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वो जल्लाद जो फांसी के फंदे से लॉकेट बनाकर ऊंची कीमत में बेचता था

News18Hindi
Updated: January 14, 2020, 3:25 PM IST
वो जल्लाद जो फांसी के फंदे से लॉकेट बनाकर ऊंची कीमत में बेचता था
फांसी के बाद रस्सी का क्या होता है

कई बार ये सवाल पूछा जाता है कि फांसी देने के बाद इस्तेमाल की गई रस्सी का क्या होता है. ब्रिटेन में जिन दिनों फांसी दी जाती थी, तब इस रस्सी के टुकड़ों को लोग ऊंची कीमत में खरीदकर घर पर रखते थे और मानते थे कि ये किस्मत बदल सकती है. कोलकाता का जाना माना नाटा जल्लाद इस रस्सी से लॉकेट बनाकर बेचता था

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  • Last Updated: January 14, 2020, 3:25 PM IST
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निर्भया गैंगरेप मामले में चारों गुनहगारों को फांसी देने की तारीख तय हो चुकी है. ये भी तय हो चुका है कि मेरठ का पवन जल्लाद उन चारों को फांसी पर लटकाएगा. लेकिन देश का एक जल्लाद ऐसा भी था जो फांसी देने के बाद इस्तेमाल की गई रस्सी से लॉकेट बनाता था और उसे ठीक-ठाक कीमत पर बेच देता था.

ये जल्लाद कोलकाता का नामी जल्लाद नाटा मलिक था. अब उसकी मृत्यु हो चुकी है लेकिन फांसी देने के बाद प्रयोग में लाए गए फंदे को अपने साथ घर ले आता था. फिर उनसे लॉकेट बनाकर बेचता था. उसके घर के सामने इसे खरीदने वालों की लाइन लग जाती थी.

नाटा मलिक ने अपनी आखिरी फांसी वर्ष 2004 में दी थी. जिस शख्स को उसने फांसी दी थी, उसका नाम धनंजय चटर्जी था, जिसमें हेतल पारिख नाम की एक लड़की को रेप के बाद मार डाला था. तब वो एक अपार्टमेंट में गार्ड था.

क्या किया फांसी की रस्सी का 

धनंजय को फांसी देने के बाद मलिक फांसी के फंदे को घर आया. जेल मैन्युअल के अनुसार ये रस्सी छह मीटर लंबी होती है. उसने इसे छोटा-छोटा काटकर इससे खासी कमाई की. उसने फांसी की रस्सी से खूब लॉकेट बनाकर बेचे.

नाटा मलिक बंगाल का जाना-माना जल्लाद था. उसे उत्तर पूर्व के राज्यों में फांसी के लिए बुलाया जाता था


लॉकेट को फैला था अंधविश्वास बंगाल ना जाने कैसे ये अंधविश्वास फैल गया कि फांसी की रस्सी का लॉकेट पहनने से किस्मत पलट जाती है. अगर आपके पास नौकरी नहीं है तो रोजगार मिल जाता है. अगर कर्ज में दबे हैं तो इससे छुटकारा मिल जाएगा. बेहतर दिन शुरू हो जाएंगे. जब ये बात कोलकाता में फैलने लगी तो नाटा मलिक के घर के आगे लॉकेट खरीदने लेने वालों की भीड़ लगने लगी.

ब्रिटेन में क्या मान्यता थी
वैसे ब्रिटेन में भी ये माना जाता था कि फांसी की ये रस्सी काफी भाग्यशाली होती है. ये अंधविश्वास वहां 19वीं सदी में काफी ज्यादा माना जाता था. इसके चलते जल्लाद से इस रस्सी को ऊंची कीमतों पर खरीद लिया जाता था.

ब्रिटेन में 19वीं सदी में ये अंधविश्वास फैला था कि फांसी की रस्सी के टुकड़े घर पर रखे तो ये भाग्य को बदल देते हैं


कोलकाता के संगठनों ने विरोध भी किया 
कोलकाता के कई संगठनों ने जल्लाद नाटा मलिक के इस काम का विरोध किया. एंटी डेथ पेनल्टी एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि नाटा मलिक अंधविश्वास फैलाकर फायदा ले रहा है. किसी जल्लाद को ऐसा करने का कोई अधिकार नहीं है. कोलकाता के मंदिरों में भी इसका बहुत विरोध हुआ.

वर्ष 2004 में धनंजय चटर्जी को फांसी देने के बाद जल्लाद नाटा मलिक ने इस्तेमाल हुई रस्सी के ढेर सारे लॉकेट बनाकर लोगों को बेचे


2000 रुपए में बिका था एक लॉकेट 
कोलकाता के अखबार टेलीग्राफ के अनुसार नाटा मलिक ने एक लॉकेट करीब 2000 रुपये तक बेचा. उसके पास पुरानी फांसी दी गईं रस्सियां भी थीं. उनसे बनी लॉकेट वो कुछ सस्ती बेचता था. उसने अपने घर के बाहर एक तौलिए को फांसी की गांठ की शक्ल में टांग रखा था.

वर्ष 2008 में नाटा मलिक की मृत्यु हो गई. उसके बाद उसका बेटा मेहताब ये काम कर रहा है. आमतौर फांसी देने वाले जल्लाद का पेशा पुश्तैनी होता है. नाटा मल्लिक से पहले उसके पिता और बाबा भी यही काम करते थे. भारत में नाटा मल्लिक को सबसे ज्यादा सैलरी पाने वाला जल्लाद कहा जाता है.

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First published: January 14, 2020, 3:25 PM IST
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