा और क्यों है जंग जैसी स्थिति?

  • News18India
  • Last Updated: September 29, 2020, 11:41 AM IST
  • Share this:
हाल में, डीक्लासीफाइड यूके के ज़रिये खुलासा हुआ कि अमेरिका (America) की ट्रेंड की हुई और यूके इंटेलिजेंस (UK Intelligence) के सपोर्ट वाली केन्या की एक पैरामिलिट्री (Kenya Paramilitary) फोर्स टीम ने अंधेरी रात में आतंकी ठिकानों (Terrorism) पर गुपचुप ढंग से हमला कर आतंकियों का सफाया किया. पिछले ही महीने ये खबरें भी रहीं कि अफ्रीका में आतंकवाद (Terrorism in Africa) विरोधी ऑपरेशनों में अमेरिकी अफ्रीकी सैन्य नीतियों के तहत CIA किस तरह लीड रोल में आ गया है. यह सब अचानक चौंकाने वाला मामला नहीं है.

डीक्लासीफाइड यूके की इन खबरों को समझने के लिए पिछले कुछ समय से अफ्रीका में हो रही सैन्य गतिविधियों को समझना ज़रूरी है. अफ्रीका के कई देश विदेशी सेनाओं के बेसों को इजाज़त दे रहे हैं. ऐसे में, अफ्रीकन संघ की शांति व सुरक्षा परिषद को ये चिंताएं भी हैं. इसके बावजूद पूरे अफ्रीकी महाद्वीप में बाहरी देशों की सेनाएं पैठ बना रही हैं. कौन से देश किस तरह अफ्रीकी ज़मीन को अपनी ताकत का अड्डा बना रहे हैं? और भारत की यहां दिलचस्पी क्यों और कैसी है?

ये भी पढ़ें : कितने देशों में मुमकिन हुई वर्चुअल संसद? भारत में मांग और मुश्किलें



ताज़ा खबरों की मानें तो कम से कम 13 देश अफ्रीकी ज़मीन पर अपने सैन्य बेस बना चुके हैं, जिनमें भारत भी शामिल है. अमेरिका और फ्रांस इस मामले में काफी प्रमुखता से सैन्य गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं, तो डिजिबॉती हॉर्न ऑफ अफ्रीका की वो ज़मीन बन गया है, जहां कई विदेशी सेनाएं तैनात हो चुकी हैं. आइए देखें कि ये पूरा माजरा क्या है.
india africa relation, indian navy, indian military, india china tension, भारत अफ्रीका संबंध, भारतीय नेवी, भारतीय सेना, भारत चीन संघर्ष
आईएसएस अफ्रीका से साभार इस ग्राफिक में साफ दिखता है कि अफ्रीकी महाद्वीप पर किस तरह शक्तिशाली देशों की सेनाएं अपने ठिकाने बना चुकी हैं.


क्या है विदेशी सेनाओं की जिओ-पॉलिटिक्स?
अफ्रीकी महाद्वीप में दुनिया भर की ताकतें पावर गेम किस तरह खेल रही हैं, इसका नमूना ये है कि अमेरिका ने यहां 7000 सैनिक तैनात कर रखे हैं. युगांडा, दक्षिण सूडान, सेनेगल, नाइजर, गैबॉन, कैमरून, बुर्किना फासो और कोंगो जैसी जगहों पर अमेरिकी सेना तैनात है. यही नहीं, 2000 अमेरिकी सैनिक अलग से ट्रेनिंग मिशन के लिए 40 अफ्रीकी देशों में फैले हुए हैं.

ये भी पढ़ें : अमेरिका चुनाव में अंतरिक्ष से वोट कैसे देते हैं एस्ट्रॉनॉट्स?

अफ्रीकी देशों में फ्रांस के 7500 से ज़्यादा सैनिक तैनात हैं. वहीं, हॉर्न ऑफ अफ्रीका में चीन अपनी सशक्त सैन्य मौजूदगी दर्ज करा रहा है. चीन की नेवी ने 26,000 नौसैनिक यहां तैनात कर रखे हैं. अफ्रीका के लेमोनियर में इटली, स्पेन, जर्मनी और जापान के भी सैन्य बेस तैयार हैं.

