लद्दाख 1989 में ही बन सकता था केंद्रशासित प्रदेश, लेकिन...

केंद्र सरकार के ताज़ा फैसले के तहत जम्मू कश्मीर से अलग होकर नए केंद्रशासित प्रदेश के तौर पर सामने आए लद्दाख में लंबे समय से ये मांग थी कि उसे अलग केंद्रशासित प्रदेश का दर्जा मिले. क्या थे कारण? जानें पूरी कहानी.

News18Hindi
Updated: August 6, 2019, 3:25 PM IST
लद्दाख 1989 में ही बन सकता था केंद्रशासित प्रदेश, लेकिन...
लेह-श्रीनगर हाईवे. फाइल फोटो.
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Updated: August 6, 2019, 3:25 PM IST
जम्मू व कश्मीर में अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को खत्म करने संबंधी कानून बनने के बाद राज्य के दो हिस्से दो केंद्रशासित प्रदेशों के तौर पर प्रभाव में आ गए हैं. जम्मू कश्मीर एक अलग केंद्रशासित प्रदेश होगा, जहां दिल्ली व पुडुचेरी जैसी शासन व प्रशासन व्यवस्था होगी और लद्दाख एक अलग केंद्रशासित प्रदेश होगा, जहां चंडीगढ़ की तरह प्रशासन व्यवस्था होगी. लेकिन, क्या आप जानते हैं कि इस घोषणा से पहले भी लद्दाख एक तरह अपना खुद की अलग प्रशासन व्यवस्था ही चला रहा था? या यों कहिए कि जम्मू कश्मीर से अलग होकर तकरीबन केंद्रशासित प्रदेश बनाए जाने की मांग यहां बरसों से बनी हुई थी.

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कानून बनने से यानी ठीक एक दो दिन पहले तक स्थिति ये थी कि जम्मू कश्मीर राज्य के दो ज़िले लेह और कारगिल लद्दाख क्षेत्र के अंतर्गत आते थे, जहां अपनी एक स्वायत्त परिषद यानी ऑटोनॉमस काउंसिल थी. आपके लिए ये जानना ज़रूरी और दिलचस्प भी हो सकता है कि आखिर किन वजहों से इन दो ज़िलों यानी अब लद्दाख प्रदेश में ये व्यवस्था थी और क्यों लंबे समय से लद्दाख को केंद्रशासित प्रदेश बनाए जाने की मांग उठती रही थी.

सांप्रदायिक सौहार्द्र के लिए मशहूर था इलाका

आधुनिक इतिहास की परतें छानी जाएं तो लद्दाख आम तौर से सांप्रदायिक सौहार्द्र की जगह रहा है. लेकिन, यहां पिछले कुछ दशकों से सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने की राजनीति की शुरूआत हुई. 80 के दशक में माहौल बिगड़ने से पहले कुछ वजहें और पीछे भी थीं. मसलन, 1931 में जब नए-नए बौद्ध बने कश्मीरियों ने कश्मीरी राज बोधि महासभा की स्थापना की, तब यहां संभवत: पहली बार ऐसा हुआ कि यहां रहने वाले मुस्लिमों को लेकर एक अलगाव का एहसास देखा गया था. इसके बाद राजनीति के कारण यहां सांप्रदायिक संतुलन बिगड़ा था.

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1989 में लद्दाख को केंद्रशासित प्रदेश बनाए जाने की मांग उठी थी, तब बौद्धों ने कई प्रदर्शन और मार्च किए थे. (चित्र : साभार कश्मीरलाइफ.नेट)

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संप्रदाय आधारित परिसीमन
साल 1979 में जब लद्दाख क्षेत्र का दो ज़िलों में परिसीमन किया गया, तब मुस्लिम बहुल आबादी के कारण कारगिल को एक अलग ज़िला बनाया गया और बौद्ध बहुल आबादी के कारण लेह को अलग. इस तरह के परिसीमन के कारण सांप्रदायिक भावनाओं ने ज़ोर पकड़ा. हुआ ये कि उस वक्त लद्दाख के बौद्धों ने आरोप लगाने शुरू किए कि जम्मू कश्मीर राज्य बौद्धों के मुकाबले मुस्लिमों के प्रति सहानुभूति रखता है और पक्षपाती रवैया इख्तियार करते हुए भ्रष्टाचार को बढ़ावा देता है.

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इन तमाम आरोपों और घटनाओं के बीच, 80 के दशक में इस मांग ने ज़ोर पकड़ना शुरू किया कि लद्दाख को केंद्रशासित प्रदेश का दर्जा दिया जाए ताकि जम्मू कश्मीर राज्य की तरफ से होने वाले पक्षपात और भेदभाव से बचा जा सके.

फिर हुए 1989 के दंगे
करीब एक दशक तक रहे तनावपूर्ण माहौल के बाद 1989 में लद्दाख में संभवत: पहली बार इतने बड़े पैमाने पर दंगे हुए थे कि दुनिया भर के मीडिया ने इसे कवरेज दिया था. बौद्धों ने जबरन धर्म परिवर्तन का आरोप भी लगाया था और कई विरोध प्रदर्शन निकाले थे. जम्मू कश्मीर राज्य सरकार ने बौद्ध प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चला दी थीं, जिससे दंगे और भड़क गए थे. इन दंगों के तुरंत बाद अंजाम ये हुआ कि लद्दाख बौद्ध एसोसिएशन ने राज्य के मुस्लिमों को सामाजिक और आर्थिक बहिष्कार करने का ऐलान कर दिया. ये स्थिति तीन साल तक रही और उसके बाद राजनीतिक फैसलों की बारी आई.

तब इसलिए नहीं बना था केंद्रशासित प्रदेश
1992 में जब एलबीए ने बहिष्कार को वापस लिया तो तत्काल उस मांग ने ज़ोर पकड़ा कि लद्दाख को केंद्रशासित प्रदेश में तब्दील किया जाए. लेकिन, ये फैसला केंद्र सरकार के लिए आसान नहीं था. एनवायटी की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि नई दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में यही धारणा थी कि लद्दाख की इस मांग को मान लिया गया तो फिर हिंदू बहुल आबादी वाले जम्मू से भी इसी तरह की मांग उठ सकती थी और ऐसे में कश्मीर राज्य में सिर्फ मुस्लिम आबादी ही बचने वाली थी. सरकार ने इस मांग को ठुकरा दिया लेकिन एक नई व्यवस्था पर सह​मति बनी.

लेह और कारगिल दो ज़िलों के लिए अलग अलग लद्दाख ऑटोनॉमस हिल डेवलपमेंट काउंसिल बनाई गई यानी एक तरह से इन दो ज़िलों को प्रशासन की स्वायत्त व्यवस्था दी गई, जिसमें जम्मू कश्मीर राज्य का दखल बहुत कम रह गया था. लेह के लिए ऑटोनॉमस काउंसिल 1995 में बनी थी और कारगिल के लिए 2003 में ये काउंसिल बनी.

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First published: August 6, 2019, 3:17 PM IST
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