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उम्रकैद की सजा के साथ ही खत्म हुई सेंगर की विधायकी, कभी लड़ नहीं सकेंगे चुनाव

News18Hindi
Updated: December 20, 2019, 3:34 PM IST
उम्रकैद की सजा के साथ ही खत्म हुई सेंगर की विधायकी, कभी लड़ नहीं सकेंगे चुनाव
उन्नाव रेप मामले का दोषी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर

अदालत के फैसले के बाद बेशक सेंगर ऊंची अदालत में अपील कर सकते हैं लेकिन उनकी विधायकी तुरंत चली जाएगी. वो ये सजा जारी रहने की स्थिति में कभी चुनाव भी नहीं लड़ सकेंगे

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  • Last Updated: December 20, 2019, 3:34 PM IST
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उन्नाव रेप कांड (Unnao Rape Case) में दिल्ली की तीस हजारी अदालत (Tis Hazari Court Delhi) ने बीजेपी के विधायक कुलदीप सिंह सेंगर (MLA Kuldeep Sengar) को उम्रकैद (Life Imprisonment) की सजा दी है. इस फैसले के बाद उनकी विधायकी ना केवल तुरंत चली जाएगी बल्कि वो कभी चुनाव भी नहीं लड़ सकेंगे.

सुप्रीम कोर्ट ने 10 जुलाई 2013 में लिली थामस बनाम भारत संघ मामले की सुनवाई करते हुए फैसला दिया था कि अगर कोई विधायक, सांसद या विधान परिषद सदस्य किसी भी अपराध में दोषी पाया जाता है तो इसके चलते उसे कम से कम दो साल की सजा होती है वो तुरंत अयोग्य हो जाएगा यानी जनप्रतिनिधि नहीं रहेगा. उस योग्यता को वो तुरंत गंवा देगा.

अब कुलदीप सिंह सेंगर को चूंकि अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है, लिहाजा उनकी विधायकी तुरंत प्रभाव से चली जाएगी बल्कि उम्रकैद के कारण वो कभी चुनाव लड़ भी नहीं सकेंगे.

क्या सीट पर बना रह सकता है

पहले दोषी जनप्रतिनिधि तब तक सीट पर रहता है, जब तक कि निचली अदालत से दोषी ठहराने के बाद वो तमाम ऊपरी अदालतों में अपील करता था और वहां उसका मामला चल रहा होता था लेकिन अब ऐसा नहीं है.

कोर्ट ने ये भी प्रावधान किया था कि अगर कोई जनप्रतिनिधि आर्थिक से लेकर किसी भी तरह के अपराध में दोषी पाया जाता है और उसे दो साल या ज्यादा की सजा होती है तो वो सजा के दौरान पांच साल के कार्यकाल वाला कोई चुनाव भी नहीं लड़ सकता है.

सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2013 में फैसला दिया था, जिसके तहत अगर कोई जनप्रतिनिधि दोषी करार दिया गया और उसे दो साल की सजा हुई तो वो पद के अयोग्य हो जाएगा
कब तक कर सकते हैं अपील 
हालांकि सेक्शन 8(4) के जन प्रतिनिधि कानून के तहत कोई भी जनप्रतिनिधि किसी अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद तीन महीने के भीतर ऊपरी अदालत में अपील कर सकता है. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद तत्कालीन यूपीए सरकार ने इस फैसले को पलटने के लिए कानून लाने का प्रयास किया था.

यूपीए ने जनप्रतिनिधियों को बचाने की कोशिश की थी
सरकार ने वर्ष 2013 में जनप्रतिनिधि कानून में संशोधन के लिए एक बिल 30 अगस्त 2013 में राज्यसभा में पेश किया. जिसे तत्कालीन कानून मंत्री कपिल सिब्बल ने पेश किया. इसमें प्रावधान था कि जन प्रतिनिधि दोषी करार दिए जाने के तुरंत बाद अयोग्य नहीं होंगे. इस बारे में केंद्र सरकार ने एक रिव्यू पिटीशन भी सुप्रीम कोर्ट में फाइल किया लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया.

इसके बाद 24 सितंबर को एक अध्यादेश के जरिए सरकार ने इस बिल को फिर प्रभाव में लाने की कोशिश की लेकिन तब कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी का मानना था कि ये अध्यादेश एकदम फालतू है, इसे नहीं लाया जाना चाहिए. इसके बाद सरकार ने इसे समेट लिया. हालांकि माना जा रहा था कि सरकार चारा घोटाले में दोषी ठहराए जा चुके लालू यादव को बचाने का प्रयास कर रही है. सरकार ने राहुल गांधी के रुख के पांच दिनों के भीतर बिल और अध्यादेश दोनों वापस ले लिया.

कितने जनप्रतिनिधि अब तक अयोग्य हुए हैं
इस बिल को आने के बाद से अब तक 11 सांसद और विधायक विभिन्न अपराधों में दोषी ठहराए जा चुके हैं, जिसमें जयललिता और लालू यादव शामिल हैं.

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कुलदीप सिंह सेंगर बीजेपी के तीसरे विधायक हैं, जिन्हें अदालत ने दोषी करार दिया है और वो पद के अयोग्य साबित हो सकते हैं. अगर वो अयोग्य साबित हुए तो ना तो चुनाव लड़ पाएंगे और ना ही विधायक पद पर रह सकेंगे.


दोषी ठहराए गए बीजेपी के तीसरे विधायक 
कुलदीप सिंह सेंगर बीजेपी के तीसरे जनप्रतिनिधि हैं, जो अयोग्य साबित होंगे. सबसे पहले बीजेपी के महाराष्ट्र के विधायक बिजली चोरी में दोषी ठहराए गए थे तो उसके बाद मध्य प्रदेश में विधायक आशारानी को अपनी नौकरानी के लिए आत्महत्या के हालात पैदा करने का दोषी पाया गया था. सेंगर पार्टी के तीसरे विधायक हैं. बीजेपी अयोग्य हुए जनप्रतिनिधियों के सूची में तीन विधायकों के साथ टॉप पर है. जेडीयू, आरजेडी, अन्नाद्रमुक, शिवसेना, झारखंड पार्टी और कांग्रेस के विधायक अयोग्य करार दिये जा चुके हैं.

सेंगर को उम्रकैद की सजा क्यों
कुलदीप सिंह सेंगर को बलात्कार के मामले में अदालत पहले ही दोषी ठहराया चुकी थी. आईपीसी की धारा 376 (ई) के तहत बार-बार बलात्कार के दोषियों को उम्रक़ैद या मौत की सज़ा का प्रावधान किया गया था. इसी के अनुसार सेंगर को ये सजा सुनाई गई. उनकी सजा इसलिए और गंभीर हो गई क्योंकि वो विधायक थे और उन्होंने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए ना केवल पीड़ित परिवार को प्रताड़ित किया बल्कि कई केसों में भी फंसाया;

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First published: December 20, 2019, 2:50 PM IST
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