भारत की दिलचस्पी क्या है?
अफ्रीका में खासतौर से, नौसेना को लेकर भारत ने दिलचस्पी दिखाई है. अफ्रीका के समुद्र से लेकर हिंद महासागर तक चीन जिस तरह से आक्रामक अंदाज़ में दिख रहा है, उसके मुकाबले के लिए भारत ने यहां अपना सैन्य नेटवर्क खड़ा करना चाहा है. हॉर्न ऑफ अफ्रीका और मैडागास्कर में भारत ने सैन्य तैनाती करते हुए सेशेल्स, मॉरिशस और अफ्रीका के आसपास की अन्य लोकेशनों पर 32 कोस्टल रडार सर्विलांस स्टेशन भी बनाए हैं.

क्यों हैं यहां इतनी उथल-पुथल?
सीधा सवाल खड़ा होता है कि अफ्रीकी महाद्वीप में इतनी सैन्य हलचल क्यों है. इसकी वजह है, अफ्रीकी देशों में फैलता सशस्त्र आतंकवाद, विद्रोह और अफ्रीकी समुद्र में लुटेरों व डाकुओं का वर्चस्व. इन तमाम कारणों के नाम पर दुनिया की बड़ी ताकतें अफ्रीका में अपने सैन्य बेस बनाकर अफ्रीकी देशों की मदद करने का दावा कर रही हैं, लेकिन विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यहां जिओ पॉलिटिक्स के तहत भविष्य के लिए युद्धनीति तैयार की जा रही है.

ये भी पढ़ें :-

किसी राज्य में चुनाव की घोषणा के बाद सियासी दलों पर कैसे लगती है लगाम?

Explained : श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुद्दा, 1968 का समझौता और ताज़ा विवाद क्या है?

एक तरफ, केन्या और सोमालिया में जहां आतंक बेहद बढ़ रहा है, तो एडन और ओमान की खाड़ियों में समुद्री डाकुओं का कहर. इन हालात को बहाना बनाते हुए अमेरिका और चीन यहां हथियारों और सैन्य ताकत के वर्चस्व की लड़ाई में शामिल हो गए हैं. इस लड़ाई में गुटबंदी के तहत कई देश जुटे हुए हैं.

और भी देश हैं होड़ में
तुर्की और संयुक्त अरब अमीरात वो दो पश्चिम एशियाई देश हैं, जो अफ्रीका में अच्छी खासी सैन्य मौजूदगी रखते हैं. सोमाली नेशनल आर्मी की ट्रेनिंग और सोमाली नेवी की मदद के लिए तुर्की सेना यहां है, तो यमन के खिलाफ लड़ाई में एरिट्रिया की मदद के लिए यूएई की सेना यहां मौजूद है.

india africa relation, indian navy, indian military, india china tension, भारत अफ्रीका संबंध, भारतीय नेवी, भारतीय सेना, भारत चीन संघर्ष
भारत ने अफ्रीकी समुद्र में बढ़ रहे चीनी वर्चस्व से निपटने के लिए रणनीति बनाई.


अमेरिका-चीन वर्चस्व के बीच रूस!
अफ्रीका में जिस सैन्य वर्चस्व की लड़ाई चल रही है, उसमें रूस इन दो शक्तियों के विकल्प के तौर पर उपस्थिति दर्ज करा रहा है. हालांकि 1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद यहां रूस की मौजूदगी न के बराबर रह गई थी, लेकिन पिछले कुछ समय से फिर हलचलें शुरू हुई हैं. यूक्रेन, सीरिया और कॉकेसस में भू राजनीतिक सफलता के बाद से रूस ने मिस्र, अल्जीरिया, अंगोला, तंज़ानिया, सोमालिया, माली, लीबिया और सूडान के साथ हथियारों और सैन्य कारोबार को बहुत बढ़ावा दिया है.

हालांकि अब सेंट्रल अफ्रीका रिपब्लिक में रूस का कोई सैन्य बेस नहीं है, लेकिन इस साल जिस तरह रूस ने अफ्रीकी सरकार और विद्रोहियों के बीच मध्यस्थता की है, उससे माना जा रहा है कि जल्द ही रूस की सेनाएं भी यहां होंगी.

तो पूरा माजरा कुछ इस तरह का है कि व्यावसायिक हितों, साथी देशों की गुटबंदी और अफ्रीकी ज़मीन पर प्रभुत्व के लिए दुनिया की एक होड़ चल रही है. कुछ विशेषज्ञ मान रहे हैं कि अफ्रीका खुद मेहमान नवाज़ी में दिलचस्पी ले रहा है तो कुछ का कहना है कि यहां बन रहे हालात से विश्व शांति को खतरा है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज